ढेरो शिकायत निवारण योजनाएं लागु ,पर जनता की समस्याये जस की तस..... सभी लेवलो ओर समीक्षा बैठकों में निवारण के कागजी घोड़े दौड़ाते जिमेदार.... शिकायत की जांच उसी को जिसकी है शिकायत, (दूध की रखवाली की जिम्मेदारी बिल्ल्ली को)...... निराकरण की जगह शिकायत खत्म कराने के हथकण्डे ओर बनाते दबाव, सारे शिकायत सिस्टम को फेल कर रहे सीएम की योजनाओ पर पलीता.....




 पेटलावद से मनोज पुरोहित की रिपोर्ट


पेटलावद ।प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में समाज के सबसे अंतिम छोर पर रहने वाले गरीब तबके और आमजन की समस्याओं के निराकरण के लिए कई प्रकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ ही साथ इन कल्याणकारी योजनाओं का सही ढंग से लाभ नहीं मिलने और मामलों के निराकरण के लिए कई प्रकार के शिकायत निवारण सिस्टम बना रखे हैं।


सीधे जन संवाद के है निर्देश.....

 सर्वप्रथम तो प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान के द्वारा प्रदेश भर के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों विशेष रुप से जिला स्तर के और अनुभाग  स्तर के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दे रखा है कि कोई भी पीड़ित व्यक्ति जब भी उनसे मिलने के लिए आये तो  अपने सारे कामकाज छोड़कर पीड़ित व्यक्ति की व्यथा कथा सुनने का समय जरूर दें।लेकिन क्षेत्र के हालात  ओर अधिकारीयो के रोबदार व्यवहार से पूरा क्षेत्र वाकिफ है।


शिकायत के लिए कई  योजनाएं  लागू.....


इसके अलावा प्रदेश में अनुभाग से लेकर कलेक्टर स्तर  ओर मुख्यमंत्री तक   कई शिकायत निवारण सिस्टम जैसे जनसुनवाई पोर्टल, मुख्यमंत्री समाधान योजना, मुख्यमंत्री ऑनलाइन शिकायत निवारण सिस्टम , जनदर्शन योजना, प्रत्येक मंगलवार गुरुवार को आयोजित होने वाली जनसुनवाई के अलावा और भी ऐसे कई पोर्टल या योजनाएं तथा सिस्टम बने हुए हैं जिसमें आम आदमी अपनी समस्याओं को लेकर या परेशानियों को लेकर शिकायत दर्ज करवा सकता।

 ईन सब शिकायत  का निराकरण निवारण सिस्टम के द्वरा  मुख्य रूप से अंतिम छोर पर लाकर  राजस्व विभाग या संबंधित विभाग की ओर जांच करने के लिए भेजा जाता है ।


जिसकी शिकायत उसी को जांच.....


इस पूरे मामले में सबसे मजे की बात यह है कि अधिकांश मामलों में जिस विभाग या जिस व्यक्ति की शिकायत होती है उसी विभाग या उसी विभाग के अधिकारियों  को जांच दी जाती है और सम्बन्धीत जांचकर्ताओं  के द्वारा जांच करके शिकायत को रफा-दफा किए जाने का काम अधिकांश स्तर पर सभी विभागों में किया जाता है। इस तरह से दूध की रखवाली का जिम्मा बिल्ली को ही सौंप दिया जाता है तो ऐसी स्थिति में शिकायतों का सही निराकर कैसे हो सकता है यह हर शिकायतकर्ता जानता है


कागजों में करते निराकरण....


यहां तक की शिकायतों को लेकर मात्र लेवल 1 से लेकर लेवल 4 तक के अधिकारियों तक जाते-जाते सिर्फ कागजों पर ही शिकायतों के निराकरण की व्यवस्था बताई जाती है।

 अधिकांश मामलों में या तो शिकायतकर्ता की शिकायत का जवाब एवं प्रतिवेदन वरिष्ठ अधिकारियों तक घुमा फिरा कर बार-बार दोहराते हुए उसी भाषा में देते हुए शिकायतों को पेंडिंग रखा जाता है या नस्तीबद्ध करने का प्रयास किया जाता है।


शिकायतकर्ता पर शिकायत वपास लेने के लिए अपनाते हथकण्डे......


