पेटलावद से हरिश राठौड़ की रिपोर्ट
पेटलावद। जिस घर मे कलह नही होता, बुजुर्गो ओर माता-पिता कि सेवा होती है, गुरु का समान ओर महिलाओ का समान होता है उस घर मे महालक्ष्मी का सदा वास् होता है उक्त बात ने सभा भवन मे साध्वी श्री ने कहि।
आपने आगे बताया कि मंत्रों का जानकर जैसे जैसे मंत्र बोलता जाता है वैसे वैसे सर्प दंश का जहर उतरता जाता है जबकि पीड़ित व्यक्ति ना तो मंत्र को सुन पाता है नहीं समझ पाता है, वैसे ही आगम का श्रवण होता है भले ही किसी को समझ में ना आए उसका अर्थ ना आए पर सुनने मात्र से जीवन से कर्म रूपी जहर उतर जाता है , उक्त बाद साध्वी श्री सुलोचना जी ने भगवान महावीर स्वामी के अंतिम उपदेश पर आधारित आगम उत्तराध्ययन सूत्र का वाचन पूर्ण होने पर कहे, लक्ष्मी जी के बारे में बोलते हुए आपने कहा जिस घर में कलह नहीं होता है ,सुभाषीत भाषा बोली जाती है, माता पिता गुरु व बड़ों का सम्मान किया जाता है उस घर से लक्ष्मी कभी विदा नहीं होती है पर भौतिक लक्ष्मी से भी ज्यादा ज्ञान दर्शन व चरित्र की लक्ष्मी होती है जिसके जीवन में यह तीनों लक्ष्मी आ जाती है उसे भौतिक लक्ष्मी की आवश्यकता नहीं होती है ,साध्वी श्री ने पक्खी पर्व के अवसर पर सभी से अधिक से अधिक जप तप एवं स्वाध्याय करने के साथ शाम को प्रतिक्रमण करने का भी आह्वान किया ।
आप ने आगे कहा लक्ष्मी पूजा करो तो माता-पिता की पूजा भी करो भगवान का चित्र लगाओ तो उसका चरित्र भी जीवन में उतारो ऐसा दीप जलाओ की मन का अंधेरा मिट जाए तभी दीपावली मनाना सार्थक होगी।
*सुनाया मंगलपाठ भी*
दीपावली के अवसर पर साध्वी श्री सुलोचना जी साध्वी श्री रूचि ताजी-साध्वी श्री श्वेता जी साध्वी श्री रूपल जी ने भी धर्म परिषद को मंगल पाठ सुनाया ।
आज छ लोगों ने तेला एक ने बेला 11 ने उपवास साथ ही छोटे बच्चों ने भी पटाखे नहीं जलाने का प्रण लिया।