पूरे नगर की छतों को बेचकर बड़ी कमाई की तैयारी में अध्य्क्ष ओर परिषद..... प्रशासन को दिए गए आवेदनों पर कोई कार्यवाही नही होने से बड़े कारनामो की तैयारी में परिषद..... सालो पहले बने सामुदायिक भवन के लिये फिर से राशि की लेकर स्वीकृति से होगा निजी फायदा..... नगर की जनता करे अब निर्णय, पार्षदों पर भी रहेगी निगाहे.......







पेटलावद से मनोज पुरोहित / पीयूष राठौड़ की रिपोर्ट


पेटलावद| नगर परिषद का  05 वर्ष का कार्यकाल अपने अंतिम 2 से 3 माह की समयावधि में  पूरा होने जा रहा है ।

एजेंडा घुमाया....

    इसी क्रम में पेटलावद नगर परिषद के द्वारा सोमवार 18 अप्रैल को परिषद की बैठक आहूत करते हुए विभिन्न प्रकार के प्रस्ताव पारित करने का निर्णय लिया गया है और एजेंडा घुमाया गया है ।इन एजेन्डो  में मुख्य रूप से नगर की विभिन्न छतों को 70% दर पर दिए जाने की स्वीकृति पर विचार  एवं वार्ड क्रमांक03,07 13 ,15  में सामुदायिक भवन बनाने के लिए राशि की स्वीकृति  करने और नामांतरण प्रकरणो के निराकरण के एजेंडे विशेष रुप से शामिल किए गए है। 

नगर हित में निर्णय लेने का है अधिकार....

बैठक करना और नगर हित में निर्णय लेना नगर परिषद के अधिकार में आता है और नगर के विकास कार्यों के लिए बैठक करके विभिन्न एजेन्डो  को पास करना अच्छी बात भी है। लेकिन नगर परिषद के इस सोमवार 18 अप्रैल को परिषद की बैठक में रखे जाने वाले एजेंडॉ  पर अभी से विवाद एवं बवाल होना शुरू हो गया है ।

सालो पहले से बने हुए है भवन फिर क्यों रख रहे प्रस्ताव....

इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि नगर परिषद के द्वारा वार्ड क्रमांक 13 और 15 में सामुदायिक भवन बनाकर राशि स्वीकृति करने की बात कही जा रही है। शायद पेटलावद की  नगर परिषद यह  भूल गई है कि पेटलावद के वार्ड क्रमांक 13 राम मोहल्ला एवं वार्ड क्रमांक 15 तलाबपाड़ा में नदी के किनारे पुरानी परिषद के द्वारा वर्षों पूर्व लाखों रुपए की राशि खर्च करके सामुदायिक भवन बनाए गए हैं जो आज भी  देखभाल के अभाव में बिना किसी उपयोगिता के साबित हो रहे हैं।

सदुपयोग हो जनता की गाड़ी मेहनत की कमाई से दिए टेक्स का....

     जब इन दोनों वार्डों में सामुदायिक भवन बने हुए हैं तो फिर से नवीन भवन बनाने की न तो कोई आवश्यकता है और ना ही शासन इस प्रकार की कोई अनुमति देगी । वैसे भी इन भवनों को जिन कार्यों के लिए बनाया गया था यह भवन उसके लिये अनुपयोगी  साबित हो रहे हैं ।वहीं देखभाल के अभाव में जर्जर एवं वीरान तथा टूट-फूट रहे इन भवनों की मरम्मत की ओर नगर परिषद को सुधार करना चाहिए और सरकार की राशि का सदुपयोग किया जाना चाहिए । ओर नगर की जनता की गाड़ी कमाई से भरे हुए टेक्स का सदुपयोग हो।

छतों को बेचकर कर रहे वारे न्यारे....

नगर परिषद के द्वारा पिछले वर्ष नगर के रायपुरिया बामनिया मुख्य मार्ग पर गांधी चौक में बनी हुई नप के काम्प्लेक्स के  ऊपर नियम विरुद्ध तरीके से अपने परिवार के सदस्यों को रेवड़ी बांटते हुए छतो  की लीज  करते  करते हुए उन्हें निजी हाथों में सौंप कर बड़ी गाड़ी कमाई कर ली है।

इन छतों को बेचने की तैयारी में....

