News@ हरिश राठौड़
बोलासा-तारखेड़ी। क्षेत्र के वार्ड क्रमांक मंदिर फलिया स्थित आंगनबाड़ी केंद्र का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। इसके बावजूद मासूम बच्चों की पढ़ाई उसी भवन में कराई जा रही है। कई वर्ष पुराने इस भवन में अध्ययनरत नौनिहालों तथा दो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने गहरी चिंता व्यक्त की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते भवन का पुनर्निर्माण नहीं कराया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। सार्वजनिक सामुदायिक भवन के समीप स्थित इस आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण वर्ष 1998 में हुआ था। वर्तमान में भवन की दीवारों में दरारें आ चुकी हैं और छत पूरी तरह जर्जर हो गई है। छत पर घास और मिट्टी जम चुकी है, जिससे भवन की स्थिति और अधिक खतरनाक हो गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि भवन निर्माण के बाद से अब तक इसकी मरम्मत तो दूर, पुताई तक नहीं कराई गई। इतना ही नहीं, केंद्र में शुद्ध पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है, जिससे बच्चों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग से मांग की है कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस जर्जर भवन को तत्काल अनुपयोगी घोषित किया जाए तथा नए भवन का शीघ्र निर्माण कराया जाए।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
बाल विकास परियोजना अधिकारी ने बताया कि आंगनबाड़ी भवन की जर्जर स्थिति की जानकारी विभाग को है। नए भवन के निर्माण के लिए आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि बच्चों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
सरपंच गुड्डी बाई ने कहा कि भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। इसे डिस्मेंटल करने के लिए प्रस्ताव बनाकर भेज दिया गया है। स्वीकृति मिलते ही नए भवन का निर्माण कराया जाएगा।
सामाजिक कार्यकर्ता चरणसिंह लववंशी ने कहा कि जर्जर भवन में नौनिहालों का जीवन खतरे में है। यदि संबंधित विभाग ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से भवन की खराब स्थिति के बावजूद संबंधित विभाग लापरवाही बरत रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसी दिन यह जर्जर भवन भरभराकर गिर गया और कोई बड़ा हादसा हो गया, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?


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