पेटलावद से मनोज पुरोहित /हरिश राठौड़ की रिपोर्ट
पेटलावद.| जल ही जीवन है, जल है तो कल है , जल बचाओ जीवन बचाओ...जैसे नारों को आमतौर पर सरकारी विभागों के द्वारा दीवारों पर स्लोगन के रूप में लिखा जाता है और इन बड़े-बड़े नारों के आधार पर बड़े बड़े लोग, नेता और अधिकारि आम आदमी और जनता को जल बचाने की नसीहते देते देखे जाते है। लेकीन असल जीवन मे इन नारो का पालन करने और करवाने के लिये जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी खुद सरेआम इन स्लोगन की धज्जियां उड़ाते दिखाई देते है ।
पानी के अपव्यय ओर किल्लत का मुह चिढाती साश्वत तस्वीरे....
आज हम आपके सामने पेटलावद नगर के अंतर्गत ऐसी तस्वीरें पेश कर रहे हैं जहां एक तरफ आम जनता पानी पानी के लिए मोहताज है और पानी की एक-एक घड़े के लिए उन्हें 5 से ₹6 तक की कीमत अदा करने को मजबूर होना पड़ रहा है वही जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारियों के घरों और कार्यालयों के पीछे पानी 1 घंटे तक बहता हुआ कीचड़ का रूप ले रहा है इस तस्वीर से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि पेटलावद में जिम्मेदार अधिकारी किस प्रकार से कार्य कर रहे हैं।
15 दिन से बंद पड़ी मोटरे सुख रही टँकीया.....
वार्ड क्रमांक 13 राजापुरा कि यहां नगर परिषद के द्वारा वार्ड वासियों की पेयजल व्यवस्था हेतु जहां एक दिन छोड़के जल सप्लाई करके पानी की आपूर्ति की जाती है लेकिन जो पानी सप्लाई कीया जाता है वह पानी पीने योग्य नहीं रहता है। ऐसी स्थिति में नगर परिषद की ओर से पेटलावद के हुसैनी चौक, राजापुरा ओर राम मोहल्ला पानी की टंकी बनाई गई है और इन टंकीयो को भरने के लिए नगर परिषद के द्वारा होल की से मशीन मोटर आदि की व्यवस्था कर रखी है लेकिन पिछले 15 दिनों से ये मोटरे खराब हो चुकी है जिससे टंकियों में पानी खत्म हो चुका है ओर वार्डवासियों को पीने के पानी के लिये दिक्कक्तो का सामना करना पड़ रहा हैऔर सूखी पड़ी हुई है कि पेयजल सप्लाई के लिए लगाई गई थी 20 दिन से खराब है और नगर परिषद के द्वारा किए गए हैं अब तक नहीं किया गया है का पालन धरती पर ना के बराबर किया जाता है इस समय तापमान 43 डिग्री से ऊपर जा रहा है जहां लोगों को घरों से तेज धूप के कारण निकलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिमेदार नगर परिषद को कई बार वार्डवासीयो में मोटर सुधार कर टँकी में पेयजल सुचारू करने के लिये कहा लेकिन पानी के नाम पर पैसा बनाने की जुगत बिठा रही नप इस ओर कोई ध्यान देने को तेयार नही, ओर वार्डवासियों को पानी की किल्लत झेलने को मजबूर होना पड़ रहा है।
नई बस्ती में एक टँकी तक नही बना पाए, लोग पानी खरीदकर पीने को मजबूर.....
