भीलवाड़ा से लौटकर मनोज पुरोहित/हरिश राठौड़ की विशेष रिपोर्ट
पेटलावद| सदभावना,नैतिकता व नशामुक्ति का संदेश देने वाले जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ११ वें अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमणजी का चातुर्मास राजस्थान के भीलवाड़ा शहर के चातुर्मासिक स्थल तेरापंथ नगर आदित्य विहार में चल रहा है।
क्षेत्र में हुआ था मंगल प्रवेश...
उल्लेखनीय है कि गुरुवर पिछले जून माह में धार जिले से प्रवास करते हुये झकनावदा, तारखेड़ी, बनी, रायपुरिया होकर पेटलावद पधारे थे और 03 दिन तक क्षेत्र की जनता ने गुरुदर्शन ओर गुरुदेव के आशीर्वाद प्राप्त किया था, तत्पश्चात बामनिया, करवड़ होकर रतलाम होते हुए भीलावाडा पधारे थे, और गुरुदेव के क्षेत्र प्रवेश के समय ही कई गुरुभक्त मय परिवार के साथ सेवा में थे, जो भीलवाडा तक विहार यात्रा में साथ गए थे। और अभी भी प्रतिदिन पेटलावद क्षेत्र से कई परिवार प्रतिदिन भीलवाडा तक सेवा -उपासना और दर्शन व प्रवचन श्रवण हेतु जा रहे है।
मिला सौभाग्य...
ऐसे ही गुरुभक्तों के साथ पेटलावद क्षेत्र के पत्रकार भी गत दिनों भीलवाडा गुरुदेव के दर्शन हेतु पहुचे थे, और वहां दर्शन उपरांत वहां का आंखों देखा हाल गुरुवर के श्री चरणों मे शब्दों में पिरोने का प्रयास किया है।
बनाया महाश्रमण नगर....
आचार्य श्री के यहां भीलवाड़ा चातुर्मासिक स्थल को प्रवास व्यवस्था समिति ने धर्मनगरी के रूप में संवारकर निर्मित किया, जिसे महाश्रमण नगर के रूप में विरूपित किया गया है, जिसमें चारो ओर गुरुवर के उपदेशों के बैनर होर्डिंग, बड़ा सभाभवन, विकसित पंडाल, भोजनशाला, छोटे बच्चों को सत्संस्कार व धर्म की शिक्षा देने के लिए ज्ञानशाला, बाहर से आने वाले श्रद्धालुओ के ठहरने के लिए सुविधायुक्त अस्थाई आवास कुटिया, ग्रन्थालय के अलावा उपचार हेतु अस्थाई चिकित्सालय को भी इसी क्षेत्र में निर्मित कर विकसित किया है।
ऑनलाइन हो रहे प्रवचन....
वर्तमान में शासन -प्रशासन के नियमो के अंतर्गत आचार्यप्रवर,साध्वीप्रमुखा श्री कनकप्रभाजी , मुख्य मुनि श्री महावीरकुमारजी स्वामी आदि साधु-साध्वियों के प्रवचनों का ऑनलाइन प्रसारण प्रतिदिन सुबह 9:00 से 11:00 बजे तक फेसबुक व युट्यूब के तेरापन्थ पेज पर हो रहा है। आचार्यश्री ने कहा कि हम अहिंसा यात्रा कर रहे हैं, अहिंसा को व्यक्ति गहराई से समझें, यह बहुत जरूरी है। हिंसा-अहिंसा दो विरोधी तत्व है। अहिंसा को परम धर्म कहा गया है। इस संसार में सभी प्राणियों को अपना जीवन प्रिय है, तो फिर क्यों व्यक्ति किसी अन्य को हानि-कष्ट पहुंचाने का प्रयास करता है। ज्ञानी के ज्ञान का सार अहिंसा है। जिसने अहिंसा को समझ लिया और जीवन में उतार लिया, उसने फिर आध्यात्म को पा लिया। इस तरह से गुरुवर के द्वारा प्रतिदिन श्रद्धालुओ को ऑनलाइन प्रवचन देते हुए जीवन के सदमार्ग पर चलने की प्रेरणा दी जा रही। वहीं दोपहर में श्रद्धालुओं को गुरुवर के द्वारा दर्शन -सेवा एवं आशीर्वचन भी प्रतिदिन दिए जा रहे हैं। जिसमें दूर-दूर से गुरुवर के भक्तजन और अनुयायी सेवा का लाभ और दर्शन प्राप्त करने हेतु पहुंच रहे हैं।
हो रही विभिन्न गतिविधिया....
इस तेरापंथ नगर में विभिन्न प्रकार की गतिविधियां भी चलाई जा रही है जिसमें सेवा- दर्शन, नशा मुक्ति ,नैतिकता व सद्भावना का विकास एवं प्रतिदिन शाम को गुरु वंदना, प्रतिक्रमण,मुनिवृन्द द्वारा रात्रि कालीन प्रतिक्रमण का ऑनलाइन प्रसारण आदि गतिविधियां निरंतर गुरुदेव के सानिध्य में चलाई जा रही है, इस महाश्रमण नगर में गुरुदेव के साथ कुल 241 साधु एवं साध्वीपरमुखाश्री कनकप्रभाजी आदि साध्वियां प्रवासित है।जो लगातार गुरुदेव के दर्शन -उपासना में आने वाले अनुयायियों और भक्तों को
सचाई और अच्छाई के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्रदान कर रहे हैं।
पेटलावद के श्रावक भी चला रहे चौका...
इस तेरापंथ नगर में जहां बाहर से आने वाले वक्त और अनुयायियों के लिए प्रवास व्यवस्था समिति द्वारा भोजनशाला चलाई जा रही है।
साथ ही गुरुदेव की सेवा में भीलवाड़ा के इस तेरापंथ नगर में विभिन्न भक्तों और अनुयायियों के द्वारा लगभग 300 से अधिक चौके भी चलाए जा रहे हैं और पेटलावद क्षेत्र के लिए यह बड़ी उपलब्धि है कि इन 300 चौकों में पेटलावद एवं रायपुरिया के परिवार जिसमें पंकज पारसमलजी पटवा, हरकचंद केसरीमलजी भंडारी, फूलचंद शांतिलालजी कासवा, रितेश-पंकज पिता स्व. वर्धमानजी निमजा एवं रायपुरिया के रमणलाल रख़बचन्द कोटड़ीया के परिजन और परिवारों के द्वारा भी चौका लगाकर गुरुदेव और संतों की सेवा की जा रही है, इन परिवारों के द्वारा गुरुदेव की सेवा -उपासना का लाभ लेते हुए लगातार चार माह तक चौके चलाए जाएंगे ।जिससे इन परिवारों के द्वारा किए जा रहे इस धार्मिक अनुष्ठान से पूरे पेटलावद क्षेत्र को गौरवान्वित होने का मौका मिला है।

