पेटलावद से अनिल मुथा/ हरिश राठौड़ की रिपोर्ट
पेटलावद शासन के द्वारा विभागीय कर्मचारियों की पहचान के लिए हर विभाग को अलग- अलग ड्रेस कोड है ,तो वही आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं सहायिकाओं के लिए भी निश्चित कलर की ड्रेस कोड वाली साड़ियां तय कर रखी है।
लेकिन ऐसा लगता है कि जिले में बैठे जो प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी बैठे या यूं कहें कि सता को चलाने वाले लोग हैं अपनी मनमर्जी से अपने कानून लागू करके अपने निहित से खुद और निजी कपड़ा सप्लायर को लाभ पहुंचाने की योजनाएं बनाने में माहिर माने जा रहे हैं।
पेटलावद क्षेत्र में आंगनवाड़ी केंद्रों में कल तहसील मुख्यालय से सुपरवाइजरो के द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों में कार्यरत कार्यकर्ताओं ओर सहायिकाओं पूर्व निर्धारित जिसका की रंग प्रदेश से तय है जो साड़ी जिसका की सरकार के द्वारा पूर्व से रंग निर्धारित था,अब भ्रष्ट जिम्मेदार अधिकारियों ने उसे बदलते हुए नए रंग में नई साड़ी जबरन सप्लाई कर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को खरीदने के लिए मजबूर किया गया है। जो साड़ी उपलब्ध कराई जा रही है उसका रंग और कपड़े की क्वालिटी बिल्कुल निम्न स्तर की है जो बाजार में 100,120 रूपए में आसानी से मिल रही है वहीं प्रत्येक साडी के आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका से ₹600 से 800 रुपए वसूल किए जा रहे हैं ।
असंतोष है
उक्त राशि हड़पने के खेल से सहायिकाओं व कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष है व नाम न छापने की शर्त पर कई सहायिकाओं ने कहा कि हम कलेक्टर साहब को घटिया साड़ियां भेजेंगे हम नहीं पहनेंगी
स्वयं खरिदना थी साड़ियां
और सौप दी जबरन ब्लाक महिला अधिकारी ने इनके खाते में जमा 800 रुपए पर थी इनकी गिद्ध दृष्टि
प्रथम तो इस संबंध में साडी का रंग बदलने के लिए शासन की ओर से कोई नए निर्देश प्राप्त होने की सूचना उपलब्ध नहीं है । जबकि इस संबंध में यदि शासन के द्वारा किसी ड्रेस कोड को निश्चित किया भी जाता है तो सरकारी कर्मचारी को यह स्वतंत्र रहती है कि वह अपने पसंद की दुकान से इसे साड़ी को खरीद सकता है लेकिन एक साथ थोक में साड़ियां बुलवाने के बाद साड़ियों को वितरण करते हुए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं सहायिकाओं से ₹600 /800 रुपये की वसूली की जा रही है
*बेठक में हुआ था तय*
इस संबंध में जब हमारे द्वारा जानकारी निकाली गई तो यह बात निकलकर आई है कि सुपरवाइजर की एक बैठक हुई थी और सुपरवाइजर के द्वारा ही यह तय किया गया था कि इस रंग की साड़ी एक साथ खरीदनी है। पेटलावद क्षेत्र की सुपरवाइजर प्रियंका डामोर ने बताया कि शासन की ओर से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को साड़ी खरीदने के लिए निर्देशित किया गया था हमारी जिला बैठक में यह सभी सुपरवाइजर ने तय किया था कि एक साथ साड़ियां खरीद कर साडी का वितरण कार्यकर्ताओं ओर सहायिकाओं में वितरित की जाए।
*कलेक्टर मिश्रा ने लिया तत्काल निर्णय*
जब यह पूरा मामला जिला स्तर के अधिकारियों को पहुंचा तो तत्काल कलेक्टर सोमेश मिश्रा के द्वारा मामले की जांच करने के लिए निर्देशित किया है वही साड़ियों के वितरण की प्रक्रिया को भी रोक लगा दी गयी है।
|
*जारी किया पत्र*
झाबुआ जिले कीजिला कार्यक्रम और परियोजना अधिकारी डॉ अभयसिंह खराड़ी के द्वारा कलेक्टर सोमेश मिश्रा के निर्देश पर तत्काल 28 अगस्त शनिवार को एक पत्र परियोजना अधिकारी पेटलावद को जारी करते हुए इस प्रकार अवेध वसूली से शासन की छवि धूमिल होने का हवाला देकर तत्काल जाच प्रतिवेदन मांगा है।
इस पूरे मामले में अवैध रूप से वसूली करने और एक ही साड़ी सप्लायर ठेकेदार से साड़ियों की खरीदी के मामले में पेटलावद की परियोजना अधिकारी इशिता मसानिया के द्वारा चर्चा के दौरान बताया कि साड़ी वितरण का काम सुपरवाइजर के हाथ में था मैं अवकाश पर हूं ।
*साड़ी सप्लायर कोंन है वो भैया*
इस पूरे मामले में साड़ी सप्लाई करने वाले किसी साड़ी सप्लाई ठेकेदार जिसे की भैया के नाम से पुकारा जा रहा है की भूमिका संदिग्ध है क्योंकि कहीं ना कहीं इस पूरे मामले में सरकारी कर्मचारियों उस का नाम नहीं बता रहे हैं और साड़ी सप्लाई के बीच कमिशन का भारी खेल हुआ है अब देखना यह है कि क्या इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच हो पाएगी या हर मामले कि तरह यह भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा वही मिडिया के द्वारा लगातार इस खबर को सुरखी में आने के बाद प्रशासन हरकत में जरूर आया है अब देखना यह है कि किन किन कर्मचारियों व सप्लायर पर क्या कार्रवाई होगी

