झाबुआ से राज मेड़ा की रिपोर्ट
पेटलावद ।सोमवार से शक्ति की उपासना का पर्व नवरात्रि का शुभारंभ हुआ है। और आदिशक्ति माता को दुष्टों ओर दानवों का संहार करने ओर अपने भक्तो की रक्षा के आशीर्वाद के लिये नवरात्रि में पूजा जाता है ।
संजय रावत के हटाने की खबर से सनसनी....
नवरात्रि के प्रथम दिन अलसुबह एक खबर निकलकर आई जो दिनभर पुलिस महकमों में ओर सोसल मीडिया व आमजन के बीच चर्चा का विषय बनी ख़बर थी झाबुआ कोतवाली के टीआई संजय रावत को तत्काल प्रभाव से हटाकर लाईन अटैच किया गया जिसका कारण गत हफ्ते पॉलिटेक्निक कालेज में हुए विवाद बताया जा रहा है। संजय रावत के अटेचमेंट ओर कार्यवाही को लेकर कई लोग विभिन्न तरीके के कयास लगा रहे है और गोदी व चाटुकार मीडिया ने उनके बचाव में पोस्ट भी करना शुरू कर दिया । रावत के अटेचमेंट के वास्तविक कारण तो अभी सामने नही आये है लेकिन जो लोग इस टीआई कि कार्यशैली को जानते है वे शिवराज सिंह के इस कार्यवाही को बिल्कुल सही मानते है । और कई लोग तो इनके अटेचमेंट को कमतर आंकते हुये इन पर बड़ी ओर सख्त कार्यवाही की भी मांग कर रहे है।
एसपी पर हुयी थी कार्यवाही...
ये निर्विवाद है कि पॉलिटेक्निक कालेज के छात्रों के साथ पूर्व एसपी अरविंद तिवारी ने जो व्यवहार किया और ऑडियो रिलीज होने के बाद सीएम ने तत्काल एसपी तिवारी पर जो कार्यवाही की वह काबिले तारीफ है।
सीएम ने की पूरी इंक्वायरी.....
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस कार्यवाही के बाद ही सीएम को उनके नेताओं और ईमानदार अफसरों ने सच से अवगत कराया है क्योकि पोलिटेक्निक मामले में ये भी खबर है कि छात्रों ने पहले घटना ओर विवाद के लिए कोतवाली पर ही सम्पर्क किया था और वहां से सन्तुष्ट नही होने के बाद ही छात्रों ने एसपी तिवारी से सम्पर्क करने की बाते सामने आ रही है।
कोतवाली पर ही मामले को क्यो नही सम्भाला ?....
यदि कोतवाली लेवल पर ही छात्रों की सुनवाई हो जाती तो शायद छात्रों को एसपी को फोन नही लगाना पड़ता । लेकिन कोतवाली पर सुनवाई नहीं होने से ही मजबूरन छात्रों को आला अधिकारियों को फोन लगाना पड़ा।
थाना स्तर की लापरवाही....
शहर का हर नागरिक जनता है कि हर मुसीबत में पड़ा आदमी पहले थाने पर ही सम्पर्क करता है और जब थाने से उसे सहयोग नही मिलता तो मजबूरन बड़े अधिकारियों तक मामला जाता है। इस पूरे मामले में एसपी पर कार्यवाही कि नोबत लाने के लिये थाना स्तर पर सिस्टम के फेलियर को होना मानते हुये ही थाने के लिये जिम्मेदार थाना प्रभारी रावत पर जो कार्यवाही हुई वह लेट जरूर है लेकिन है बिल्कुल सही।
मासूमो को कानून की आड़ में प्रताड़ित करता है रावत.पुराना रिकार्ड देख लो....
इसके अलावा लगभग 04 माह से कोतवाली पर पदस्थ साहब के कारनामे भी आला अधिकारियों और सीएम तक पहुच चुके है जिस तरीके से पेटलावद में अपनी वर्दी की आड़ में मासूमो, बेबस, गरीबो ओर महिलाओं को प्रताडित किया और दबंग, माफियाओं, चोरों को सरंक्षण देकर कानून की आड़ ओर पद का दुरुपयोग किया था उसी तर्ज पर संजय रावत ने झाबुआ शहर वासियों को भी परेशान करना शुरू कर दिया था।
ये शिकायते भी पहुँच चुकी है सीएम तक...
व्यापारियों से अदबाजी ,रिपोर्ट लिखाने के लिये पेसो की मांग, झूठे केस बनाकर पीड़ितों को परेशान ,शराब और ड्रग्स के रैकेट चलाने वालों से अवैध वसुली, सटोरियो से कमीशन ओर हफ्ता , वाहन चोर गिरोह से पैसा लेकर चोरी की रिपार्ट से बाहर करना, महिलाओ सम्बंधी अपराध में तत्काल कार्यवाही नही करते हुए दबाव बनाने और भाझगड़ी के लिये मजबूर करते हुए केस को बाहर बाहर निपटाने ओर बडी रकम एठने के कई आरोपो से घिरे संजय रॉवत की पूरी असलियत आमजन ओर नेताओं ने सीएम तक पहुचा दी थी ।और इसी के चलते ये कार्यवाही होना तय माना जा रहा था। इसलिये टीआई पर हुई कार्यवाही पर संजय रावत जो इमोशनल टच देकर खुद को पाक साफ बताने की कोशिश कर रहा है वह सिर्फ दिखावा है ।
गुप्ता बचाते थे रावत को....
रावत के सिर पर तत्कालीन एसपी आशीष गुप्ता का वरद हस्त था क्योंकि संजय की काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा गुप्ता जी तक भी जाता था और एसपी गुप्ता जिले की जनता की आवाज को बड़े अधिकारियों तक पहुँचने नही देता था ।
सीएम की कार्यवाही की जनता में हो रही तारीफ....
लेकिन एक्शन मोड़ में धांसू पारी खेल रहे सीएम शिवराज सिंह चौहान तक अब जिले के सभी अधिकारियों की असलियत पहुच रही है ओर इसी के चलते संजय रावत पर सीएम के निर्देश पर हुई कार्यवाही को आमजन में काफी सराहा जा रहा है।

