पेटलावद में सकल जैन समाज ने विहाररत संतों की सुरक्षा के लिए उठाई आवाज...... आर्यिका माताजी दुर्घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग.....



News@ हरीश राठोड 

पेटलावद में आज महावीर समिति के बैनर तले सकल जैन समाज ने एकजुट होकर विहाररत जैन साधु-संतों की सुरक्षा और हाल ही में रीवा में हुई आर्यिका माताजी की दुर्घटना की निष्पक्ष जांच को लेकर अपनी आवाज बुलंद की। सकल जैन समाज के बैनर तले समाजजनों ने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन तहसीलदार अनिल बघेल  को सौंपा।


बड़ी संख्या में समाजजन तहसील कार्यालय पहुंचे ।समाजजनों ने स्पष्ट किया कि हाल ही में आर्यिका माताजी के साथ हुई दुखद घटना मात्र एक सड़क दुर्घटना नहीं है, बल्कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह गंभीर शंकाओं को जन्म देती है, जिसकी निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच अत्यंत आवश्यक है।

जैन समाज ने अपनी मांगों को प्रमुखता से रखते हुए कहा कि विहाररत संत पूरी तरह निहत्थे और अहिंसक होते हैं, जो समाज को शांति और संयम का संदेश देते हैं। उनके साथ लगातार बढ़ती दुर्घटनाएं और हमले पूरे समाज के लिए चिंता का विषय हैं।


उच्चस्तरीय जांच की मांग

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समाज ने मांग की कि इस मामले की जांच एसआईटी (SIT) या न्यायिक आयोग द्वारा कराई जाए और घटना से संबंधित सभी सीसीटीवी फुटेज व डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित कर दोषियों पर कठोरतम कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित हो।ज्ञापन में समाज ने सुरक्षा के लिए ठोस नीति की वकालत की है।

महावीर समिति के अध्यक्ष संजय भंडारी , श्री संघ अध्यक्ष अशोक मेहता एवं तेरापंथ सभा अध्यक्ष नरेन्द्र पालरेचा ने मांग की है कि विहाररत संतों के लिए एक विशेष 'संत सुरक्षा प्रोटोकॉल' लागू किया जाए, जिसके तहत विहार मार्गों पर प्रशासनिक समन्वय, पुलिस सहयोग, ट्रैफिक नियंत्रण और हाईवे व भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरती जाए।


राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति' बनाने की मांग 

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इसके साथ ही भारत सरकार से एक 'राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति' बनाने की मांग की गई है, जिसमें पैदल विहार करने वाले संतों के लिए राष्ट्रीय गाइडलाइन और सुरक्षा एसओपी (SOP) तैयार की जाए।

समाज ने संतों के विरुद्ध होने वाले अपराधों को 'विशेष संवेदनशील' श्रेणी में रखने और स्थानीय स्तर पर 'संत सुरक्षा समन्वय प्रकोष्ठ' व आपातकालीन संपर्क व्यवस्था बनाने की भी पुरजोर मांग की है।

समाज के वरिष्ठ अनोखीलाल मेहता, दिलीप भंडारी, नरेंद्र मोदी, अनोखीलाल लोढ़ा,सुरेश मुथा, सुरेंद्र भंडारी, फूलचंद कांसवा ने मांग की कि संतों के विहार मार्गों पर सुरक्षा एवं यातायात नियंत्रण की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु स्थायी एवं प्रभावी नीति बनाए जाने की भी मांग शासन से की गई।



तपस्वी संतों की सुरक्षा समाज और शासन का दायित्व

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इस मौके पर कीर्तिश चाणोदिया, अनिल मुथा,जितेंद्र मेहता, प्रदीप पटवा , जितेंद्र कटकानी,चेतन कटकानी, चिंतन मंडलोई, लोकेश भंडारी, अजय मेहता,संजय मालवी, विजय भंडारी, मनीष भंडारी,दीपक झाडमता आदि मौजूद रहे समाजजनों ने दोहराया कि जैन समाज कानून और संवैधानिक मर्यादाओं में विश्वास रखता है, लेकिन तपस्वी संतों की सुरक्षा समाज और शासन का सामूहिक नैतिक दायित्व है।

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