पेटलावद से हरिश राठौड़ की रिपोर्ट
रायपुरिया आज नगर के लिए सुनहरा दिन था जब वर्धमान स्थानक श्रावक संघ पर पूर्व मैं विराजित आचार्य उत्तम मुनि जी म.सा. की सु शिष्या पूज्य महासती श्री सुलोचना जी आदि ठाणा 4 विराजित थे, जिनके निरंतर प्रवचन जारी थे आज जब मंदिर मार्ग संप्रदाय के गछाधिपति श्री दौलत सागर जी के आज्ञा अनुवर्ती आचार्य बंधु बेलडी म.सा. की आज्ञा अनुवर्ती साध्वी श्री रत्ना रिद्धि श्री महाराज साहब आदि ठाणा दो का आगमन हुआ तब सकल श्री संघ द्वारा दोनों साध्वी जी का एक ही स्थान पर जिनवाणी श्रवण करवाया गया जिस पर दोनों साध्वी श्री द्वारा श्री संघ की अनुमोदना करते हुए कहां है कि यह सिर्फ हमने देश प्रांत में भी विचरण करते हुए भी ऐसा विलक्षण अवसर कभी नहीं देखा व न सुना श्री संघ रायपुरिया धन्यवाद के पात्र है ।जिन्होंने देश के संपूर्ण समाज को एक संदेश दिया है निश्चित ही यह एक प्रेरणादाई प्रसंग है पूज्य महासती श्री रत्न श्री जी ने जिनवाणी श्रवण कराते हुए धर्म मैं मन होना या ना होना फर्क नहीं पड़ता व्यक्ति के मन में धर्म होना चाहिए आपने कहा
मन चंचल विलक्षण है आधीर हैं, पल में खफा पल में मगन है
यह मन पलपल बदलता रहता है जो व्यक्ति मन पर विजय प्राप्त करता है उसका निश्चित ही बहुत सफल होता है
तत्पश्चात साध्वी श्री सुलोचना दिए ने अपने उद्बोधन में जिनवाणी श्रवण कराते हुए कहा कि
गुजरी हुई जिंदगी को याद नहीं करना तकदीर में लिखा है
उसकी फरियाद नहीं करना जो होता है वह होकर रहता है
फिक्र में अपना जीवन खराब नहीं करना
यह जिंदगी है उतार-चढ़ाव के प्रसंग आते रहते हैं वही व्यक्ति बुद्धिमान है जो संसार में रहते हुए भी पाप कर्म की क्रिया से दूर रहता है अर्थ और अनर्थ के पाप की परिभाषा को समझता है ,
मत करो इतना पाप जिससे सद्गति को लग जाए लॉक ।
अंत में श्री संघ के श्री अनिल मुथा, संजय मुथा, चही बरबेटा ,सांझी,रूही भंडारी टीम ,माही राठौर ,दीपिका भंडारी ने स्तवन व उद्बोधन भी है अंत में श्री संघ द्वारा पूज्य महासती जी को चार रोज रायपुरिया मैं और स्थिरता रखने की की विनती की