जिन पर है नियमो के पालन की जिम्मेदारी रख दिया कायदों को उन्होंने ताक पर.... बिना अनुमतियो के बन रही चोकी ओर रोब दिखाकर ला रहे निर्माण सामग्री के लग रहे जिमेदारो पर आरोप..... सेवा करने वालो की सोसल मीडिया पर पिट रही भद...



समाचार 20 न्यूज

पेटलावद | गत दिनों नगर की समाजसेवी संस्था लायंस क्लब ग्रेटर ,नगर परिषद पेटलावद एवं पुलिस थाना पेटलावद के द्वारा संयुक्त रूप से सामाजिक सहयोग एवं सेवा तथा सुरक्षा की बात करते हुए नगर के श्रद्धांजलि चौक पर पुलिस चौकी निर्माण किए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ करते हुए जोर शोर से भूमि पूजन किया गया था और निर्माण कार्य शुरू करने की बात कही गई थी| अभी निर्माण कार्य अपने प्रारंभिक अवस्था में पहुंचा भी नहीं है कि पुलिस परिषद और लायंस क्लब ग्रेटर के इस प्रोजेक्ट पर आपत्ति और विवाद होना शुरू हो गए हैं और जो परिस्थितियां निर्मित हो रही है उनसे पुलिस चौकी के निर्माण पर अवरुद्ध लगने की प्रबल संभावनाएं बढ़ गई है |


हाइवे पर मुख्य चोराहा....


बामनिया -रायपुरिया स्टेट  हाईवे मुख्य मार्ग ओर बदनावर-थांदला स्टेट हाईवे  क्रमाक 18 का नगर के  श्रद्धांजलि चौक  पर आकर विलय होता है जो कि चौराहे के रूप में परिवर्तित हो जाता है जिसे नगर में श्रद्धांजलि चौक के नाम से पुकारा जाता है 


हटाया था गुमटीधारको को...


और इसी श्रद्धांजलि चौक  के दाएं हाथ की तरफ जहां बरसों पहले कई गुमटी धारियों के द्वारा गुमटी लगाकर व्यापार व्यवसाय किया जाता था । और कुछ समय पूर्व ही    हाईवे के मार्ग चौड़ीकरण के समय स्थानीय नगर परिषद एवं रोड निर्माण विभाग के निर्देश पर तत्समय पदस्थ पुलिस अधिकारीयो द्वारा ही इन गुमटियों  को हाईवे एवं ट्रैफिक के यातायात में बाधित होने की संभावना की बताते हुये गुमटियों  को हटा दिया था और यह जगह रिक्त पड़ी हुई थी। 

अब बना रहे चोकी....

इसी चौराहे के रिक्त पड़ी जगह पर कुछ दिनों पूर्व नगर की समाज सेवी संस्था लायंस क्लब ग्रेटर एवं नगर परिषद पेटलावद तथापुलिस थाना पेटलावद के वर्तमान  स्थानीय स्टाफ और कर्मचारियों के द्वारा संयुक्त रुप से जन सहयोग के माध्यम से इस स्थान पर पुलिस चौकी बनाने की कवायद प्रारंभ की गई थी।


आमजन में चर्चा जोरों पर....


उल्लेखनीय है कि जिस दिन से चौकी का भूमि पूजन हुआ है उसी दिन से उक्त स्थान पर चौकी बनाने की बात को लेकर नगर में दो धड़े बन गए हैं कुछ लोगों का मानना है कि इस स्थान पर चौकी का निर्माण होना चाहिए तो अधिकांश लोगों का यह मानना है कि चोकी यहां नही बननी चाहिय।


 खेर नागरिकों की सोच अपनी जगह है लेकिन सरकारी  भवन को बनाने ने  लिये कुछ नियम कायदों   ओर अनुमतियो की जरूरत पड़ती हैं।


नियमो का पालन किया  या नही....


नियमों के जानने वाले यह भी बताते हैं कि जिस स्थान पर चौकी का निर्माण किया जा रहा है वहां पर घुमावदार मोड़ है और घुमावदार मोड़ पर चौकी बनाने से कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है, वही इस मामले में यह भी बात उठ कर आ रही है कि उक्त शासकीय भवन को बनाने के लिए शासन की ओर से कोई गजट नोटिफिकेशन या विभागीय तौर पर कोई अनुमति ली भी या नहीं वही जिस जमीन पर निर्माण कार्य किया जा रहा है या नही? भूमि राजस्व नजूल या नगर परिषद के आबादी के अंतर्गतकिस मद मै आती है?   इस भूमि के संबंध में संबंधित विभाग से भी अनुमति ली गई है या नहीं ?वही सबसे बड़ी बात की रोड निर्माण विभाग एमपीएसआरडिसी  के नियमों अनुसार भी उक्त स्थान पर निर्माण कार्य के लिए संबंधित विभाग एवं नगरीय  तथा निवेश विभाग से भी अनुमति आदि की प्रक्रिया पूरी की गई है नहीं?

 इन सब बातों को लेकर नगर में भिन्न भिन्न प्रकार की चर्चाएं हो रही है यदि इन सभी विभागों की ओर से एनओसी लेकर निर्माण कार्य किया जा रहा है या नही या  जिमेदार अधिकारी आँख मूंद कर सारा तमाशा देख रहे है यह चर्चा आमजन में जोरो पर है।


ईट भट्टे वालों से निःशुल्क ली ईंटे....

वही पूरे मामले में रविवार को उस समय एक नया मोड़ भी आया है जब सोशल मीडिया पर चौकी निर्माण को लेकर संबंधित पुलिस विभाग के कर्मचारियों पर आरोप लगाए जा रहे हैं जिसमें यह बताया जा रहा है कि पुलिस विभाग के द्वारा पुलिस चौकी निर्माण कार्य को लेकर नगर के छोटे-छोटे गरीब और मजदूर, ईट भट्टे का काम करने वाले कुम्हार  समाज के लोगों से उक्त चौकी के निर्माण के लिए अलग-अलग लोगों से बिना शुल्क अदा  किये है ही पुलिस का रौब दिखाकर ईट ले जाने की बात कही जारही है।


ली 200 से 1000 ईट.....


 दबी जुबान से ही सही से अपना नाम नहीं बताने की शर्त पर कई कुमहार  इट भट्टे का व्यवसाय करने वाले लोगों ने  पुलिस को लगभग 1000 ,ओर  200-200  की संख्या में इट देने की बात कही जा रही है। 


ऐसी सेवा और नियमो के उल्लंघन से क्या जाएगा  जनता के बीच मेसेज.....


पूरे मामले में आमजन और सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के आधार पर यह बात सामने आ रही है कि समाजसेवा का जज्बा दिखाने वाली सामाजिक संस्था और कानून का पाठ पढ़ाने वाला पुलिस तथा नगर परिषद जैसे जिम्मेदार विभाग यदि नियमों को ताक पर रखकर या गरीब लोगों से निशुल्क सामान लेकर इस प्रकार के सरकारी भवन या चौकियों का निर्माण करेंगे तो वहां पर कानून एवं व्यवस्था लागू करके जनता से कानून के पालन की  उमीद कैसे रख सकेंगे? यह चर्चा नगर में जोरों पर है।




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