पेटलावद से अनिल मुथा की रिपोर्ट
जिले में चर्चित साडी घोटाले में महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने लगते हैं हाथ खड़े कर दिए हैं ।अधिकारियों ने कलेक्टर के पत्र के जवाब में कहा है कि निचे स्तर के कर्मचारियों ने इस मामले में उन्हें अंधेरे में रखा उल्लेखनीय है, कि बिते दिनों मिडिया में प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद जिला कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इस साड़ी ख़रीदीं मामले में हुई ठगी कि जांच करने तथा इसके कारणों का पता लगाने और सम्बंधितो पर कार्रवाई करने का आदेश दिया था।
इस क्रम में जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी ने परियोजना अधिकारी पेटलावद से इस बाबत स्पस्टिकरण मांगा तो पेटलावद कि परियोजना अधिकारी इसिता मसानीया ने जिला परियोजना अधिकारी को पत्र लिखकर बताया कि सेक्टर सुपर वाइजरो ने उक्त साड़ियां ख़रीदीं करने का निर्णय लिया खरीदी आदेश उस समय जारी कर दिया जब वह अर्जित अवकाश पर थी जिला एवं खंड स्तरिय परियोजना अधिकारी द्वारा दिया गया स्पस्टिकरण से यह पता चलता है, कि इस घोटाले की भनक उन्हें नहीं थी लेकिन इससे सवाल यह उठता है कि विभाग में इतनी अंधेरगर्दी मची है कि सेक्टर सुपर वाइजरो स्तर के कर्मचारी अपने अधिकारियों की आंखों में धुल झोंक कर इतनी बड़ी डील कर जनता का धन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दें यह बात किसी के गले आसानी से नहीं उतर रही है।
मात्र 120 रुपए कीमत कि साड़ी 400रू में खरीदी गई यानि 280 रुपए का घोटाला एक साड़ी में किया गया विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अभी तो यह बताने के लिए भी तैयार नहीं है ,कि कुल कितनी साड़ियां खरिदी गई और कीस से खरिदी गई स्पष्ट है कि मामले में बड़ी लेनदेन कि आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है
इतना बड़ा घोटाला केवल सेक्टर सुपर वाइजर या आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका मिलकर नहीं कर सकते इसमें बड़े अधिकारियों कि भूमिका कि उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए विभाग के अंदरूनी सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार इस मे राजनेताओं कि सांठगांठ भी है।
उल्लेखनीय है घटिया स्कूल ड्रेस जैसे बड़े बड़े घोटालो कि तरह हाल ही में झाबुआ जिले में कोरोना काल में बंद हाई स्कूलों कि विज्ञान लेबो के लिए उपकरण एवं रसायन सामग्री खरीदी में शाला प्रबंधन को अंधेरे में रख कर किये गया लाखों रूपए के घोटाले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है, इससे आम जनता में रोष है

एक बात और आपको बता दू। एक साड़ी के 300-300 रुपए कार्यकर्ता और सहयिका से अलग से लिए जा रहे हे।
ReplyDelete400 का बिल ओर 300 अलग से लिए जा रहे हे। इसकी भी जांच करे। कुछ कार्यकर्ता और सहायिका के बयान ले।