पशु रिहाई के नाम पर परिषद कर रही वसूली..... इंसानों के बाद पशुओं को भी नही छोड़ा जिमेदारो ने......

 




पेटलावद से अनिल मुथा की रिपोर्ट



पेटलावद।  नगर परिषद की उदासीनता व लापरवाही के चलते नागरिकों की जान शामत में आ गई है, क्योकि नगर में घूमने वाले पशु कभी भी लोगो पर हमला करके घायल कर सकते है। कुछ दिनों पूर्व नगर परिषद ने नाम मात्र की कार्यवाही कर कुछ पशुओं को पकड़ा था किंतु अब पुनः स्थित पहले की तरह बन गयी है। जहां देखो वहां आवारा पशुओं की भरमार है। नगर में आवारा घूमने वाले पशुओं के कारण लोग अपने आपको डरा सा महसूस कर रहे है, क्योंकि इन पशुओं के कारण कई बार नागरिक गम्भीर घायल हो गए थे जिन्हें इलाज के लिए गुजरात के दाहोद तक जाना पड़ा था। नागरिकों द्वारा कई बार मांग की गई कि आवारा पशुओं को पकड़कर गोशाला छोड़ा जाए या फिर पशु मालिको के खिलाफ कार्यवाही कर पशुओं का सम्भालने के लिए निर्देशित करें किन्तु नगर परिषद की उदासीनता के चलते सेंकडो पशु नगर के मुख्य मार्ग पर घूमते रहते है। वाहन चालकों के अलावा राहगीरों को भी इन पशुओं के कारण हमेशा भय बना रहता है।


कई बार हुए हादसे.....

उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी कई बार पशुओं की लड़ाई में नागरिक गम्भीर घायल हो चुके है किंतु नगर परिषद की कानो की जु तक नही रेंगी। पशुओं को पकड़ने वाला पशु वाहन भी नगर परिषद प्रांगण की शोभा बढ़ा रहा है। आज की स्थिति में नगर के हर गली मोहल्लों में आवारा पशुओं की भरमार है, मुख्य मार्ग की स्थिति काफी दयनीय है, यहां बीच सड़क पर ही पशु अपना डेरा जमाकर बैठ जाते है, इसके कारण कई बार यातायात जाम की स्थिति भी निर्मित हो जाती है। वही नागरिकों ने सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज करवाई है। नगर परिषद के द्वारा मात्र खानापूर्ति कर पशु मालिकों से राशि वसूल कर पुनः उन्हें घूमने  के लिए बाजार में छोड़ दिया गया है इस कारण कई बार हादसों का भय भी बना रहता है इस प्रकार आवारा पशुओं से जहां आम जन लगातार घायल हो रहे थे 


पशुओ को पकड़ने की हुई कार्यवाही....


और इस पूरी व्यवस्था को लेकर समाचार पत्रों के द्वारा लगातार कार्रवाई के लिए जब समाचार प्रकाशित किए गए तो एसडीएम  शिशिर गेमावत  के निर्देश पर नगर परिषद के द्वारा आवारा पशुओं को पकड़ कर कांजी हाउस और गौशाला में रखे जाने का निर्णय लिया गया।


पशु मालिको से हो रहीं वसूली.....


 जब इन आवारा पशुओं के साथ कुछ घरेलू पशुओं को भी नगर परिषद के द्वारा पकड़कर गौशाला में शिफ्ट किया गया और जब इन पशुओं के मालिक पशुओं को छुड़ाने के लिए नगर परिषद पहुंचे तो नगर परिषद के द्वारा पशु मालिकों से 500 से लेकर ₹2000 तक की राशि पशु रिहाई  के नाम पर वसूल की जा रही है और पशु मालिकों को 500 से ₹2000 देकर अपने पशुओं को छुड़ाया जा रहा है ।


कोई हिसाब नहीं...

उल्लेखनीय है कि इतनी बड़ी  राशि वसूली या अर्थदण्ड का ना तो कोई प्रावधान है और नहीं नगर परिषद के द्वारा इन पशु मालिकों से जो राशि वसूल की जा रही है उसका कोई लेखा-जोखा भी नगर परिषद के पास में नहीं है इस तरह से नगर के नागरिकों के बाद अब  मुक पशुओं के नाम पर भी नगर परिषद के वर्तमान कर्ताधर्ता अवैध वसूली करने से बाज नहीं आ पा रहे |



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