पेटलावद श्रीसंघ ने दी साध्वी सुशीला कुंवर जी को भावभीनी श्रद्धांजलि, वर्षीतप का किया आह्वान....

 




News@ हरिश राठौड़

पेटलावद ।  चतुर्मासिक पाक्षिक पर्व के अवसर पर श्री संघ द्वारा सामूहिक सामायिक की आराधना का आयोजन किया गया, जिसमें 50 श्रावक- श्राविकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस धार्मिक आयोजन के दौरान नवकार मंत्र का सामूहिक जाप और अणु चालीसा का पाठ भी किया गया।

 कार्यक्रम में राजेंद्र कटकानी ने मोक्ष पुरुषार्थ के 16 बोलों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यदि जीव शुद्ध मन से शील धर्म का पालन करे, तो वह शीघ्र ही मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है। वहीं स्वाध्याय सोहनलाल चाणोदीया ने पोषध व्रत के महत्व को समझाया और उपस्थित समाजजनों से चतुर्मासिक पर्व पर अधिक से अधिक तप-आराधना करने का विनम्र आग्रह किया।


श्रद्धा सुमन अर्पित किए

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इसी दौरान वर्धमान आयंबिल तप की आराधिका और 'सुशील समाधान थोक संग्रह' श्रृंखला की रचनाकार वरिष्ठ साध्वी श्री सुशीला कुंवर जी के देवलोक गमन पर गहरा शोक व्यक्त किया गया। श्री संघ ने उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए उनके सम्मान में दो लोगस्स का ध्यान किया। धर्मसभा में तपस्या के प्रति भी भारी उत्साह देखा गया, जहाँ एक बेला, 20 से अधिक उपवास और 10 एकासन जैसे कठिन तप के प्रत्याख्यान लिए गए। साथ ही आगामी 6 मार्च को महीदपुर में प्रवर्तक श्री जिनेंद्र मुनि जी की निश्राय में आयोजित होली चातुर्मास कार्यक्रम में दर्शनार्थ जाने का सामूहिक निर्णय भी लिया गया।


1008 वर्षीतप का लक्ष्य निर्धारित किया....

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श्री संघ के अध्यक्ष अशोक मेहता, उपाध्यक्ष कांतिलाल झाड़मता, सचिव पारसमल सोलंकी और कोषाध्यक्ष संजय भंडारी ने समाज को जानकारी दी कि आगामी 11 मार्च से वर्षीतप का शुभारंभ होने जा रहा है। उन्होंने सभी से उपवास, आयंबिल, निवीं और एकासन जैसे तप के माध्यम से वर्षीतप की शुरुआत करने का अनुरोध किया है। गौरतलब है कि 8 वर्षीय अणु शताब्दी वर्ष के अंतर्गत धर्मदास गण परिषद ने वर्ष 2026-27 को 'वर्षीतप आराधना' के रूप में मनाने का आह्वान किया है, जिसके तहत पूरे गण में 1008 वर्षीतप का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।


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