थांदला से इमरान खान की रिपोर्ट
थांदला ज़िले का ख्याति प्राप्त 03 दिवसीय विजया दशमी मवेशी मेला बीते 02 वर्षो से कोविड के चलते (शासन की गाइड लाइन के चलते) नगर परिषद द्वारा निरस्त किया जा रहा था इस बार भी अनुविभागीय अधिकारी अनिल भाना द्वारा शांति समिति की बैठक में स्पष्ट कर दिया था कि इस वर्ष भी किसी भी तरह के आयोजन नही होंगे।
औपचारिकता बतौर लंकापति रावण के पुतले का दहन किया गया किसने किया ?, क्यो किया? यह विचारणीय प्रश्न है एवम ग्रामीण क्षेत्र से हजारों कि संख्या में भीड़ का हुजूम आना क्या सुनियोजित था?१ खेर थोड़े समय के लिये प्रशासन के हाथ पैर जरूर फुले पर तेज़ तर्राट अधिकारियो ने भीड़ पर फतेह हासिल कर असत्य पर सत्य की जीत दर्ज करवा दी।
नगर परिषद के मुख्य अधिकारी भारतसिंह टांक के अनुसार इस बार प्रशासन की अनुमति नही होने से समस्त कार्यक़म रद्द कर दिये गये है। नगर की समिति प्रमुख एवम श्री राम मंदिर के व्यवस्थापक रोहित बैरागी, राजेश जैन वरिष्ठ नागरिक गण द्वारा 31फिट के रावण के पुतले का निर्माण कर बडे श्री राम मंन्दिर से एक चल समारोह निकालकर नन्हे बेटे बने राम, लक्ष्मण एवम हनुमान द्वारा रावण का दहन किया गया।
आज हर तरफ फैले भ्रष्टाचार और अन्याय रूपी अंधकार को देख कर मन मे हमेशा उस उजाले को पाने की चाह रहती है, जो इस अंधकार को मिटाए कही से भी कोई आस न मिलने के बाद हम अपनी संस्कृति के ही पन्नो को पलट आगे बढ़ने की उम्मीद करते है।
रावण को हर वर्ष जलाना असल मे यह बताता है कि हिन्दू समाज आज भी गलत का प्रतिरोधी है।वह आज भी और प्रतिदिन अन्याय के विरुद्ध है।रावण को हर वर्ष जलाना अन्याय पर न्याय वादी जीत का प्रतीक है, की जब पृथ्वी पर अन्याय होगा हिन्दू संस्कृति उसके विरुद्ध रहेगी।
आतंकवाद, गंदगी, भ्रष्टाचारऔर महंगाई आदि बहुमुखी रावण है आज के समय ये सब रावण के प्रतीक है सबने रामायण को किसी न किसी रूप में सुना, देखा और पड़ा ही होगा रामायण यह सिख देती है कि चाहे असत्य और बुरी ताकते कितनी भी प्रबल हो जाये पर अच्छाई के सामने उनका वजूद उनका अस्तित्व नही टिकेगा अन्याय की इस मार से मानव ही नही भगवान भी पीड़ित हो चुके है लेकिन सच और अच्छाई ने हमेशा सही व्यक्ति का साथ दिया है।
दशहरा का पर्व दस प्रकार के पाप काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा, चोरी को हरता है दशहरा का पर्व इन्ही पापो के परित्याग की सदप्रेरणा प्रदान करता है।
हमने रावण को मार कर दशहरे के अंधकार में उत्साह का उजाला फैला दिया, लेकिन क्या हम इन बुराइयो को दूर कर पाएं है ? दशहरा उत्सव अपने उद्देश्य से भटक गया है अब दशहरे पर केवल शोर होता है और कुछ घंटों का उत्साह मगर लोग आज भी उन बुराइयो के बीच जीते है।इस पर्व पर लोगो से संकल्प करवाने वाले और अपनी कोई भी एक बुराई छोड़ने की अपील करने वाले भी इस पर्व के अंधकार में खो जाते है।रावण का पुतला सभी को उत्साहित करता है लेकिन बुराइयो से घिरे मानव को इन बुराइयो से मुक्ति नही मिल पाती है।
खेर आज जो हुवा वो अविश्वसनीय हो कर जनप्रतिनिधियों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि शासन, प्रशासन उसकी मुठी में है आज नोकरशाह भी जनप्रतिनिधि के सामने बोने साबित हो गये।
आज लंकापति का पुतला भी अग्नि के आगोश में जाने के पहले उनके दिमाग मे हलचल हो रही होगी कि नगर के प्रशासन और जन प्रतिनिधिगण में क्या सामंजस्यता है सभी एक दूसरे को चिढ़ाने में लगे है।वही नगर के वासिंदे एक नज़र दोनों को ही देख रावण के पुतले से कहते काश आज भी असत्य पर सत्य की जीत हो जाये पर ये जन्म जन्मांतर तक संभव ही नही है।
खेर नगर परिषद अध्यक्ष बंटी डामोर, जिला उपाध्यक्ष विश्वास सोनी, अनुविभागीय पुलिस अधिकारी एम एस गवली मुख्य परिषद अधिकारी भारत सिंह टांक, थाना प्रभारी कौसल्या चौहान ने असत्य पर आज सत्य की जीत दर्ज कर विजया दशमी की बधाई दी स्थानीय प्रशासन को साधुवाद।