वही दूसरी तस्वीर नगर के वार्ड नं 08 की नवीन मलिन बस्ती से है ये बस्ती लगभग 12 वर्षो से बसी है ओर इसमे लगभग 200 परिवार निवास करते है लेकिन इस बस्ती में कोई सुविधा पानी को लेकर नही है और आज तक परिषद इस बस्ती में एक पानी की टँकी तक नही बना पाई है जिससे लोगो को लगभग 3 किलोमीटर दूर तक साइकिल या मोटरसाइकिल से पीने का पानी लेने के लिये आना पड़ता है। या निजी टेंकरो से पीने का पानी पैसे देकर भरवाना पड़ता है टेंकरो से 5 से 7 रुपये में 1 केन या 30 से 35 रुपये 01 ड्रम के देकर पीने के पानी की व्यवस्था करने को मजबूर होना पड़ता है। हालाकि इस वार्ड में आरओ की पाइप से ट्रायल बेस पर पानी सप्लाई जरूर हो रहा है लेकिन यह पानी पीने योग्य नही है ।ऐसी स्थिति में वार्डवासियों को पेयजल के लिए जद्दोजहद करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
तहसील कार्यालय में बह रहा प्रतिदिन हजारों गेलन पानी सड़को पर....
जहां इंन दो तस्वीरों में नगर के आम जनता को पैसे देकर पानी खरीदना पड़ रहा है और पानी की पानी की किल्लत से जूझना पड़ रहा है ।वहीं तीसरी तस्वीर जिसमें पेटलावद की पॉश कॉलोनी या यूं कहे कि अधिकारी कर्मचारी जिस कॉलोनी में निवास करते हैं अर्थात पेटलावद की वार्ड क्रमांक 5 के अंतर्गत आने वाली ब्लॉक कॉलोनी जिसमें तहसील कार्यालय और अन्य विभागों के कार्यालय हैं ।वही तहसील कार्यालय जहां पर की प्रतिदिन ग्रामीण क्षेत्रों से सैकड़ों लोग अपने-अपने सरकारी कामकाज के लिए आते हैं
तहसील कार्यालय में आने जाने वाले लोगों के लिए पेयजल की व्यवस्था करने हेतु तहसील कार्यालय के ऊपर टंकी बनाकर पेयजल सप्लाई के रूप में प्याऊ बनाया गया है लेकिन पिछले लगभग 1 माह से इस पानी की टंकी में पेयजल का सप्लाई जो कि नगर परिषद की पाइप लाइन से किया जाता है प्रतिदिन इस टंकी में पेयजल सप्लाई करते समय टंकी भर जाने ओर कर्मचारियों तथा तहसीलदार की अनदेखी के चलते लगभग एक से डेढ़ घंटे तक प्रतिदिन पानी की टंकी से हजारों गैलन पानी रोड पर बहता रहता है और यह पानी कीचड़ के रूप में सीधे तहसीलदार आवास की ओर जा रहा है ।
300 रुपये का वाल लगाने को तैयार नही माँन्ननिय.....
जहां एक एक बूंद पानी बचाने के लिए सरकार, सामाजिक संघटन और अधिकारी कर्मचारी बड़े-बड़े नारे लगाते हैं वही तहसील कार्यालय में पानी का इतना बड़ा अपव्यय हो रहा है जिसके प्रति जिम्मेदार उदासीन दिखाई दे रहे हैं। सूत्रों की माने तो इस पानी के अपव्यय को रोकने के लिये सप्लाय के पाइपलाइन में वाल लगाने की आवश्यकता है जो कि बाजार से बमुश्किल 100 से 300 रुपये में लग सकता है लेकिन माननीय इतनी भी जहमत नही उठा पा रहे ओर पानी बचाने के लिये गरीब जनता को नसीहत देने में जरूर आगे रहेंगे।
खैर जो भी हो लेकिन पानी एवं पेयजल की आपूर्ति के लिए जहां नगर की आम जनता परेशान हो रही है वही अधिकारी और कर्मचारी की उदासीनता के चलते हजारों गैलन पानी सड़कों पर बह रहा है।
मीटिंग में ही रहते साहब.....
वही इस समस्या को लेकर नप का पक्ष जानने के लिये फोन करने सीएमओ अशोक चौहान ने फोन पर कहा कि में मीटिंग में हु। अब साहब 10 वर्किंग घण्टो में मीटिंग में ही रहते है फिर भी नगर की जनता के लिये कोई निर्णय इन मीटिंगों में क्यो नही लेते ये समझ से परे है।


