कांगेस ने एकजुट होकर तो भाजपा ने गुटों में पहुँचकर दी श्रधांजलि.... दुख में भी गुटबाजी करने से बाज नही आरहे भाजपाई, जमीनी ओर पुराने कार्यकर्ता भी नदारद ...

 



पेटलावद से हरिश राठौड़ की रिपोर्ट


पेटलवाद।  ब्लास्ट की 6टी बरसी पर   रविवार को घटना स्थल पर पहुंचकर विभिन्न सामाजिक  संगठनों, और राजनीतिक दलों के द्वारा श्रद्धांजलि देकर 6 साल पूर्व हुई इस वीभत्स घटना जिसमें कि पेटलावद क्षेत्र के 78 लोग  अचानक काल के गाल में समा गए थे और 25 लोग घायल हो गए थे ।इन सभी को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी गई ।



हुई आँखे नम....


स्थानीय श्रद्धांजलि चौक पर इस हादसे में दिवंगत हुए  लोगो के परिवार के सदस्यों ने नम  आखो से अपने परिजनों  को याद कर हारफूल अगरबत्ती लगाकर  अपने परिजनोंको श्रद्धांजलि दी । पीडित परिवार कि महिलाये  अपने बचो व परिजनों के साथ घटना स्थल पर पहुची ओर उस भयानक मंजर को याद करके  रो दिए।



कांग्रेश पार्टी ने दी श्रधांजलि....

 

इस विभस्य घटना को याद करते हुए  पेटलावद विधायक वालसिंह मेडा भी अपने कायकर्ताओं के साथ पहुंचे और ब्लाक कांग्रेस पार्टी की और से श्रद्धांजलि  देते हुए 2  मिनिट का मोन रखकर श्रधांजलि दी इस अवसर पर ब्लॉक कांग्रेस पार्टी के सभी पदाधिकारि ओर कार्यकर्ता मौजद ओर एकजुट थे।


सत्ताधारियों ने गुटों में दी श्रधांजलि....


इसके अलावा सत्ताधारी  दल बीजेपी जो कि वर्तमान में पंचायत से लेकर दिल्ली तक एक जुट होकर एक साथ रहने का दावा करती है  के कार्यकर्ताओ ओर  पदाधिकारीयो ने भी अलग-अलग समय पर अलग-अलग गुटों के साथ श्रद्धांजलि चौक पर पहुंचकर श्रद्धांजलि देते हुए दिखाई दिए।


जिला अध्यक्ष प्रदेश अध्यक्ष अलग-अलग पहुचे....


 सूत्रों के अनुसार जहां श्रद्धांजलि देने के लिए भाजपा के जिला अध्यक्ष खुद आए थे तो ऐसी स्थिति में पेटलावद के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्र के सभी मंडलों को और कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर एक साथ श्रद्धांजलि देना चाहिए  था, लेकिन अलग-अलग गुटबाजी के चलते अलग-अलग मंडलों के द्वारा अलग-अलग समय पर पहुंचकर श्रद्धांजलि दी।


वही  प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश के अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कल सिंह भाबर भी थांदला  श्रद्धांजलि देने के लिए पेटलावद पहुंचे थे लेकिन भाजपा के स्थानीय  पुराने और जमीन से जुड़े कार्यकर्ता नदारद दिखाई दिए।


  इस तरह से भाजपा में गुटबाजी के चलते इस दुख भरे समय में भी गुटबाजी चरम सीमा पर दिखाई दे रही है खेल किसी के श्रद्धांजलि देने या नहीं देने से पीड़ित या उसके परिजनों को कोई फर्क नहीं पड़ता है लेकिन ऐसे मामलों में अधिक बढ़ जाती है और जनता उनसे अधिक आ सकती है यह बात सत्ता धारियों को नहीं भूलना चाहिए।




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