पेटलावद से मनोज पुरोहित /हरिश राठौड़ की रिपोर्ट
पेटलावद| हमारे देश में सरकार के द्वारा महिलाओं की सुरक्षा एवं उनके संरक्षण के लियब विभिन्न प्रकार के सख्त से सख्त कानून बनाए हैं और इन कानूनों के पीछे एक मात्र उद्देश्य महिला को उत्पीड़न से बचाना और समाज में पुरुषों के बराबर समाज मे सम्मान दिलाना है।
कानूनों का पालन करवाने वालो कि नाकामी......
लेकिन हमारे देश में कानून बनाने वालों से ज्यादा कानून का पालन करने वालों की चलती है और कानून का पालन करने वाले सरकार के बनाए गए कानूनों का किस प्रकार से मखौल उड़ाते हैं और उन कानूनों को बनाने के बावजूद भी पीड़ितों को लाभ नहीं मिल पाता है । ऐसा ही एक ज्वलंत मामला प्रकाश में आया है जिसमें एक पीड़ित महिला अपने पति की दूसरा शादी रुकवाने के लिए लगभग 18 घंटों तक जिला मुख्यालय एसपी से लेकर झकनावदा चौकी व रायपुरिया थाने एवं पूरे प्रशासन के पास शादी रुकवाने के लिये आवेदन लेकर चक्कर लगाती रही लेकिन कहीं भी उसे न्याय नहीं मिला और अंत में प्रशासन की लेटलतीफी या यूं कहें कि लापरवाही के चलते महिला के पति दूसरी शादी करने में सफल रहा ।
यह है पूरा मामला....
पीड़िता सुनीता( परिवर्तित नाम) के द्वारा जानकारी देते हुए बताया गया कि वर्ष 2017 में उसका विवाह भिलकोटडा निवासी रामकिशोर पिता सुखराम मेडा से हुआ था और उसका एक 03 वर्षीय नाबालिक बच्चा विवेक भी है ।कुछ समय तक ससुराल वालों के द्वारा अच्छा रखने के पश्चात पीड़िता को वर्ष 2019 में मारपीट कर घर से बाहर निकाल दिया तब से पीड़ित अपने पिता अनार सिंह के यहां ग्राम शामली में निवास कर रही है ।
कोर्ट में मामला विचाराधीन....
पीड़िता के द्वारा अपने पति से अपने और अपने नाबालिक बच्चे के भरण-पोषण के लिए पेटलावद दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी न्यायालय में भरण पोषण का आवेदन पत्र भी प्रस्तुत कर रखा है। और प खुद विपक्षी और उसके अधिवक्ता न्यायालय में उपस्थित हो रहे हैं यहां तक कि न्यायालय के सामने समझौता करके पीड़िता को वापस ले जाने की चर्चाएं भी न्यायालय में विचाराधीन है ।
दूसरे विवाह की तैयारी में....
इसी दौरान पीड़िता को दिनांक 12/05/ 2022 को इस बात की जानकारी मिली कि पीड़िता के पति रामकिशोर के द्वारा अपनी पत्नी से तलाक लिए बगैर दूसरा विवाह ग्राम झकनावदा सेमलिया के रहने भमरसिह भाभर की पुत्री के साथ दूसरा विवाह किए जाने की तैयारी कर रहा हैं।
महिला पुलिस टालती रही मामले को....
जब पिडिता को इस बात की जानकारी हुई तो पीड़िता इस शादी को रुकवाने के लिए सबसे पहले रायपुरिया पुलिस थाने पर गई जहां पर रायपुरिया पुलिस के द्वारा पीड़िता के आवेदन पत्र को जांच में रखकर अपने काम की इतिश्री कर ली।
एसपी से भी मिला आश्ववासन, कार्यवाही नही कर सके.....
पश्चात पीड़िता दिनांक 13 /05 / 2022 को चौकी प्रभारी झकनावदा के समक्ष अपना आवेदन लेकर पहुंची वहां से भी पीड़िता को जब न्याय नहीं मिला तो खुद पीड़िता अपने पिता के साथ कलेक्टर कार्यालय झाबुआ एवं पुलिस अधीक्षक आशुतोष गुप्ता से मिलने के लिए पहुंची पुलिस अधीक्षक कार्यालय में स्वयं पीड़िता के बताए अनुसार एसपी आशुतोष गुप्ता के द्वारा पीड़िता को यह कह दिया कि हमारा काम विवाह रुकवा नहीं है फिर भी मैंने रायपुरिया थाने में बता दिया है वहां जाकर संपर्क करो जब पीड़िता रायपुरिया थाने पर पहुंची तो वहां पर पदस्थ एएसआई दिव्य ज्योति के द्वारा पीड़िता को इस मामले में धमकाने का प्रयास किया गया की हमारा काम शादी रुकवाना नही तुम एसपी साहब के पास क्यो गयी।
एसडीएम गेमावत ने तत्काल जारी किया पत्र.....
