पेटलावद।माही परियोजना पेटलावद क्षेत्र के लिए जीवनदायनी रही है किंतु प्रशासन में बैठे अधिकारियों की लापरवाही और ठेकेदार के साथ मिलभगत के कारण करोडो रूपये के माही परियोजना के कार्य आज भी अधर में लटके हुए दिखाई दे रहे है जिस कारण से करोड खर्च होने के बाद भी किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिस कारण किसान काफी परेशान है और इस संबंध में अधिकारियों से भी शिकायत कर चुके है। किंतु कोई सुनवाई नहीं हुई है।
कोई नहीं भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने वाला।....
माही परियोजना के प्रथम फेस का कार्य समाप्त होने के बाद दूसरे फेस का कार्य रायपुरिया के आगे से ग्रामीण क्षेत्रों में होता हुआ बामनिया के समीप तक पहुंचा था। जिसके तहत 200 करोड रूपये खर्च कर 10 हजार हेक्टयर भूमी को सिंचित करने का लक्ष्य रखा गया था। किंतु यह कार्य पूर्ण तो हो गया इसके बावजूद भी लगभग 60 प्रतिशत किसानों को इस योजना का अभी तक लाभ नहीं मिला। इस ओर न तो अधिकारियों का ध्यान है न ही जिम्मेदार जनप्रतिनिधि आज तक कोई आवाज उठा सके न ही आदिवासीयों के हितेषी कहे जाने वाले संगठन आगे आकर आवाज उठा सके।
अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत से शासन का करोड रूपया व्यर्थ....
योजना के तहत दूरस्थ क्षेत्र तक माही का पानी पहुंचाने के लिए योजना के दूसरे फेस में तत्कालीन सांसद स्व. दिलीपसिंह भूरिया के प्रयासों से कार्य प्रारंभ हुआ उसकी अनुमानीत लागत 200 करोड रूपये बताई गई। जिसके बाद कार्य प्रारंभ हुआ कहीं नहर खोदी गई तो कहीं पाइप डालकर पानी पहुंचाने के प्रयास हुए और किसानों के ग्रुप बना कर कुएं खोदे गए वहां तक माही नहर का पानी लाना और उसके पश्चात वहां से पानी किसानों के खेतो तक पहुंचाने के लिए अलग से माही परियोजना की डीपीयां लगवा कर बिजली के तार व खम्बे खडे करवा कर लाइट की व्यवस्था कुओं तक करने का ठेका दिया गया। किंतु ठेकेदार के द्वारा कार्य पूर्ण न करते हुए अधूरे कार्य ही छोड दिए गए। जिस कारण से कई जगहों पर केवल बिजली के पोल खडे है तो कई केवल पोल रखे हुए है और कहीं डिपीयां लगे हुए पोल जमीन पर गिर गये है। जिस कारण से योजना के तहत बनाए गये कुएं और उन कुओं के समीप बनाए गयी पक्की झोपडियां भी टूट गई है।
करोड खर्च के बाद भी किसानो को कोई लाभ नहीं।...
विद्युत लाइन के अभाव में शासन प्रशासन के करोडों रूपये खर्च होने के बावजूद भी किसानों को कोई लाभ नहीं मिला। इस ओर आखिर ध्यान कौन देगा? जवाबदार अधिकारी यदि योजना को लेकर संवेदनशील होते तो आखिर ठेकेदार इस प्रकार का कार्य कर सकता था।इसमें दोषी कौन है और इसकी सजा कौन भुगत रहा है।
किसानों से जब इस सबंध में चर्चा की गई तो उनका कहना है कि सरकार के पैसों का दुरपयोग करने वाले अधिकारी और ठेकेदार के खिलाफ उचित कार्यवाही होनी चाहिए और उन्हें दंड मिलना चाहिए।
जांच कर दोषीयों पर हो कार्यवाही....
किसानों का मानना है कि यदि कलेक्टर या एसडीएम स्वयं संज्ञान लेकर मामले की जांच करवा ले तो सबूत खुले रोड पर पडे मिलेगें जो की चीख चीख कर भ्रष्टाचार को उजागर कर रहे है।
इस संबंध में माही परियोजना के एसडीओ से चर्चा करने की कोशीश की गई किंतु उन्होनें मोबाइल नहीं उठाया।





