कड़वी बात और फसल देती है समय आने पर फायदा ही..... देसी इलाज में कारगर करेला, देता है स्वास्थ लाभ और मुनाफा.... लो टनल पद्धति से कर रहे किसान करेले की खेति में नवाचार....

 


पेटलावद से मनोज पुरोहित रिपोर्ट


पेटलावद।देशी भाषा मे कहावत है *कड़वा करेला ओर नीम चढ़ा* इस कहावत के पीछे कड़वाहट की बात छुपी होती है लेकिन ये बात भी सच है कि कड़वी दवाई हों या बात मनुष्य को फायदा ही देती है।


देशी इलाज का चलन.....

हमारे देश मे देशी नुस्ख से इलाज ओर देशी दवाईयों का चलन आदिकाल से है, देसी दवाओं के लिये कई प्रकार की जड़ी बूटियों,उपज का इस्तेमाल किया जाता है, ऐसी ही एक उपज है करेला जिसका  उपयोग करने से कई प्रकार की बीमारी में आराम मिलता है।आजकल करेले की मांग बढ़ने से करेले की खेती किसान अपना रहे है।


नई खेती की ओर अग्रसर......

आधुनिक युग के चलते खेती किसानी में भी परिवर्तन का दौर देखा जा रहा है।झाबुआ जिले मे किसानी कार्य में कर रहे युवा वर्ग नई-नई तकनीकों का उपयोग कर उन्नत खेती कर रहे हैं।

महंगी दवाईयां,फसलो के रोगो से बचाव और समय पर अच्छा भाव लेने हेतु नई तकनीक का प्रयोग कर रहे है।दरअसल हमेशा किसान मौसम की मार, फसलों पर कीट, रोग, मच्छर आदि के प्रकोप से परेशान रहते हैं।मगर अब किसानों को फसलों में रोग लगने की चिंता नहीं सताएगी, क्योंकि अब अपने खेतों को नए तरीके से कीट और रोग से बचा सकते है। पौधों को बीमारियों से बचाने वाली तकनीक,दवाईयो का खर्च भी कम।


लो टनल पद्धति है कारगर......

इस तकनीक को वैज्ञानिक भाषा में लो टनल पद्धति और देशी भाषा में फसल बचाव तकनीक कहा जाता है।इसका प्रयोग कर मौसम की मार, कीट, रोग और वायरस के प्रकोप से बचाती है।किसान कांतिलाल पाटीदार ने बताया कि लगभग डेढ़ माह की करेले की फसल हो चुकी है।मैंने अब तक दवाईयो का छिडकाव नही किया है,यदि ग्राफ कवर नहीं होता तो इसमें लगभग 30,000 की दवाइयों का खर्च करना पड़ता।वही कीट प्रभाव से भी छुटकारा मिलता है।वही एक एकड मे कवर पन्नी लगवाने का खर्च लगभग ₹40000 आता है।किसान कांतिलाल पाटीदार ने पिछले वर्ष क्राफ्ट और विधि से मिर्च उत्पादन किया था। जिसका रिजल्ट बेहतर आने पर इस बार करेले पर विधि का आजमाइश किया।


नही लगती बीमारी....

किसानो का कहना है कि अभी तक इस तकनीक को अपनाने से पौधे में किसी भी तरह की बीमारी नहीं लगी।इतना ही नहीं,पौधों में एक समान बढ़वार हो रही है।विशेष तौर पर सर्दी के मौसम में कोहरे और ठंड से बचाव के लिए यह विधि बहुत सहयोगी है।विपरीत मौसम मे भी क्राफ्ट कवर की पन्नी में पौधा सुरक्षित रहता है।


करनी पड़ती है सुरक्षा....


लगभग दो महीने तक पौधों को कवर से ढंककर रखा जाएगा।जब इसमें फूल आने लगेंगे,तब जाकर कवर को हटाया जाएगा।क्राप कवर विधि से समय से पहले करेले की फसल बाजार में आ जाएगी,जबकि आमतौर पर मई-जून या फरवरी-मार्च में करेले की बुवाई किसान करते हैं।


दो तरफा  फायदा........

लेकिन इस विधि से या फसल कभी भी ली जा सकती है।जिससे समय पर किसान अच्छा भाव लेकर मुनाफा कमा सकते है। इसलिए किसान इस फसल को उगाने में दिलचस्पी ले रहे है साथ ही फसल से मुनाफा ओर  उत्तम स्वास्थ का  दो तरफॉ फायदा मिलता है।


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