धर्मसभा - पौषध भवन स्थानक में व्याख्यान के दौरान साध्वी निखिलशीलजी ने कहा..... बारह भावनाओं का नित्य चिंतन करना चाहिए.....

 



थांदला से इमरान खान की रिपोर्ट


थांदला आचार्य श्री उमेशमुनिजी के सुशिष्य प्रवर्तक जिनेन्द्रमुनिजी की आज्ञानुवर्ती साध्वी निखिलशीलाजी म सा,दिव्यशीलाजी, प्रियशीलाजी, दिप्तीजी ठाणा - 4 पौषध भवन स्थानक पर चातुर्मास हेतु विराजित है।

धर्मसभा में साध्वी निखिलशीलाजी ने फरमाया की व्यक्ति को बारह भावनाओं का नित्य चिंतन-मनन करना चाहिए।भावना अर्थात जिन- जिन शुभ या अशुभ क्रियाओं से आत्मा तथारूप परिणत होता है उसे भावना कहते है।बारह भावनाएं चरित्र को विशुद्ध करने वाली है।व्यक्ति के जीवन में शुभ-अशुभ भावों का उतार चढ़ाव चलता रहता है।जब उतार आता है तो व्यक्ति को पता चलता है लेकिन जब चढ़ाव आता है तो कभी पता चलता है कभी पता नही भी चलता।भाव कभी स्वतः भी आते है और कभी किसी की प्रेरणा से भी आते है।फिर बाहरी वातावरण से भी कुछ अशुभ भाव आ सकते है।पहली भावना अनित्य भावना का विवेचन कर आपने फरमाया की जो सदा एक सा रहता है,शाश्वत है और जो कभी बदलता नही वो नित्य है और जो परिवर्तित होता रहता है,शाश्वत नही है वह अनित्य है।अनित्य अर्थात जो पुदगल सड़ता है,गलता है,नष्ट होता है।इनके विषय में हमे जाग्रत रहना चाहिए चिंतन करना चाहिए।

साध्वी प्रियशीलाजी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए फरमाया की सामान्य श्रावक बनने का पहला नियम है कि व्यक्ति को मिथ्यात्व का त्याग करना चाहिए।मिथ्यात्व का त्याग नही किया तो वह कितनी भी साधना-आराधना कर ले सभी व्यर्थ है,चाहे व्यक्ति कितना ही कठोर तप भी क्यो न कर ले,चाहे कितना ही स्वाध्याय कर ले सभी शून्य है।इसलिए मिथ्यात्व का त्याग करना चाहिए।मिथ्यात्व का स्वरूप समझना आवश्यक है।मिथ्यात्व क्या है ,सुदेव,सुगुरु और सुधर्म पर श्रद्धा नही करना मिथ्यात्व है।ज्ञानी फरमाते है अज्ञान भी मिथ्यात्व है।हम मन वाले प्राणी है हमे सभी प्रकार के सुसाहित्य,सुधर्म आदि प्राप्त हुए है हम अपनी बुद्धि से सोच समझकर सही गलत का निर्णय कर सकते है फिर भी वीतराग देव की वाणी पर श्रद्धा नही करके इधर उधर भटकते रहते है।वीतराग अर्थात जो राग-द्वेष से रहित हो।भगवान वीतराग है वे सर्वज्ञ है उनके द्वारा कहे गए कथन शंका से रहित होते है इस प्रकार हमे अपनी बुद्धि से सही तत्व का निर्णय करना चाहिए।

संघ सचिव प्रदीप गादिया एवं ललित जैन नवयुवक मंडल अध्यक्ष कपिल पीचा ने बताया वर्षावास प्रारम्भ से ही जप- तप के ठाठ लगाना शुरू हो गए है।साध्वी मंडल के सानिध्य में प्रतिदिन प्रतिक्रमण,प्रार्थना,व्याख्यान,ज्ञान चर्चा,चौवीसी आदि का आयोजन हो रहा है जिसमे संघ का प्रत्येक सदस्य उत्साहपूर्वक भाग ले रहा है।

साथ ही तप की लड़िया भी शुरू हो चुकी है जिसमे मंगलवार को आयंबिल की लड़ी में मनोज सेठिया एवं तेले की लड़ी में महावीर चौरड़िया ने तीन उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किये साथ ही सपना व्होरा ने 6,मुक्ति रुनवाल,खुशबू पावेचा, कमल श्रीमार, गौरव शाहजी ने चार-चार उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किये।वही मंजुला श्रीमार एवं मनीष शाहजी ने तीन-तीन उपवास की तपस्या पूर्ण की ।सुनीता घोड़ावत चोले-चोले की तपस्या कर रही है।वर्द्धमान नीवी आराधिका संगीता पीचा की 40 वी,पुखराज बेन व्होरा की 33वी,स्नेहलता बेन मोदी की 25वी,शकुंतला शाहजी एवं किरण श्रीश्रीमाल के छटी लड़ी गतिमान है।उपवास वर्षीतप आराधकों में भरत भंसाली का 17वा,आशा श्रीमार का 9वा,पिंकी रुनवाल का 2रा एवं रवि लोढा का पहला वर्षीतप गतिमान है।वही एकासन से वर्षीतप कर रहे आराधकों में धर्मलता जैन महिला मंडल की अध्यक्ष शकुंतला कांकरिया,मुकेश चौधरी,पवन नहर,ललित भंसाली एवं नीलेश पावेचा का वर्षीतप गतिमान है। इसके साथ ही सरोज शाहजी,कामिनी पोरवाल एवं प्रिया तलेरा निरंतर एकासन तप की आराधना कर रही है।साध्वी निखिलशीलजी द्वारा जम्बू चारित्र का वांचन भी प्रतिदिन किया जा रहा है।सभा का संचालन कपिल पीचा द्वारा किया गया।




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