अंतरप्रांतीय पिटोल बैरियर पर हो रही वाहनों से अवैध वसूली..... दूसरे राज्यो में हो रही जिले की छवि धूमिल.....

 



झाबुआ से अनिल मुथा मुथा की रिपोर्ट


  झाबुआ जिले के अनुसूचित जनजाति क्षेत्र में कुर्सियों पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों के द्वारा अपने निजी स्वार्थ को साधने के लिए अपने साथ पूरे जिले की छवि को राज्य स्तर तक बिगाड़ने में कोई कमी पेशी नहीं छोड़ी जारही है 


*ये है मामला.....*

 यदि आप व्यावसायिक वाहन मालिक या चालक नहीं है ,तो आपको आलिशान बनी ईमारतो की छोटी सी खिड़की से चल रहे खेल की कोई जानकारी नहीं होंगी की काले काच के पीछे से कोन अधिकारी है जो आपसे सड़क पर आगे बढ़ने के रूपये मांग रहा है जिसकी आपको कोई रशीद भी नहीं दि जाने वाली है असल मे वो उस कुर्सी पर बैठने वाला अधिकृत व्यक्ति ही है या कोई अनाधिकृत व्यक्ति है जिसे उस कुर्सी पर बैठ कर उगाही तो ठिक उस कार्यालय मे भी जाने का भी अधिकार ना हो

यहाँ बात हो रही है ,अंतरप्रांतीय चेक पोस्ट  पिटोल की यदि इस चेकपोस्ट के किसी भी ओर आने जाने वाले ट्रक टेंकर चालक को रोक कर सिर्फ "इंट्री" ही कहा जाए तो आपको सारी हकीकत पता चल जाएगी


सडकों पर दौडते ट्रांसपोर्ट वाहन इन वसूली वाले नाकों में जब चाहे तब वाहनों से अवैध वसूली की शिकयतें आम हैं।


*शासन की आंखों में धुल झोंकता विभाग....*

 चालिस  वसूली मेन बेरियर पर जो निजी है  वसूली के लिए ,और उठा रहा खर्चा परिवहन विभाग गजब का तालमेल कंपनियों के ठेकेदारों व परिवहन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का जो लगा रहे हैं शासन को चुना आखिर क्यों नहीं हो रही इन निजी कर्मचारियों के खर्चे की जांच जब भी इस मामले पर आरटीओ के जिम्मेदार अधिकारियों से बात करने की कोशिश की जाती है तो आपस में नहीं मिलते हैं या फिर कहा जाता है कि साहब बाहर है, छुट्टी पर है।


*यह भी खेल होता है.....* 

6, 8 ,12, 24 चक्को वाले वाहनों से अलग से ली जाती है ,ज्यादा एंट्री बेचारे वाहन मालिक व ड्राइवर आए दिन हो रहे परेशान रोज आती है झगड़े की नौबत साथ ही तोड़ना के पर कांटे से नहीं गुजरने वाले भारी भरकम वाहनों को बीच रास्ते से निकालने के 30,000 हजार से एक लाख रुपए तक वसूले जाने की शिकायतें भी बार-बार आती है


b>*कार्यवाही की मांग......*

 उल्लेखनीय है कि  इस पूरे मामले में सेटिंग और वसूली का पूरा कारोबार निचले स्तर से लेकर ऊपर तक के अधिकारियों तक जाता है   ।यदि ऐसा नहीं होता तो जिम्मेदार अधिकारी इन अवैध वसूली करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर अव तक कार्रवाई  जरूर कर देते। इस पूरे मामले में आमजन की मांग है कि इस प्रकार अंतर राज्य बेरियर  पर हो रही वसूली की कार्रवाई को बंद कराया जाना

चाहिए, ताकि दूसरे राज्यो में भी जिले कि छवि धूमिल नहो।




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