News@हरिश राठौड़
पेटलावद ।देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले झाबुआ जिले के तारखेड़ी गांव के वीर सपूत त्रिपुरा राइफल्समेन भगवानलाल मिंडकिया के शहीद दिवस पर ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने उन्हें नम आंखों से श्रद्धांजलि दी। गुरुवार का दिन जिले के लिए बेहद खास और भावुक कर देने वाला रहा। एक ओर जहां देश महान स्वतंत्रता सेनानी अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की जयंती मना रहा था, वहीं दूसरी ओर झाबुआ का एक और लाल देश की रक्षा करते हुए इतिहास के पन्नों में अमर हो गया था।
*23 वर्ष की अल्पायु में दिया सर्वोच्च बलिदान*
शहीद भगवानलाल मिंडकिया का जन्म 19 मई 1981 को झाबुआ जिले के आदिवासी अंचल के तारखेड़ी गांव में हुआ था। बचपन से ही देश सेवा का सपना संजोए भगवानलाल ने 12 जून 2001 को त्रिपुरा स्टेट राइफल की सातवीं बटालियन में राइफलमैन (सीमा रक्षक) के रूप में कार्यभार संभाला। 23 जुलाई 2004 की रात को जब वे सीमा पर मुस्तैदी से गश्त लगा रहे थे, तभी अचानक आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। भगवानलाल ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए दुश्मनों की गोलियों का मुंहतोड़ जवाब दिया। इसी मुठभेड़ के दौरान एक गोली उनकी आंख के पास लगी और मात्र 23 वर्ष की अल्पायु में वे मां भारती की गोद में सदा के लिए सो गए।
*ग्रामीणों को गर्व, पर जनप्रतिनिधियों की बेरुखी से नाराजगी*
शहीद दिवस के अवसर पर वीर सपूत को नमन करने के लिए उनके परिवारजन, ग्रामवासी और सामाजिक संगठन के लोग शहीद स्मारक पर पहुंचे। हालांकि, इस खास मौके पर प्रशासन और मौजूदा सरकार के किसी भी बड़े जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक अधिकारी के न पहुंचने पर ग्रामीणों ने गहरी नाराजगी व्यक्त की।
श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ता चरणसिंह लववंशी ने कहा, "फौजी हमारे देश की आन, बान और शान हैं। आज अगर हम अपने घरों में सुरक्षित हैं, तो केवल इन जवानों की बदौलत हैं। हमें मरते दम तक इनका सम्मान करना चाहिए। आदिवासी अंचल के इस वीर जवान की देशभक्ति पर हमारे पूरे ग्रामीण समाज को गर्व है। सरकार और प्रशासन को भी ऐसे शहीदों के सम्मान में आगे आना चाहिए


