साधु वेश अवसर हो जाता है महावीर बनने का। संंत विश्व रत्न सागर जी।


 


 News@   हरिश राठौड़

पेटलावद।जीवन में अशांति का कारण आसक्ति है ।आप लोग कई बार ऐसी आसक्ति कर लेते हैं जिसका आपसे कोई संबंध ही नहीं होता है। जिस व्यक्ति के जीवन से आसक्ति निकल जाती है उसके स्थान पर वितरागता आ जाती है। उसे संसार असार लगने लगता है मन बैरागी हो जाता है। सफेद वस्त्र थारण करना एक ट्रायल है ।जो सफल हो जाता है उस साधु का वेश अवसर हो जाता है महावीर बनने का। साधु यानी परिपूर्णता नहीं अपितू पूर्णता की ओर बढ़ने की क्रिया है।हमारा सम्मान वेश की वजह से है यह वेश नहीं तो हम कुछ नहीं है।वेश धारण करने के बाद अगर हम साधु में अहंकार आ जाए तो वह धारण करना व्यर्थ है ।आसक्ति से ही दुनिया के 90% लोग या तो दुखी हैं या अशांत है ।उक्त बात  मालवा के प्रसिद्ध संत विश्व रत्न सागर जी ने समग्र जैन समाज की महती उपस्थिति में पेटलावद स्थानक भवन में कहे।आपने आगे कहा धर्म हमें समझा रहा है लोभ मुरछा है ।जो अशांति वह पश्चाताप ही देगा।हम संयमी में अगर लोभ है आसक्ति है तो  तो हमारा संयम द्रव्य संयम की श्रेणी का होगा भाव संयम नहीं होगा।आपने सत्य घटना पर आधारित मर्मस्पर्शी कहानी भी सुनाई।

 युवा संत कीर्ति रत्न सागर जी ने कहा सम्यक दर्शन से जैनतत्व की शुरुआत होती है। जिसके पास सही समझ व श्रद्धा होती है वह सच्चा कल्याण मित्र है। चेक कितने का भी भर लो पर जब तक साइन नहीं है वह कागज है।वैसे ही अगर हम में सम्यक दृष्टि नहीं है तो हम सच्चे जैन नहीं है ।

आज 29 जनवरी 2024 को एक शाम नाकोड़ा भैरव के नाम का आयोजन खुशबू गार्डन पर रखा गया है। जिसे भारत के पांच प्रसिद्धभजन गायक भाग लेंगे। दिन में आदि व्याधि हरण नाकोड़ा भैरव का यज्ञ का आयोजन भी किया जा रहा है। 28 जनवरी को आदेश्वर दादा का अभिषेक विधि विधान से आचार्य श्री ने संपन्न करवाया जिसमें कई भक्तों ने लाभ लिया।रात्रि के व्याख्यान तेरापंथ सभा भवन पर हुए।


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.