News@ हरिश राठौड़
पेटलावद पिछले 15 वर्षों से अधिक समय से 'सांझा चूल्हा योजना' के अंतर्गत कार्यरत स्वयं सहायता समूहों को हटाकर मध्य प्रदेश सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के रूप में नवाचार व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के परिणामस्वरूप प्रदेश में लाखों स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं बेरोजगार हो जाएंगी।
स्वयं सहायता समूहों ने विपरीत परिस्थितियों में भी आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को भोजन उपलब्ध कराया है। यहां तक कि कोरोना काल में भी, जब जान का खतरा अधिक था, इन समूहों ने अपनी जान की परवाह किए बिना आंगनवाड़ी के बच्चों को भोजन प्रदान किया। इसके बावजूद भी, इन समूहों को हटाना एक 'हिटलरी आदेश' के समान प्रतीत होता है जिसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।
प्रशासन ने एक नया आदेश जारी किया है जिसके तहत अब समूहों से खाना न बनवाकर, आंगनवाड़ी केंद्र पर सहायिका के द्वारा ही खाना बनवाया जाएगा। इस आदेश के खिलाफ स्वयं सहायता समूह संघ पूरे प्रदेश में आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहां स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को 'लखपति दीदी' बनाने का सपना देख रहे हैं, वहीं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का यह फैसला महिलाओं को बेरोजगार करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। इस फैसले से नाराज समूहों ने आगामी दिनों में पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन करने का मन बना लिया है।
पेटलावद तहसील के स्वयं सहायता समूह के संघ पदाधिकारी एवं वनवासी कृषि एवं ग्रामीण मजदूर संघ ने संयुक्त रूप से झाबुआ कलेक्टर के नाम महिला एवं बाल विकास अधिकारी को एक ज्ञापन दिया है, जिसमें उन्होंने समूह को हटाकर सहायिका से खाना बनाने के आदेश को निरस्त करने की मांग की है,
यदि यह आदेश निरस्त नहीं किया गया तो पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
स्वयं सहायता समूह संघ ने स्पष्ट किया है कि वे इस अन्यायपूर्ण आदेश के खिलाफ अपने हक के लिए संघर्ष करते रहेंगे। इस आंदोलन में उनकी एकता और ताकत का प्रदर्शन होगा जो प्रशासन को अपना निर्णय वापस लेने के लिए मजबूर करेगा।

