पेटलावद से हरिश राठौड़ की रिपोर्ट
जामली।माही परियोजना के अंतर्गत बने माही बांध पर डुब प्रभावित किसान पिछले चार दिन से धरना देकर बैठे है।मांग है जमीन के उचित मुआवजा,पुर्नवास अनुदान,फलदार पेडो का मुआवजा और मकानो की उचित व्यवस्था मिले।इस हेतु प्रशासन की अधिकारी भी किसानो से चर्चा के लिए धरनास्थल पहुंचे।इधर माही नहर से पानी ना छोडने पर किसान अडे है,दुसरी और नहर से सिंचाई करने वाले किसान रबी फसलो हेतु नहर की और देख रहे है।जानकारी के मुताबिक 12 गांवो के किसान धरना प्रदर्शन कर रहे है।वही सैकडो हैक्टेयर भुमि किसानो की डुब मे चली गई है।वही उचित दर पर मुआवजा ना मिलने और धार झाबुआ मे मिले मुआवजे की विसंगति को लेकर भी किसान नाराजगी जता रहे है।
आक्रोशित किसान बोले....जल सत्याग्रह करेंगे
धरना प्रदर्शन मे बैठे किसान ऊंकार गामड,केशुराम सीनम ने बताया कि हम 10 वर्षों से मुआवजे की मांग कर रहे हैं।पिछले वर्ष भी हमने धरना प्रदर्शन किया था।अधिकारीयो द्वारा दो माह मे निराकरण का आश्वासन मिला था।लेकिन एक वर्ष मे हमारी कोई सुनवाई नही हुई।ऐसे मे जब तक हमारी न्याय नही होगा हम नहर का पानी नही बहने देंगे।समिती ने निर्णय लिया है कि हम अब जल सत्याग्रह का रास्ता अपनाएंगे।हमारी जमीने डुबी हम भी पानी मे बैठ जाएंगे।डुब प्रभावित के बच्चो का भविष्य अधर मे लटका है। किसान केशुराम का कहना है 12 गांवो के कई परिवारो के बच्चे 18 वर्ष की आयु पुर्ण कर चुके है,अब वे केवल मजदुरी के भरोसे है।
माही बांध की नींव मे बसा करता था ग्राम वडलीपाडा।
माही परियोजना के विशाल डैम की नींव मे बसा था वडलीपाडा।विस्थापन के समय 25 परिवार यहां रहते थे।गांव के बुजुर्ग कहते है जहां डेम की नींव है,वही हमारे मकान हुआ करते थे,तब हमे आधी रात को घर से निकाला था।इस दौरान मकानो का मुल्यांकन नही किया।मशीनो से मकान गिरा दिए।इस दौरान परिवहन के नाम पर पांच हजार रुपये की राशि दी।उस वक्त सिर्फ 16 किसान परिवारो को गिनती मे लिया गया।आज की स्थिती अन्यत्र बसे उक्त गांव मे उन्ही 25 परिवारो के पचास परिवार निवासरत है।
माही डूब प्रभावित ग्राम वडलीपाडा के किसानों ने अपनी पीड़ा सुनाते हुए बताया कि आज भी कच्चे मकानों में और मजदूरी कर दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर रहे है। एक खास बात जो किसानों ने बताई कि जहां माही डेम की मुख्य पाल बनी है वहां पर कभी वडलीपाडा गांव हुआ करता था।वडलीपाड़ा के 90 वर्षीय बुजुर्ग मानसिंह बा ने बताया कि उस समय आधी रात को विस्थापन का किराया भाड़ा देकर हमें घर से निकाला था।आज वह पूरा गांव और उसके लोग इधर उधर हो गए,इसके साथ ही वे कहीं सुविधाओं से भी वंचित है।विस्थापन के बाद आज भी कच्चे मकानो मे बिना कागजो की भुमि पर निवास कर रहे है।वडलीपाडा के बुजुर्ग उकार गामड ने बताया कि हमे केवल विस्थापन का भाडा देकर हटा दिया।आज सरकारी भुमियो मे इधर उधर कुटिया बनाकर रहने को वे लोग मजबुर है।सवजी मैडा ने बताया कि हमे कहा था मकान के बदले मकान देंगे।विस्थापन निती के अनुरुप भी विस्थापित लोगो को भुखंड दिया जाना था।हमारे वहां स्थित पेडो का भी कोई पैसा नही मिला।
डुब प्रभावितो से चर्चा चल रही है......
मौके पर अधिकारी को भेजा था,हमारी डुब प्रभावित किसानो से चर्चा चल रही है।किसानो को समस्या को देखकर निदान करने का प्रयास है।रबी फसलो के लिए भी पानी देंगे।
अनिल राठौर,अनुविभागीय अधिकारी,पेटलावद।

