पेटलावद से अनिल मुथा की रिपोर्ट
पेटलावद। ऐसा लगता है कि सरकार के द्वारा बनाए गए नियम कायदे मात्र गरीब और आमजन के लिए प्रभावी तौर पर लागू होते हैं लेकिन जब मामला किसी रसूखदार व्यक्तियों का हो तो वहां पर पूरा तंत्र और प्रशासन उस रसूखदार व्यक्ति के किए गए काले कारनामों को ढकने और उसे बच निकलने के लिए रास्ते खुद बनाने को तैयार हो जाता है।
वरिष्ठ को संतुष्ट करने के लिए दिखावे की कार्रवाई....
आम जनता के हीतो और क्षेत्र की समस्याओं को मीडिया के द्वारा उठाया जाता है मीडिया के द्वारा समस्याओं को उठाने पर क्षेत्र के अधिकांश अधिकारी और कर्मचारी पहले तो खबर उठाने वाले मीडिया कर्मियों से अपने नाराजगी व्यक्त करते हैं और उन्हें ऐसा लगता है कि मीडिया कर्मियों के द्वारा जो समस्याएं उठाई जा रही है उसमें उनका कोई निजी हित हो ।( लेकिन ऐसा नहीं है)
और साथ ही अधिकारियों के द्वारा परिस्थितियां निर्मित करते हैं जिससे वरिष्ठ अधिकारियों को लगे कि मामले में उन्होंने निष्पक्षता पूर्ण कार्रवाई कर दी हो और कागजों पर ऐसा प्रकरण बनाया जाता है जिससे कि यह लगे कि सामने वाले पर कार्रवाई हो गई है और प्रकरण में कागजों पर जो दिखाया जाता है उसके अंतर्गत पूर्ण तरीके से जिम्मेदार आदमी को बचा लिया जाता है ।
यह है मामला....
ऐसा ही एक मामला फिर से पेटलावद क्षेत्र में देखने को मिला है हमारे द्वारा कुछ दिनों पूर्व पेटलावद के करडावद नेशनल हाईवे पर स्थित एक पेट्रोल पंप के पास में सरकारी जमीन पर किए जा रहे अतिक्रमण को लेकर समाचार प्रकाशित किया था। उसी के पश्चात कुछ समय बाद इसी पेट्रोल पंप पर लगे हुए नीम के छायादार पेड़ को इस रसूखदार व्यक्ति के द्वारा काट कर खत्म कर दिया गया था। इस समाचार को प्रकाशित करने के बाद में एवं कलेक्टर सोमेश मिश्रा के हस्तक्षेप के बाद स्थानीय प्रशासन जहां मजबूरन कार्रवाई करने के नाम पर पंचनामा बनाने के लिए मौके पर पहुंचा और तहसीलदार जितेन अलावा के द्वारा पंचनामा बनाकर एसडीएम को सुपुर्द किया गयाथा ।इस पूरे मामले में एक नया मोडआया है जिसमें अनुभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के द्वारा इस निंदनीय कार्य को करने वाले कमलेश बम को सूचना पत्र जारी किया गया वह भी अवकाश के दिन अर्थात 20 अगस्त मोहर्म के दिन सरकारी छुट्टी थी सरकारी छुट्टी के दिन आनावेदक को बुला कर जवाब तलब किया गया। (खैर प्रशासन का काम है उसको जब समय मिले तब वह कार्रवाई कर सकता है ) उसके लिए वह स्वतंत्र है।
लेकिन जब इस संबंध जिम्मेदार क्या कार्रवाई की जा रही है इसके संबंध में जानना चाहा तो जिम्मेदार अधिकारियों के द्वारा नियमानुसार आवेदक पर जुर्माना और और कार्रवाई करने की मांग बात कही जा रही।
पहुंचना चाहिए आमजन तक मैसेज....
हमारे द्वारा इस कृत्य के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को जुर्माना लगाकर सरकार का खजाना भरने की कोई मंशा नहीं है मंशा तो यह है कि न्याय ऐसा होना चाहिए जिससे कि इस प्रकार के कोई भी आमजन फिर से इसे इस प्रकार की घटना को दोहरा ना सके अन्यथा पेड़ काटकर जुर्माना भरने की क्षमता तो एक गरीब आदमी भी रखता है ,और जनता के बीच इस प्रकार का मैसेज जाना चाहिए आमजन दूसरी बार ऐसा काम ना कर सके।
जुर्माने की तैयारी....
अधिकारियों का मानना है कि ऐसे मामलों में नियम अनुसार जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है लेकिन जब मामला एक पढ़े लिखे रसूखदार और पहुंच वाले व्यक्ति का हो और जिसने इस प्रकार का कृत्य जानबूझकर किया हो ऐसे लोगों पर प्रशासन को ऐसी कार्रवाई करना चाहिए जिसका मैसेज दूर-दूर तक जाए और एक गरीब आदमी या कम पढ़ा लिखा व्यक्ति भी इस प्रकार के हरियाली को नुकसान पहुंचाने का काम ना करे।
लगाएं १०० पौधे .....
इस संबंध में पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि जुर्माना लगाने से सिर्फ समस्या का हल नहीं होगा यदि कोई व्यक्ति एक पेड़ काटता है तो उसकी जिम्मेदारी है और प्रशासन उसके खिलाफ इस प्रकार की कार्रवाई करें कि एक पेड़ काटने की सजा १०० हरे पौधे लगाकर हरियाली की भरपाई की जावे ताकि इस प्रकार के आदेशों से आमजन तक भी सार्थक मैसेज पहुंच सके। इस संबंध में ग्रीन ट्रिब्यूनल और सर्वोच्च न्यायालय के कई आदेश और पर्यावरण प्रेमी संस्थाओं के चलाए जा रहे आंदोलन भी ऐसे मामलों में इसी प्रकार की सजा देने की ओर इशारा करते हैं।

