पेटलावद से मनोज पुरोहित की रिपोर्ट
पेटलावद | सरकार के द्वारा सरकारी कर्मचारियों की पहचान के लिए हर विभाग को अलग-अलग ड्रेस कोड निश्चित कर रखी है जिस प्रकार से पुलिस विभाग के लिए खाकी वर्दी है डॉक्टरों के लिए सफेद कोट। तो वही आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं सहायिकाओं के लिए भी निश्चित कलर की ड्रेस कोड वाली
साड़ियां तय कर रखी है।
खुद ही ले रहे निर्णय.....
लेकिन ऐसा लगता है कि जिले में जो प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी बैठे या यूं कहें कि सरकार को चलाने वाले लोग हैं अपनी मनमर्जी से अपने कानून लागू करके अपनी मनमर्जी से खुद और निजी ठेकेदारों कपड़ा सप्लायर को लाभ पहुंचाने की योजनाएं बनाइ जा रहे हैं।
घटिया साड़ी खरीद कर वितरण किया....
पेटलावद क्षेत्र में आंगनवाड़ी केंद्रों में सुपरवाइजरो के द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों में कार्यरत कार्यकर्ताओं ओर सहायिकाओं पूर्व निर्धारित साड़ी जिसका की सरकार के द्वारा पूर्व से रंग निर्धारित था उसे बदलते हुए नए रंग में नई साड़ी उपलब्ध कराकर उपलब्ध क आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है जो साड़ी उपलब्ध कराई जा रही है उसका रंग और कपड़े की क्वालिटी बिल्कुल निम्न स्तर की है वहीं प्रत्येक साडी के आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका से ₹600 रुपए वसूल किए जा रहे हैं ।
शाशन डाले थे खाते में 800 रुपये....
जानकारी के अनुसार शासन द्वारा सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ओर सहायिकाओं को नई साड़ी खरीदने के लिए उनके खातों में ₹800 रुपए डाले गए हैं ।और इन ₹800 रुपये से कार्यकर्ता और सहायिका इस बात के लिए स्वतंत्र है कि वे अपने मनपसंद दुकान से साड़ी खरीद सकते हैं लेकिन इस पूरे मामले में परियोजना विभाग के सुपरवाइजर की मिलीभगत से नया खेल उभर कर सामने आया है। जिसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के खाते में डाले गए राशि का उपयोग करने के हिसाब से सभी सुपरवाइजर के द्वारा एक चुनिंदा साड़ी सप्लायर से कमीशन फिक्स करते हुए पूरे क्षेत्र के लिये एक साथ एक ही व्यक्ति से साड़ियां जिनकी कीमत मात्र 100 से 150 रुपये होगी इन साड़ियों को आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को देकर उनसे वापस शासन के द्वारा डाली गई उनके खाते की राशी रुपए 600 से 800 वापस सुपरवाइजर के द्वारा ली जा रही है इस तरह से सुपरवाइजर और साड़ी सप्लायर का खेल खुलकर सामने आ गया हैं।
बदला साड़ी का रंग भी....
इन साड़ियों को सुपरवाइजर को के द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को फोन करके एवं व्हाट्सएप ग्रुप से तथा प्रत्यक्ष रुप से देकर उनसे राशि वसूली की जा रही है एवं जो साड़ी दी जा रही है उसका रंग भी पूर्व निर्धारित साड़ी के रंग से हटकर है एवं साथ ही साड़ी की क्वालिटी भी अत्यंत घटिया किस्म की है सुपरवाइजर के द्वारा सभी कार्यकर्ताओं सहायिकाओं को साड़ी खरीदने के लिए अप्रत्यक्ष रूप से दबाव बनाने की बात भी सामने आ रही है।
बेठक में हुआ था तय....
इस संबंध में जब हमारे द्वारा जानकारी निकाली गई तो यह बात निकलकर आई है कि सुपरवाइजर की एक बैठक हुई थी और सुपरवाइजर के द्वारा ही यह तय किया गया था कि इस रंग की साड़ी एक साथ खरीदनी है। पेटलावद क्षेत्र की सुपरवाइजर प्रियंका डामोर ने बताया कि शासन की ओर से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को साड़ी खरीदने के लिए निर्देशित किया गया था हमारी बैठक में यह सभी सुपरवाइजर ने तय किया था कि एक साथ साड़ियां खरीद कर साडी का वितरण कार्यकर्ताओं ओर सहायिकाओं में वितरित की जाए।
कलेक्टर मिश्रा ने लिया तत्काल निर्णय....
