जिन शासन गौरव जैनाचार्य पूज्य श्री उमेशमुनिजी की 90वीं जन्म जयंती पर गुणानुवाद सभा का आयोजन.... संयम में शिथिलाचार के घोर विरोधी थे आचार्यवर - साध्वी निखिलशीलाजी.....

 











थांदला से इमरान खान की रिपोर्ट


थांदला। पूज्य श्री धर्मदास सम्प्रदाय के प्रमुख संत जिन शासन गौरव जैनाचार्य पूज्य श्री उमेशमुनिजी "अणु" म.सा. की 90वीं जन्म जयंती थांदला में विराजित महासती पूज्या श्री निखिलशीलाजी म.सा. अदि ठाणा - 4 के पावन सानिध्य में त्याग व तप से पौषध, संवर, सामयिक तथा उपवास, आयम्बिल, एकासन आदि विविध आराधना करके मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित गुरु गुणानुवाद धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए पूज्या महासती श्री निखिलशीलाजी म. सा. ने कहा कि यह पंचम आरा तपती दोपहरी के समान विषमताओं से भरा हुआ है जिसमें गुरुदेव का जन्म शीतल बयार के समान है। उन्होंने गुरुदेव की प्रेरणा को अमृत तुल्य बताते हुए कहा कि जिन्होंने भी गुरुदेव के जीवन से थोड़ी भी प्रेरणा ग्रहण की है उन्होंने अमृत पाकर अमरता कि ओर अपने कदम बढ़ाए है। उन्होने गुरुदेव के जीवन को संयम के प्रति समर्पित जीवन बताते हुए कहा कि उनकी साधना शक्ति वर्धक रही हुई थी, उनके ज्ञान आगम प्रमाण होकर उनमें एक आगम पुरुष की झलक दिखाई देती थी, दादा गुरुदेव व गुरु भ्राता की सेवा उनके विनय गुण को बताती है, उनकी शारीरिक विषमता के बावजूद संयम में सजगता रुग्ण एवं वृद्ध सन्तों को संयम में स्थिर करने के लिए सशक्त उदाहरण है, यही कारण है कि वे संयम साधना में सदा से ही शिथिलाचार के घोर विरोधी रहे है वही उन्होंने अपनी अंतिम आराधना में भी किंचित दोष का सेवन नही होने दिया। वे कछुओं की भांति इन्द्रिय गोपन करने वालें, मितभाषी, अप्रमत्त जीवन के लिए सदा याद किये जाते रहेंगे। उनकी आराधना एक मात्र मोक्ष लक्ष्य के लिए ही होती थी। पूज्या श्री ने अनेक प्रसंगों के माध्यम से उनके विविध गुणों को बताते हुए उनके जीवन से प्रेरणा लेने का उपदेश दिया। इस अवसर पर पूज्या श्री प्रियशीलाजी म.सा. ने कहा कि गुरुदेव ने फाल्गुन विदी अमावस्या की काली रात में जन्म लेकर पूरे जगत को ज्ञान के प्रकाश से आलोकित किया है। गुरुदेव संयम के सजग प्रहरी बनकर निर्दोष चर्या से अपने आत्म लक्ष्य की और अग्रसर होते हुए स्व-पर कल्याणकारी बने। इस अवसर पर पूज्या श्री दीप्ति श्रीजी म.सा. ने पुष्प में गुलाब, नदियों में गंगा, पर्वतों में सुमेरु पर्वत आदि उपमाओं से गुरुदेव की तुलना करते हुए उन्हें नर में श्रेष्ठ बताया। उन्होने वो उमेश गुरु हमारें स्तवन के माध्यम से गुरु की महिमा गाई। इस अवसर पर अणु आराधना मण्डल व श्रीमती ममता तलेरा ने स्तवन के माध्यम से गुरु के गुणगान किये वही श्रीसंघ कि ओर से वरिष्ठ स्वाध्यायी भरत भंसाली ने गुरु के उपकारों को याद किया। इस अवसर पर संघ की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी देते हुए श्रीसंघ अध्यक्ष जितेंद्र घोड़ावत, प्रवक्ता पवन नाहर व ललित जैन नवयुवक मंडल अध्यक्ष रवि लोढ़ा ने बताया कि जन्म भूमि थांदला में गुरुदेव के उपकारों को याद करते हुए सकल श्रीसंघ में बड़ी संख्या में उपवास,  एकासन तथा  आयम्बिल व निवि आदि विभिन्न तप हुए। इस दौरान अनेक श्रावक श्राविकाओं ने तीन तीन सामयिक की। गुणानुवाद सभा की प्रभावना के लाभार्थी प्रकाशचंद्रजी घोड़ावत परिवार, चंद्रकांत छाजेड़ परिवार एवं सुशीला बहन चौरड़िया (जावरा)  रहे। इस दौरान नवकार महामंत्र जाप का आयोजन किया गया जिसकी प्रभावना सुरेशचंद्रजी चौधरी परिवार द्वारा प्रदान की गई। समस्त एकासन आदि तपस्वियों के तप अनुमोदना का लाभ मुलचंदजी लुणावत परिवार ने लिया। वही रात्रि संवर पौषध की प्रभावना मनीष कुमार अमृतलाल चौपड़ा परिवार द्वारा वितरित की गई। गुणानुवाद सभा का संचालन संघ के सचिव प्रदीप गादिया ने किया।

भोपाल की मुमुक्षु कु. प्रभुति ओसतवाल का हुआ बहुमान....

  धर्म धरा थांदला में गुरु गुणानुवाद सभा में श्रीमती नीता चंद्रकांत छाजेड़ की भतीजी मुमुक्षु कु. प्रभुति केतन ओस्तवाल (19 वर्ष) भोपाल का स्वागत बहुमान श्रीसंघ एवं छाजेड़ परिवार द्वारा किया गया। इस अवसर पर मुमुक्षु बहन ने अपनी ओजस्वी वाणी से वर्तमान में भौतिक सुख सुविधाओं को तीर्थंकर भगवान से प्रीति के समक्ष नश्वर बताते हुए शरीर के पीछे समय बिताने को वेस्ट बताया और प्रभु जैसा बनने की इच्छा ने संयम मार्ग प्रशस्त होने की बात कही। उनकी दीक्षा आगामी 17 अप्रैल को  सुखसगरजी सम्प्रदाय के प्रभावी संत आचार्य मणिप्रभसागरजी महाराज एवं दीक्षा प्रदाता पियुषसागरजी महाराज के पावन सानिध्य में जिन शिशु प्रज्ञाजी म.सा. के सानिध्य में होगी।


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.