बरवेट में कलश यात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा का भव्य शुभारंभ हुआ.... साध्वी सुगना बाईसा कर रही है वाचन....





News@ हरिश राठौड़

पेटलावद। ग्राम बरवेट के खेड़ापति हनुमान मंदिर प्रांगण में बुधवार से आध्यात्मिक उत्सव का आगाज हुआ, जहाँ भव्य कलश यात्रा के साथ सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा प्रारंभ हुई। इस धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत श्री कुंज आश्रम उज्जैन की साध्वी श्री सुगना बाईसा के सानिध्य में हुई। प्राचीन शंकर मंदिर स्थित पवित्र जलस्त्रोत से बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालुओं ने मंगल कलश में जल भरा, जिसके बाद गाजे-बाजे के साथ यात्रा कथा स्थल पहुँची।


आयोजन स्थल पर विद्वान पंडितों द्वारा धार्मिक विधि-विधान और मंत्रोच्चरण के साथ आयोजन की शुरुआत हुई, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।


जहां भागवत होती है, वह स्थान तीर्थ के समान

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कथा के प्रथम दिन व्यास पीठ से साध्वी श्री सुगना बाईसा ने श्रीमद् भागवत की महिमा पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने 'भागवत' शब्द की व्याख्या करते हुए बताया कि यह भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और त्याग का अद्भुत संगम है। साध्वी जी ने कहा कि श्रीमद् भागवत केवल एक ग्रंथ मात्र नहीं है, बल्कि साक्षात भगवान श्री कृष्ण का वांग्मय स्वरूप है। इसके श्रवण से मनुष्य के भीतर का अहंकार नष्ट होता है और ईश्वर के प्रति निस्वार्थ प्रेम जागृत होता है। उन्होंने इस कथा को विश्व की समस्त कथाओं में श्रेष्ठ बताते हुए कहा कि जिस स्थान पर भागवत का वाचन होता है, वह स्थान तीर्थ के समान पवित्र हो जाता है।


बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी जनता शामिल हुई

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श्रद्धालुओं को कथा के महत्व से अवगत कराते हुए साध्वी श्री ने प्रेरित किया कि जीवन की व्यस्तताओं के बीच भी इस अमृत पान के लिए समय अवश्य निकालना चाहिए। उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति सात दिनों तक कथा नहीं सुन पाता, तो उसे दो या तीन दिन भी श्रद्धापूर्वक श्रवण करना चाहिए, क्योंकि यह कथा मनुष्य को बुराइयों के मार्ग से हटाकर धर्म के पथ पर अग्रसर करती है और अंततः मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है। प्रसंगवश उन्होंने राजा परीक्षित का उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार शुकदेव जी द्वारा सुनाई गई इस कथा ने राजा परीक्षित के मन से मृत्यु का भय समाप्त कर उन्हें सद्गति प्रदान की थी। कार्यक्रम के अंत में भव्य आरती की गई और निलेश पटेल परिवार द्वारा प्रसादी का वितरण किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी जनता ने शामिल होकर धर्म लाभ लिया।


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