सज रहा बाबा का दरबार, महाशिवरात्रि को लेकर भक्तों में उत्साह... नगर के मध्य बाबा निलकंठेश्वर व पंपावती तट पर विराजित है भूतेश्वर महादेव .... सम्पूर्ण अंचल की आस्था का है केंद्र....

 




पेटलावद।  महाशिवरात्रि पर्व को लेकर  भक्तों में उत्साह देखा जा रहा है। वही इस पावन पर्व पर बाबा का भव्य दरबार सज रहा है। भगवान शिव की आराधना का पर्व महाशिवरात्रि को लेकर पूरे अंचल में तैयारियां अंतिम चरण में है। भगवान शिव के देश व दुनिया में हजारों मंदिर है लेकिन इनमें से जहां हर मंदिर की अपनी एक विशेष कथा है। देवी अहिल्याबाई की पावन नगरी पेटलावद की धरती उन पुराने जीवंत शहरों में गिनी जाती है, जिसका वर्णन इतिहास में आज भी होता है। पेटलावद के कुछ मंदिर ऐसे है जो उसे दुनिया में अपना एक अलग स्थान बनाते है। ऐसा ही एक पवित्र मंदिर शहर के बीचो-बीच में बाबा निलकंठेश्वर महादेव का मंदिर है। यहां प्रतिदिन भक्तजन बाबा के दर्शन कर धन्य होते है। 

गौरतलब है कि पेटलावद का निलकंठेश्वर महादेव मंदिर होलकर स्टेट के प्राचीन मंदिरो में से एक है। देवी अहिल्याबाई ने सन् 1717 में इस मंदिर की स्थापना की थी। वे यहां प्रवास पर आई थी। इतिहास में उल्लेख है कि देवी अहिल्याबाई ने इस मंदिर की नींव रखी थी। यहां के शिवलिंग की विशेषता है कि वह 7वें डमरू पर विराजित है, ऐसे ही 6 डमरू धरती के नीचे है। पूरे झाबुआ जिले में ऐसा एकमात्र शिवलिंग यही है, जो इतना बड़ा है। इस शिवलिंग को निलकंठेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। उत्तर में बावड़ी और प्राचीन वृक्ष हैं। वहीं दक्षिण में देवी अहिल्याबाई का बगीचा बना हुआ है। सामान्य दिनो में शिवलिंग पर जलाभिषेक होता रहता हैं। यदि मंदिर प्राचीन मंदिर की परंपराओ के अनुसार पुननिर्मित है। 


1 लोटा जल चढ़ाने से पूर्ण होती है मनोकामना


यहां वर्षो से पूजा करते आ रहे बैरागी परिवार के पुजारी मनोहरदास बैरागी बताते है कि उनके परिवार की 5वीं पीढ़ी हो चुकी है। वे बताते है कि जब-जब पेटलावद मे बारिश नही होती थी तो नगरवासी शहर में यात्रा निकालते थे और भगवान निलकंठेश्वर महादेव को जल में डूबो देते थे। उसके बाद बारिश हो जाती थी। यह मंदिर इसलिए भी विशेष आस्था का केंद्र है क्योकि यहां दो पर्व मनाए जाते है। एक शिवरात्रि में शुरू से ही शोभायात्रा निकलती आ रही है, हालांकि पुराने समय में ठेलागाडी पर ढोल के साथ शोभायात्रा निकाली जाती थी और भगवान भोलेनाथ को डोली में लेकर चार भक्त अपने कंधो पर लेकर पूरे नगर में लेकर चलते थे लेकिन अब आधुनिकता के इस दौर में बड़ी-बड़ी बग्ग्यि में शोभायात्रा निकलती है। समय के साथ बदलाव भी काफी हुआ है। यहां श्रावण मास में भी आस्था उमड़ती है।  मंशा महादेव वृत में भी नगर की सबसे अधिक संख्या महिला-पुरूष, युवक-युवतियों  की यहां रहती है। श्रावण माह  में हर सोमवार को भगवान भोलेनाथ का विशेष श्रृंगार होता है और  बाबा के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लग जाती है। साथ ही महाआरती का आयोजन भी किया जाता है।


पंपावती तट पर विराजित हैं बाबा भूतेश्वर महादेव 


इसी के साथ नगर से गुजरने वाली पंपावती तट के किनारे पुरातत्वकालीन बाबा भूतेश्वर महादेव का मंदिर स्थित है। आम दिनों के अलावा खास मौके पर यहां भक्तों का जमावड़ा लगा रहता है। पहले मंदिर तक पहुंचने के लिए व्यवस्थित मार्ग नहीं था किन्तु अब पुलिया बनने से भक्तजन आसानी से बाबा की शरण में जा सकते है। मंदिर समिति शिवरात्रि पर्व पर आयोजन करती है और मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए प्रयासरत है। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने मंदिर जीर्णोद्धार की घोषणा की थी लेकिन घोषणा अभी तक अधूरी है।

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