 अधिकांश स्तर पर कई बार जब ज्यादा दबाव बनता है तो संबंधित विभाग को शिकायत करने वाले व्यक्ति को बुलवाकर या तो दबाव में या अनुनय ,मान मनोवल पूर्वक शिकायतों को वापस लेने के लिए दबाव बनाता है या लिखित में आवेदन ले  लिया जाता है अथवा न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन होने का हवाला दे दिया जाता है  अथवा उसी के शिकायत किए जाने वाले मोबाइल नंबर को शिकायतकर्ता से लेकर उस शिकायत को समाप्त किए जाने के लिए दबाव बनाकर मामले का पटाक्षेप किए जाने का प्रयास अधिकारियों के द्वारा किया जाता है


सन्तोषजनक निराकरण नही......


इस तरह से हर शिकायत करने वाले व्यक्ति को यह  अनुभव रहा है कि उसने जब भी किसी विभाग या अधिकारी अथवा काम के लिए कोई शिकायत की है तो उसकी शिकायत पर कोई भी निराकरण किए बगैर मात्र अधिकारियों के द्वारा कागजों पर खानापूर्ति दिखाते हुए शिकायतों का निराकरण कर दिया जाना बताया जाता है ।


करे ईमानदारी से निराकरण तो हो जाएगी समस्याये एक दिन खत्म.....


जितनी एनर्जी और गणित विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के द्वारा शिकायतों के निराकरण को घुमा फिरा कर खत्म करने के लिए लगाए जाते हैं यदि उससे भी कम की एनर्जी यदि संबंधित विभागीय कर्मचारी इमानदारी पूर्वक संबंधित व्यक्ति की व्यथा कथा को सुनते हुए उस शिकायत का निराकरण करने में लगाएं तो हो सकता है कि 1 दिन ऐसा आए कि जब   प्रदेश में किसी भी विभाग या किसी भी व्यक्ति को एक भी शिकायत पेंडिंग ना मिले इस तरह से बार-बार शिकायतकर्ता के द्वारा नीचे से लेकर ऊपर तक शिकायतें की जा रही है और अधिकारी शिकायतों के निराकरण के नाम पर मात्र कागजी घोड़े दौड़ा रहे हैं।


क्षेत्र की कई शिकायतें निराकरण की आस में.....


बात अगर करें पेटलावद क्षेत्र की तो इस क्षेत्र में भी कई लोगों के द्वारा कई विभागों की कई शिकायतें पेटलावद अनुभाग से लेकर मुख्यमंत्री तक विभिन्न स्तरों पर  कर रखी है  लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी इन शिकायती आवेदन पत्रों को या तो संबंधित विभागों को भेज कर इतिश्री कर रहे हैं और मात्र  टी एल की समीक्षा  की बैठकों कार्यवाही का  दिखावा कर रहे हैं। जबकि असल में आज दिनांक तक शिकायतकर्ताओ   कि सही शिकायतों पर भी किसी भी अधिकारी और कर्मचारी के द्वारा कोई सख्त या कड़ा कदम नहीं उठाया गया जिससे यह पूरा सिस्टम एक तरह से फेल होता नजर आ रहा है।

जनता की समस्या जस की तस.....

 लेकिन असल में किसी भी शिकायतकर्ता को आज दिनांक तक उसकी शिकायत का सही निराकरण नहीं मिल पाया है ऐसी स्थिति में प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान के द्वारा चलाए जा रहे सारे शिकायत निवारण सिस्टम एक तरह से मात्र कागजों के खेल पल बनकर रह गए और जनता आज भी उतनी ही परेशान है।


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