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पेटलावद | हमारे देश के संविधान में भारत के नागरिकों को विभिन्न प्रकार के मौलिक अधिकार दिए गए हैं और इन अधिकारों के तहत मौलिक रूप से कानूनी प्रक्रिया के तहत ही यह भी अधिकार है कि यदि कोई व्यक्ति पीड़ित ,व्यथीत है तो वह अपनी फरियाद एफआईआर के रूप में पुलिस थानों में दर्ज करवा सकता है ।और उसके साथ घटी हुई घटना के लेकर पुलिस पूरी तफ्तीश करने के बाद पूरे मामले को न्यायालय तक ले जाती है इस तरह से एफआईआर लिखाना भी आम आदमी के अधिकारो में आता है ।
एफआईआर के बाद ही जांच के अधिकार....
पुलिस को भी सीआरपीसी के नियमो के तहत एफआईआर दर्ज करने के बाद ही मामलों में जांच करने के अधिकार आता है, अर्थात विवेचना के लिये एफआईआर दर्ज होना किसी भी घटना की जांच की प्राथमिक ओर जरूरी स्टेज है।
हो रहा अधिकारों का हनन....
लेकिन इन दिनों क्षेत्र के पुलिस थाने से ऐसी कई प्रतिक्रिया निकल कर आ रही है जिसमें अपराध घटित होने के घंटों नहीं महीनों के बाद भी फरियादी को रिपोर्ट लीखाने में जी तोड़ मेहनत करनी पड़ रही है ऐसे ही कुछ ज्वलंत मामले मय रेकॉर्ड के इन दिनों हमारे पास में आये है जिनसे ये सिद्ध होता है कि पुलिस केसे कानून के कायदों को ताक पर रखकर क्षेत्र के लोगों के अधिकारों का हनन कर रही हैं।
94 दिन बाद एफआईआर.....
पहला मामला इस प्रकार है कि नगर के न्यायालय परिसर में एक कर्मचारी की दिनांक 29/ 10 /2021 को दो पहिया वाहन चोरी हो गई थी और फरियादी के द्वारा 30/10/2021 को पुलिस को अपने वाहन गुमशुदगी की सूचना दे दी लेकिन पुलिस थाना पेटलावद के द्वारा लगातार फरियादी को एफआईआर लिखने से टालते रहें और जब फरियादी के द्वारा प्रताड़ित होकर वरिष्ठ अधिकारियों तक गुहार लगाई तब जाकर घटना के लगभग 94 दिन बाद वाहन चोरी कि एफआईआर दर्ज की जिसमे भी वाहन की कीमत 10 हजार ही लिखकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली।
40 दिन एफआईआर....
*दूसरा मामले में क्षेत्र की एक सरकारी कर्मचारी की पुत्री पीड़िता ने अपने पति ओर ससुराल वालों के खिलाफ विवाद, पति के दूसरा विवाह करने और दहेज मांगने की पीड़ा को लेकर दिनांक 16/12 /2021 को पुलिस थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई थी पुलिस के द्वारा पूरे मामले में टालमटोल करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों और पेटलावद क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों के दखलंदाजी के बाद लगभग 40 दिन बाद 23/01/2022 को पीड़िता की रिपोर्ट तो दर्ज की लेकिन पूरे मामले में जिन धाराओं में ओर मुख्य लोगो के खिलाफ अपराधिक मुकदमा दर्ज होना था उस मामले को पुलिस फिर भी गोल कर गई।
तीसरा मामला.....
में क्षेत्र के ट्रांसपोर्ट कारोबारी के चार पहिया वाहन की चोरी 08.02.2022 को हुई और इस घटना में चोरी की रिपोर्ट भी पुलिस के द्वारा 06 दिन बाद 14.02 2022 को लिखी गई है। जिसमे भी चोरी गए वाहन की कीमत मात्र 2लाख 50 हजार लिखकर मामले की इतिश्री कर ली।
दबाव बना तो लिखी रिपोर्ट....
उल्लेखनीय है कि इन तीनों ही मामलों में पुलिस के द्वारा फरियादियो को शुरुआती दौर में घटना के घटित होते ही रिपोर्ट दर्ज करना थी लेकिन पुलिस पूरे मामलो को टालती रही ओर फरियादी और उनके परिजनों के द्वारा या तो अपने विभाग के प्रमुख अधिकारियों के माध्यम से हस्तक्षेप करवाया या बड़े लेवल पर जिला एवं इंदौर रेंज के पुलिस अधिकारियों तक मामला पहुंचने के बाद पूरे मामलों में एफ आई आर दर्ज की।
हादसों की कोन लेगा जिम्मेदारी.....
उल्लेखनीय है कि वाहन चोरी के दोनों ही मामले में इस प्रकार की परिस्थितियां निर्मित हुई जिसमें की घटना घटित होने की दिनांक के बाद काफी समय बाद रिपोर्ट लिखी गई ओर इस अवधि में यदि इन वाहनों से चोरी करने वाले अपराधियों के द्वारा यदि कोई बड़ी दुर्घटना या वारदात कर दी जाती या और कोई हादसा हो जाता तो क्या परिस्थिति निर्मित होती ओर इसके लिये कानून किसको जिमेदार ठहराता ?
साक्ष्य हुये प्रभावित तो कोर्ट में कैसे मिलेगा फायदा.....
वही लेट रिपोर्ट लिखने से पुलिस के द्वारा जांच भी लेट की जाएगी और लेट जांच के परिणाम कितने सार्थक होंगे क्योकी शातिर अपराधी तो इस दरम्यान सारे साक्ष्यों को निस्संदेह प्रभावित कर ही चुका होगा ,और पुलिस को पूरे मामले को ट्रेस करने में कितनी सफलता मिलेगी यह तो आने वाला वक्त बताएगा लेकिन इस प्रकार की एफआईरो से पुलिस न्यायालय में कितना लाभ फरियादी को दिला पायेगी?
आंकड़ो की बाजीगरी से अधिकारियों को गुमराह करते.....
इन सभी खामोश सवालों के जवाब अभी कोई भी जिम्मेदार अधिकारी नहीं दे सकता लेकिन इतना तो तय है कि क्षेत्र के थानों मे पीड़ितों को फरियाद लिखाने के लिये बड़ी जद्दोजहद करनी पड़ रही हे, वहीं पूरे मामले की जांच और सेटिंग तथा भाँझगड़ी के माध्यम से मामले को बाहर खुटाने की जुगाड़ वाले जिमेदारो को इस तरह से न सिर्फ मोटी कमाई होती है वही बड़े अधिकारीयो के सामने अपराध के कम आंकड़ो की जादूगरी बताकर गुमराह कर अधिकारीयो की गुड़ लिस्ट में बने रहने के चक्कर मे माननीय अधिकारी क्षेत्र की जनता के साथ खिलवाड़ कर के अपराधियों को पश्रय जरूर दे रहे है ओर आंकड़ों को कम दिखा कर पुलिस के द्वारा चौतरफा रूप से मलाई काटने की कोशिश जरूर की जा रही।
