पेटलावद। प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान सितम्बर माह में नप चुनावो के दौरान झाबुआ जिले में आये और उनके सामने जब जिले में हो रहे अवेध गतिविधियों और प्रशासनिक अधिकारीयो की कमजोरी सहित माफियाओ को सरंक्षण ओर सहयोग देने की शिकायते पहुची तो सीएम ने ततकाल एक्शन लेते हुए एसपी ओर कलेक्टर को बदल दिया उसके बाद तो जिले ओर पेटलावद अनुभाग के अधिकारियों को बदलने ओर बड़ी प्रशाशनिक सर्जरी कर दी गई जिसका मूल उद्देश्य शुशाशन की व्यवस्था, कसावट ,जनकल्याण की योजनाओं का क्रियान्वयन ओर गरीब जनता के हितों को सरंक्षित करना था ।
अधीनस्थ अमला करता गुमराह....
लेकिन ऐसा लग रहा है कि सीएम की सर्जरी के बाद आये अधिकारि कर्मचारी जिले की अव्यवस्था पर लगाने का कोई विजन लेकर नही चल रहे ओर वरिष्ठ अधिकारीयो को अधीनस्थ ओर फील्ड में काम कर रहे कर्मचारि गुमराह कर रहे है।
कलेक्टर के सामने पहला बड़ा मामला आया था सामने....
यदि ऐसा नही होता तो कलेक्टर श्रीमती रजनिसिह के पदभार ग्रहण करने के बाद लगभग 12 दिन पूर्व जिले की सबसे बड़ी तहसील पेटलावद में सामने आया राशन घोटाले से जुड़े लोगों को इतनी जल्दी क्लीनचिट नही मिलती।
सरकारी राशन बेचते पकड़ाए थे रंगे हाथ....
जी हां हम बात कर रहे है क्षेत्र के ग्राम करडावद में 02 अक्टूम्बर कि यात्री में गरीबो को वितरण करने के लिये सोसायटी के माध्यम से वितरण होने वाली 158 चावल की बोरियों को निजी व्यक्ति के घर बेचने के मामला को मीडिया ने रंगे हाथों पकड़वाकर बड़ा खुलासा किया था।
की थी एफ आई आर ,ओर सोसायटी सील...
इस मामले में जिला कलेक्टर रजनिसिह के निर्देश ओर तत्कालीन एसडीएम पेटलावद के आदेश पर तहसीलदार जगदीश वर्मा और फूड ऑफिसर धर्मेंद्रसिह ने मौके पर पहुचकर पंचनामा बनाया ओर पुलिस थाना पेटलावद में एफ आई आर दर्ज करवाई ओर आसपास की सोसायटी को सील किया था।
क्लीनचिट की तैयारी....
इस पूरे मामले उस समय नया मोड़ आया है जब पुलिस थाने में दर्ज केस में आरोपियों को प्रथम तो केस की कमजोरी के चलते आरोपी की जमानतें आसानी से होगयी ततपश्चात फूड ऑफिसर के जो जांच रिपोर्ट बनाई गई उसमें इस घोटाले के लिये किसी की भी जिमेदारी तय नही हो रही जिसके चलते इस पूरे मामले के मुख्य सूत्रधार ओर कर्ताधर्ता उसमें साफ बच रहे है। क्योंकि रिपोर्ट के अनुसार आसपास की सोसायटी में जाने वाले ओर आनेवाले चावल की कटट्टियो का पूरा रिकार्ड होना बताता गया है इस रिपोर्ट को इस प्रकार से तैयार किया गया है कि पूरा मामला रफा दफा हो जाएगा।
क्यो नही किया दल गठित?...
पूरे मामले में जांच करने वाले जिम्मेदार अधिकारी की भूमिका संदिग्ध दिखाई दे रही है । मामले के सम्बंध में जानकारों का मानना है कि पूरे मामले की जांच के लिये ईमानदार और पारखी, अनुभवी अधिकारीयो का दल गठित किया जाना चाहिये । इस पूरे मामले में गड़बड़ की आशंका इसलिये भी है कि फूड ऑफिसर धर्मेन्द्रसिह का स्थानांतरण भी हो चुका है लेकिन उन्हें रिलीव नही करते हुए मामले को कागजो पर सेट किया गया है।
कलेक्टर एसडीएम से आस....
अब यदि जिमेदार कर्मचारी गरीब लोगों के हिस्से के अनाज और राशन को बेचने ओर घोटाला करने वालो को राशनमाफिया के साथ मिलकर बचाने का प्रयास करेंगे तो जिले में न तो माफियाओं पर अंकुश लगेगा , न सुसाशन स्थापित होंगा ओर नही सीएम की जिले में की गई प्रशाशनिक सर्जरी का कोई महत्त्व निकलेगा । अब देखना यह है कि पूरे मामले में नवागत एसडीएम अनिल कुमार राठोर ओर जिला कलेक्टर रजनिसिह कोई एक्शन लेते है या फूड ऑफिसर की बनाई रिपोर्ट से सन्तुष्ट होकर मामले को खत्म कर देते है।