जब यह पूरा मामला जिला स्तर के अधिकारियों तक पहुंचा तो प्रशासनिक , तेज तरार निर्णय और कसावट के लिए अल्प समय में पूरे जिले में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले कलेक्टर सोमेश मिश्रा इस पूरे मामले को लेकर काफी नाराज दिखाई दिए और उनके द्वारा तत्काल इस पूरे मामले की जांच करने के अलावा महिला परियोजना विभाग के जिला अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई करने के लिए भी निर्देशित तत्काल कलेक्टर सोमेश मिश्रा के द्वारा मामले की जांच करने के लिए निर्देशित किया है वही साड़ियों के वितरण की प्रक्रिया को भी रोक लगा दी गयी है।
हुई विभाग की छवि धूमिल जारी किया पत्र....
झाबुआ जिले के जिला कार्यक्रम और परियोजना अधिकारी डॉ अभयसिंह खराड़ी के द्वारा कलेक्टर सोमेश मिश्रा के निर्देश पर तत्काल 28 अगस्त शनिवार को एक पत्र परियोजना अधिकारी पेटलावद को जारी करते हुए पत्र में *इस प्रकार अवेध वसूली से शाशन की छवि धूमिल होने का हवाला देकर तत्काल जाच प्रतिवेदन मांगा है*। वही डॉ खराड़ी के द्वारा इस पूरे मामले में जिला स्तर के किसी अधिकारी का कोई हाथ नहीं होना बताते हुए यह बताया जा रहा है कि यह पूरा निर्णय सुपरवाइजर के द्वारा किया गया है इस पूरे मामले में संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जावेगी।
छुट्टी पर होने का दिया हवाला....
इस पूरे मामले में अवैध रूप से वसूली करने और एक ही साड़ी सप्लायर ठेकेदार से साड़ियों की खरीदी के मामले में पेटलावद की परियोजना अधिकारी इशिता मसानिया के द्वारा चर्चा के दौरान बताया कि साड़ी खरीदने का निर्णय सेक्टर सुपरवाइजरो के द्वारा मेरे अवकाश के दौरान किया था। वरिस्थ अधिकारीयो के निर्देश पर साड़ी वितरण की सप्लाई रोक दी है।
बुलाया जा सकता था टेंडर था टेंडर....
इस पूरे मामले में सुपरवाइजर के द्वारा यह कहा जा रहा है कि शासन के द्वारा कार्यकर्ता और सहायिकाओं के खातों में पैसा डाला गया था अधिकांश कार्यकर्ता और सहायिका ड्रेस नहीं खरीदती है ड्रेस कोड में सरकारी कामकाज किया जाना जरूरी है।यदि यह मान भी लिया जाए कि एक साथ साडी खरीदना अनिवार्य भी था तो इस संबंध में प्रशासन के द्वारा नियमानुसार टेंडर प्रक्रिया आमंत्रित करके भी साड़ियों की खरीदी की जा सकती थी जिससे निष्पक्षता भी रहती लेकिन टेंडर प्रक्रिया को नहीं अपना कर सीधे किसी साड़ी सप्लायर से साड़ी खरीद कर आंगनवाड़ी केंद्रों में वितरण करने से सीधा सीधा कमीशन का खेल स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
साड़ी सप्लायर कोंन है वो भैया....
इस पूरे मामले में साड़ी सप्लाई करने वाले किसी साड़ी सप्लाई ठेकेदार जिसे की *भैया*के नाम से पुकारा जा रहा है की भूमिका संदिग्ध है क्योंकि कहीं ना कहीं इस पूरे मामले में सरकारी कर्मचारियों और साड़ी सप्लाई के बीच कमिश्न का खेल हुआ है अब देखना यह है कि क्या इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच हो पाएगी वही खबर नवीस के द्वारा लगातार इस खबर को मीडिया में आने के बाद प्रशासन हरकत में जरूर आया है।