 अब नगर परिषद को इस क्षेत्र में बड़ी कमाई का जरिया नजर आ रहा है इसीलिए पेटलावद की विभिन्न छतों ( हालांकि नगर परिषद के द्वारा अपने एजेंडे में किसी भी छत का उल्लेख नहीं किया गया है) लेकिन नगरवासी भली प्रकार से जानते हैं कि नगर की अन्य दुकानों जैसे साईं मंदिर के पास बनी दुकानें ,श्रद्धांजलि चौक पर नगर परिषद की बनी हुई दुकाने , पूरानी  नगर पंचायत कांप्लेक्स गणेश मंदिर के सामने बनी हुई दुकानों के अलावा साईं मंदिर के सामने बनी हुई नगर परिषद की दुकानों , व नवीन बन रही विवादित 10 दुकानो की छतों पर नप के अध्य्क्ष ओर उनकी टीम की गिद्ध निगाहे है , ओर  इन सब दुकानों की छत  को लीज  कर के गाडी  कमाई करने का जरिया अध्यक्ष और परिषद के द्वारा किया गया है।

पूरा नगर बेचने की तैयारी....

  नगर के  सुरेंद्र कुमार भंडारी के द्वारा नगर परिषद पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए बताया है कि अपने 5 साल के कार्यकाल के अंतिम समय में नगर परिषद पूरे पेटलावद को गिरवी रख कर बेचने की फिराक में है ।

प्रशासन क्यो है उदासीन....

 नगर परिषद की पुरानी लीज देने के भ्रष्टाचार सहित नगर परिषद में अपने परिवार के सदस्यों को नौकरी देकर भ्रष्टाचार करने और विभिन्न प्रकार के भ्रष्टाचार को लेकर हमारे द्वारा जिला कलेक्टर को लगभग 10 माह पूर्व आवेदन दिए जा चुके हैं लेकिन अभी तक किसी भी मामले में कोई भी जांच नहीं होना या कार्रवाई नहीं होना प्रशासन की उदासीनता की ओर संकेत करता है।उक्त आरोप लगाते हुए प्रशासन को सुरेंद्र भण्डारी ने कठघरे में खड़ा कर दिया है।

पूरे नगर की निगाहें पार्षदों पर....

नगर के नागरिकों की समस्याओं को नगर परिषद तक पहुंचाना और नगर हित की बात रखने का पूरा दारोमदार पेटलावद के 15 वार्डों से चुने गए पार्षदों पर निर्भर कर रहा है । ओर पूरे नगर की निगाहें नगर के चुने हुए इन 15 पार्षदों ओर विधायक  प्रतिनिधि पर  भी है।

उठाएंगे आवाज या लेंगे हिस्सा..?

 मिली जानकारी के अनुसार नगर के कुछ पार्षदों तो इस भ्रष्टाचार की  गंदगी के छीटो से बचने  के लिये बैठक से पहले ही बाहर चले गए हैं। अब जिम्मेदार पार्षदों पर ही निर्भर है कि वह नगर के इस छतों को बेचकर रेवड़ी बांटने के मुद्दों पर अपना विरोध दर्ज करते हैं या अपना- अपना हिस्सा लेकर जनता और मीडिया के सामने अपने को पाक साफ रखने की कोशिश करते हैं ।

प्रशासन से भी  उम्मीद

पार्षद अपना विरोध दर्ज कराते हैं या नहीं यह तो आने वाला समय बताएगा लेकिन  जनता की ओर से इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय प्रशासन और जिला प्रशासन से भी उम्मीद की जा रही है।

प्रशासन का नही है इनको भय....

  पिछली बार छतों  को  बेचने में जो भ्रष्टाचार हुआ है उसके लिए कई बार जिला प्रशासन सहित मुख्यमंत्री तक आवेदन गए हैं लेकिन अब तक जांच की धीमी गति के चलते कोई निर्णय नहीं हो पाया । जिसके चलते प्रशासन  नगर परिषद और उसके कर्ता-धर्ताओ  के मन से  भय समाप्त हो गया है  ओर खुलकर भ्र्ष्टाचार की नई इबारत लिखने की तैयारी कर रहे है।

होनी चाहिए कार्यवाही....

अब प्रशासन को भी जाग कर इस पूरे मामले में स्वत संज्ञान में लेकर पूरे मामले पर रोक लगाने चाहिए।  ऐसी आस नगर की जनता से प्रशासन को हे।

जनता करे निर्णय....

वही हमारे द्वारा लगातार नगर हित में नगर परिषद के काले कारनामों के ऊपर विभिन्न प्रकार से समाचार लगाकर जनता को जागृत किया गया है अब अंतिम निर्णय नगर की जनता पर भी निर्भर करता है कि क्या नगर परिषद नगर की विभिन्न छतों  की को बेचकर खुद के हित साधने का प्रयास कर रही है तो उस पर विरोध दर्ज करवाएं या नगर के इस कार्य पर अगर जनता की सहमति है तो मोन्न रहकर इस  कार्य को होने दे। यह जनता तय करे।

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