News@ हरीश राठौड़
पेटलावद नगर में शुक्रवार को मुहर्रम का पर्व पूरी श्रद्धा, सांप्रदायिक सौहार्द के वातावरण में संपन्न हुआ। प्रशासन की मुस्तैदी और दोनों समुदायों के आपसी सहयोग के चलते यह आयोजन पूरी गरिमा के साथ पूर्ण हुआ। दोपहर 2 बजे से नगर के विभिन्न अखाड़ों से 12 ताजियों का विशाल जुलूस पारंपरिक मार्ग से निकाला गया। 'या हुसैन' और 'लब्बैक या हुसैन' की गूंजती सदाओं के बीच हजारों अकीदतमंदों का कारवां शहर के मुख्य मार्गों से होकर कर्बला मैदान तक पहुंचा। इस दौरान मातमी धुनों पर सीनाजनी करते युवाओं का जज्बा देखते ही बन रहा था।
कर्बला मैदान पहुंचकर इस्लामिक परंपराओं के अनुसार हर ताजिये के सामने सलाम व फातिहा पढ़ी गई। इसके बाद ताजियों पर गुलाब जल और पवित्र जल का छिड़काव कर रस्मों को अदा किया गया। देर शाम सभी ताजियों को पूरे सम्मान के साथ वापस लाकर इमामबाड़ों में स्थापित कर दिया गया। इस दौरान मानवीय संवेदनाओं की अनूठी मिसाल भी देखने को मिली, जहाँ तपती दोपहरी में जुलूस में शामिल रोजेदारों और बुजुर्गों के लिए स्थानीय लोगों ने अपने हाथों से शरबत पिलाकर उनकी सेवा की। सुरक्षा और व्यवस्था के मद्देनजर विद्युत विभाग ने जुलूस मार्ग के सभी झूलते तारों को पहले ही दुरुस्त कर दिया था, वहीं नगर परिषद द्वारा जगह-जगह पानी के टैंकर व अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई थीं।