पीड़िता अपनी पूरी पीड़ा लेकर एसडीएम शिशिर गेमावत के पास पहुंची एसडीएम गेमावत के द्वारा इस मामले में त्वरित संज्ञान लेते हुए एक आदेश महिला परियोजना महिला एवं बाल विकास विभाग पेटलावद व रायपुरिया पुलिस थाने को सूचित करते हुए पीड़िता की बात सुनने और विवाह रुकवाने के लिए निर्देशित किया ।
भोपाल में हु कहकर टाल दीया थाना प्रभारी ने.....
लेकिन पीड़िता जब इस आदेश के साथ रायपुरिया पुलिस थाने पर पहुंची तो रायपुरिया पुलिस थाना प्रभारी के द्वारा स्वयं को भोपाल मीटिंग में होना बताते हुए वहां पर पदस्थ एएसआई से मिलने की बात पीड़िता को फोन पर ओर कल आकर मिलने की बात कही ।ओर महिला एएसआई को फोन लगाने पर पीड़िता को यह जवाब मिला कि मैं से बाहर आ गई हूं और मेरा काम शादी रुकवाना नहीं है।
पेंडुलम की तरह चक्कर लगाती रही पीड़िता....
इस तरह से पीड़िता अपना आवेदन और दुखड़ा लेकर लगभग 18 घंटों तक पुलिस चौकी झकनावदा ,थाना रायपुरिया , पुलिस अधीक्षक कार्यालय के चक्कर लगाती रही और इस पूरे प्रशासनिक प्रक्रिया में एक पेंडुलम की तरह घूमती फिरती रही और अंत में पीड़िता को कोई पुलिस का कोई सहयोग नहीं मिला और पुलिस तथा प्रशासन की नाकामी के चलते महिला के पति का दूसरा विवाह संपन्न हो गया।
पालन कराने वालो की है नाकामी
इस तरह से जहां एक पीड़िता अपने पति का दूसरा विवाह रुकवाने के लिए पुलिस अधीक्षक से लेकर एसडीएम और थाना प्रभारी के लगातार 18 घंटे तक चक्कर लगाते रहे लेकिन फिर भी पुलिस और प्रशासन के द्वारा पीड़िता को न्याय दिलाने में कोई रुचि नहीं लेते हुए उसके पति का दूसरा विवाह चुपचाप होने दिया। जिन जिमेदारो के हाथों में कानून का पालन करने की जिमेदारी वे अपना कर्तव्य कैसे निभा रहे है यह तस्वीर इस बात की बानगी है।
कई मामले है जिनमे पीड़िताएं लगा रही कोर्ट ओर थानों के चक्कर....
आदिवासी अंचल में यह एक ऐसा मामला नहीं है ऐसे हजारों मामले हैं जिनमें पीड़िताये ने कानून और कोर्ट के चक्कर लगा लगा कर थक रही है और कानून की आड़ में कानून का खिलवाड़ करते हुए लोग महिलाओं के अधिकारों और कानूनों का खिलवाड़ बनाकर खेल रहे हैं।
शिवराज की पुलिस महिला अपराधों में नही गम्भीर.....
इसके अलावा यह भी आम बात है कि थानों में महिलाओं के साथ किस प्रकार का व्यवहार किया जाता है यह आप हम सभी जानते हैं। सिर्फ प्रदेश के मामा प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा और कानून का रॉज होने की बात जरूर कर रहे हैं लेकिन हमारे थाना क्षेत्रों में आम नागरिक और महिलाओं के साथ किस प्रकार का व्यवहार किया जाता है यह एक ज्वलंत तस्वीर है। शिवराज सिंह चौहान की प्रदेश की पुलिस महिलाओं के साथ घटित होने वालों मामलों में कितनी गम्भीर है, यह उसका जीता जागता उदाहरण है।
इंनका है कहना.....
मैं अपने पति की दूसरी शादी रुकवाने के लिए 18 घंटे तक एसपी ऑफिस, चौकी झकनावदा रायपुरिया थाना के चक्कर लगाती रही लेकिन पुलिस ने मेरी कोई सुनवाई नहीं की और मेरे पति की दूसरी शादी हो गई।पुलिस ने मेरी कोई मदद नही की
पीड़िता सुनीता(परिवर्तित नाम)
महिलाओं के मामलों में सरकार ने कानून बनाए लेकिन इसका पालन करने वाले ठीक से नहीं करते पालन । हमारी कोई सुनवाई नही हुई दूसरी शादी करने वालो पर हो कार्यवाही
अनारसिंह सिंगाड सामली पीड़िता के पिता
मेरे संज्ञान में मामला आने के बाद तुरंत परियोजना अधिकारी पेटलावद एवं रायपुरिया पुलिस थाने को आदेशीत करते हुए पत्र जारी कर दिया गया है ।
एसडीएम शिशिर गेमावत
भोपाल से आ गया हूं अभी जुलूस में ड्यूटी कर रहा हूं आपसे बाद में बात करता हूं


