News@इमरान खान
थांदला नगर में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, भाईचारे और शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। दस दिनों तक चली मोहब्बत की छबीलों के बाद ताजियों को नम आंखों से विदाई दी गई। प्रशासन की कड़ी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था के बीच नगर के 15 ताजिए अखाड़ों के साथ मुख्य मार्गों से होते हुए पद्मावती नदी तट तक पहुंचे।
दोपहर करीब 2 बजे से जामा मस्जिद, गांधी चौक, बोहरा मोहल्ला, गवली मोहल्ला, आजाद चौक, पिपली चौराहा, भोई मोहल्ला, अंबे मां चौराहा सहित विभिन्न क्षेत्रों से ताजियों का जुलूस निकला। मातमी धुनों और "या हुसैन" की सदाओं के बीच हजारों अकीदतमंद जुलूस में शामिल हुए।
पद्मावती नदी तट पर अदा हुई रस्म
ताजिए पद्मावती नदी किनारे पहुंचे, जहां सलाम पढ़ने के बाद इस्लामिक परंपरा के अनुसार ताजियों पर पवित्र जल का छिड़काव किया गया। इसके बाद सभी ताजियों को पुनः सम्मानपूर्वक इमामबाड़ों में स्थापित कर दिया गया। पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही और कहीं कोई अव्यवस्था नहीं हुई।
हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल
भोई मोहल्ले में जुलूस के दौरान गंगा-जमुनी तहजीब का सुंदर दृश्य देखने को मिला। ताजियों के स्वागत में हिंदू समाज के लोगों ने सड़क पर लेटकर अपनी मन्नतें पूरी कीं। इस अवसर ने एक बार फिर साबित किया कि थांदला में मोहर्रम केवल मातम का पर्व नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का प्रतीक भी है।
प्रशासन रहा पूरी तरह अलर्ट
पूरे आयोजन के दौरान एसडीओपी, तहसीलदार, थाना प्रभारी अशोक कनेश, राजस्व विभाग का पटवारी अमला, पुलिस बल और बिजली विभाग की टीम लगातार मुस्तैद रही। बिजली विभाग ने विशेष सतर्कता बरती ताकि जुलूस के दौरान बिजली लाइनों से किसी प्रकार की दुर्घटना न हो।
बैंड की देशभक्ति और इंसानियत का संदेश
भारत बैंड के संचालक शेरू भाई ने बताया कि वे पिछले दो वर्षों से थांदला में मोहर्रम पर बैंड बजा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल मातम करना नहीं, बल्कि इमाम हुसैन के सत्य, न्याय और इंसानियत के संदेश को हर घर तक पहुंचाना है।
जब बैंड गांधी चौक पहुंचा तो "सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा" की धुन बजाकर देशभक्ति का संदेश दिया गया। साथ ही इमाम हुसैन की शान में कलाम भी पेश किए गए, जिन्हें लोगों ने श्रद्धा और सम्मान के साथ सुना।
छबीलों का भी हुआ आयोजन
नगर के कई प्रमुख चौराहों पर श्रद्धालुओं के लिए छबील (शरबत व पेयजल) की व्यवस्था की गई, जहां सभी धर्मों के लोगों ने सेवा भाव से भाग लेकर आपसी सौहार्द का परिचय दिया।



