छकतला में लगे भगोरिया मेले में गूंजी ढोल-मांदल की थाप.......

 





आदिवासी संस्कृति को प्रदर्शित करता भगोरिया पर्व का रविवार को समापन हो गया। आखिरी दिन छकतला, कुलवट, सोरवा, आमखूंट और झीरण में भगोरिया मेले लगे। छकतला में उत्साह ओर उमंग देखने को मिला। युवक-युवतियों ने समूह में नृत्य किया। युवकों ने बांसुरी की तान छेड़ी तो युवतियों ने समूह के रूप में नृत्य किया। 

नर्मदा के बैकवाटर के समीप कुलवट में भी ग्रामीणों का उत्साह देखते ही बन रहा था। यहां महाराष्ट्र से सटे ग्रामीण, धार, बड़वानी जिलों से भी लोग पहुंचे। छकतला हो या कुलवट या फिर आमखूंट का मेला, हर कहीं मनोरंजन के तमाम साधन थे। बड़े झूलों के अलावा छोटे झूले भी थे। मांदल दल भी आए थे, उन्होंने खूब धमाल मचाया। दोपहर एक बजे बाद मेलों में रौनक नजर आई। मेला स्थलों पर भीड़ उमड़ी। कुर्राटियां लगाते ग्रामीण थिरकते नजर आए। आखिरी भगोरिया होने से राजनीतिक पार्टियों के पदाधिकारी भी पहुंचे।


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