अप्रमाणिक सोयाबीन बीज भी अब खपाए जाएंगे.... विभागीय साठगांठ से फिर ठगा जाएगा किसान....

 



झाबुआ से अनिल मुथा की रिपोर्ट

झाबुआखरीद की बुवाई की तैयारी में लगे किसान के सामने अच्छी गुणवत्ता का बीज प्राप्त करने की समस्या मुंह बाए खड़ी है दूसरी तरफ बीज माफिया किसानों को घटिया बीज बेचकर अपनी जेबे भरने की फिराक में है और इस अवसर को हाथों हाथ लेकर बड़े कमाई करने की फिराक में है कपास के अलावा सोयाबीन में भी इस तरह तथा प्रमाणित बीज बाजार में भारी मात्रा में पानी का गोरख धंधा चल पड़ा है जिम्मेदार अधिकारी इस और जानबूझकर आंखें बंद किए बैठे हैं जिस तरह के रिश्ते बीज माफियाओं तथा अधिकारियों के बीच में है उससे यह आशंका बलवती हो रही है कि दोनों के बीच तगड़ी समझ पनप गई है की कैसे किसान को बेवकूफ बनाकर प्रमाणित बीज किसानों को पकड़ा दिए जाएं।

स्टाक ,परमिशन मे कागजों व गोडाउन मे रखें माल मे  होता हैं धरातल पर जमीन आसमान का फर्क, बाजारों ,मंडियों से खरीदे माल के बीजों के रूप मे सप्लाई मे होती हैं करोड़ों की कमाई ,शासन को लगाया जाता हैं करोड़ों रुपये टेक्स का चुना

अगर शासन वास्तविक रूप से ईमानदारी से किसानों का भला चाहतीं है तो उच्च स्तरीय जांच कमेटी स्थनीय विभागों को दुर रखकर गोडाउनो  की जांच कि जाए तो वहां रेकॉर्ड के अनुसार  सर्टिफाइड,सोयाबीन बीज नही पाया जाएगा ऐसे मे जांच दल को परमिशन देने वाले अधिकारियों व कम्पनी पर एफआईआर दर्ज करवाई जाना चाहिए

विभाग को तैयार प्रमाणिक बीज के गोडाउन मे  तय लिमिट कि परमिशन एवं सेम्पलिंग के बाद सीलबंद करना होते हैं परन्तु इन कम्पनियों की साठगांठ इतनी तगड़ी होती है की परमिशन व स्टाक एंव बीक्री के बीच हजारों टन का खेल तगड़ी साठगांठ से तत्काल बाजारों से खरीदे सोयाबीन को पेकिंग थैलियों मे होता हैं ।

किसान आकर्षक पैकिंग देखकर  ही जाल में फंस जाते हैं....

सोयाबीन बीज कम्पनियां के  वास्तव में सोयाबीन के ऐसे बीच जो प्रमाणित कृत होकर उत्तमता के सभी मापदंडों पर खरे उतरते हो ऐसे बीज तैयार करने में बड़ी मेहनत लगती है तथा खर्च भी अधिक आता है इस सारी झंझट से बचने के लिए बीज माफिया मंडी से सीधे सोयाबीन खरीद कर अपने ब्रांड के नाम से उसे बाजार में जारी कर देते हैं वास्तव में जो मानकीकृत सोयाबीन का बीज होता है कायदे से उसे लक्ष्य के अनुसार अगस्त सितंबर माह में ही तैयार होकर दस्तावेजों के साथ गोडाउन में भर दिया जाना चाहिए लेकिन बीज माफिया ऐसा नहीं करते हैं वह लक्ष्य के अनुसार बीज के दस्तावेज बोगस फाइलों में तैयार कर लेते हैं और संशोधित बीच या आधार बीज प्लॉट भी तैयार नहीं करते हुए खुले बाजार से अप्रैल-मई माह में खरीद कर उन्हें थैलों में पैक करते हैं इस तरह अच्छे बीज के नाम पर किसानों के साथ खुल्लम खुल्ला धोखा किया जाता है दुर्भाग्य है कि इस पूरे गोरखधंधे को जिम्मेदार अधिकारी पूरी निर्णयताकी मुद्राओं के साथ देखते रहते हैं और चुप रहने की एवज में बीज माफियाओं से मोटी रकम वसूलते हैं दूसरी तरफ किसान आकर्षक पैकिंग को देखकर इस जाल में फंस जाते हैं तथा अपनी जेब कटवा बैठकर नतीजा यह होता है कि जब फसल आती है तब उन्हें आशा अनुरूप उत्पादन नहीं मिलता कई बार अंकुर नहीं होता तो कई बार पौधों में फलिया ही नहीं लगती इस तरह हजारों हेक्टर में नकली सोयाबीन फर्जी दस्तावेजों के साथ खफा दिए जाते हैं प्रशासन यदि इस मामले में उच्च स्तरीय जांच करें तो भ्रष्टाचार के बड़े रैकेट से पर्दा उठ सकता है।

शासन की और से किसानों की मांग और सप्लाई मे बडा अंतर उचित मूल्य व प्रमाणिक बीजो की पुर्ती न हो पाना भी संदेहास्पद जो नाम मात्र की उपलब्धता शासकीय बीजों करता

खरीफ की प्रमुख फसल सोयाबीन के प्रमाणित बीज के लिए इस मर्तबा किसानों को अभी से परेशानी का सामना करना पड रहा है। क्योंकि गत वर्ष बारिश अधिक होने के कारण अधिकांश किसानों के पास सोयाबीन बीज बोने लायक नहीं बचा है। जिले कपास के बाद में सबसे  ज्यादा सोयाबीन बोई जाती है और यही करीब  हजारो क्विंटल बीज की आवश्यकता लगती है। जबकि विभाग पूरे जिले के लिए नाममात्र का प्रमाणित बीज की उपलब्धता करवाता रहा है जो उंट के मुंह में जीरे के समान है। इधर बीज उत्पादक संस्था मप्र बीज एवं फर्म विकास निगम भी पिछले दो वर्षो से बीज उत्पादन पर ध्यान नहीं दे रही है। इससे भी किसान प्रमाणित बीज मिलने से वंचित हो रहे है।


*इनका कहना*

 मंडी से लेकर कोई भी व्यापारी बीज के रूप मै नही बेच सकता हैं, उसको बीज नहीं आदान कहते हैं , जो तेल के काम आता है बीजों के लिए बाकायदा प्रमाणीकरण पंजीयन होना चाहिए  बकायदा प्रमाणीकरण परेमिशन मिलती है उसे टेग इशु  होता है किसानों को प्रमाणिक बीज ही बेचना चाहिए फिर भी अगर ऐसा परमिशन के नाम व्यापारी कर रहे है तो धारा 3/7तहत जिला कृषि उपसंचालक को कार्रवाई करने का अधिकार है किसानों के साथ धोखाधड़ी बर्दाश्त नही की जाएंगी 

श्री आलोक मीना 

संम्भागीय कृषि अधिकारी इंदौर


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