पेटलावद से हरिश राठौड़ की
पेटलावद में भी गाय गोहरी का पर्व- परंपरानुसार इस वर्ष भी मनाया गया। पंपावती नदी के किनारे गाय गोहरी पर्व देखने के लिए सैकड़ो लोग जुटे। करीब आधा दर्जन श्रद्धालु श्रद्धा और साहस के साथ मठ मंदिर प्रांगण में हाथों में छोटे-छोटे मुर्गी के चूजे लिए खडे थे। गायों को आता देख हाथों से चूजों को उड़ाया और औंधे जमीन पर लेट गए। देखते ही देखते दर्जनों गाय इन पर से गुजर गई। मुख्य रूप से आदिवासी, गुर्जर व सिर्वी समाज के लोगों ने पर्व में सहभागिता की।
समाजजनो का ऐसा मानना है कि मन्नतधारियो के ऊपर से गाय गुजरने पर उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती है और उन्हें सुख-शांति और धन की प्राप्ति होती है। खेर झाबुआ आदिवासी अंचल है यहां कई ऐसी अनोखी और खतरनाक परंपरा है जिसका निर्वहन यहां के लोग आज भी बखूबी पूरा कर रहे है।