राष्ट्रीय पक्षी मोर की प्रजाति देखभाल के अभाव में हो जाएगी लुप्त.....लगातार हो रहे घटनाओं का शिकार मोर, संरक्षण और सुरक्षा की है दरकार, ठोस योजना बनाये सरकार और प्रशासन.....

  






पेटलावद से हरिश राठोड की रिपोर्ट

पेटलावद। मोर  हमारे देश मे राष्ट्रीय पक्षी के रूप में जाना जाता है । ये वही पक्षी है जो पंख फैलाकर किये गए  सुंदर नृत्य से मन को मोह लेता है,  इसकी मधुर ध्वनि ओर सुरीली आवाज कानो में रस घोलती है,  इसकी आवाज को बारिश आने का संकेत भी माना जाता है। ओर पुरातन काल मे इस पक्षी के ऊपर कई छंद ओर कविताएं लिखी गयी है ।अंचल में सर्वाधिक मोरो की संख्या पेटलावद में पाई  जाती है इसलिये नगर को मोरो की नगरी के रूप में भी पहचाना जाता है।

आये दिन  घटनाओ  के चलते हो रही इनकी संख्या कम....

 लेकिन   मोरो की नगरी के रूप में ख्यात रहै पेटलावद में धीरे धीरे मोरों की संख्या कम हो रही है लगातार दुर्घटनाओं में इनकी जान जाने के बाद भी इनकी रक्षा के लिए कोई प्रभावी कदम  के लिए नहीं उठाए जा रहा है । 

करंट से हुई मौत....

रविवार सुबह भी पेटलावद नगर के वार्ड क्रमांक 8 में एक मोर करंट से मौत हो गई, जब स्थानीय रहवासियों ने देखा तब खबर दी गई ।रहवासियों ने बताया कि बिजली के तार नीचे होने के कारण आए दिन यहां मोरो के साथ दुर्घटनाएं होती हैं पूर्व में भी वह घायल मोर को हॉस्पिटल ले गए हैं जिससे उनकी जान बच गई थी । लेकिन इस बार इस मोर की जान नहीं बचाई जा सकी तब रहवासी मृत मोर को उठाकर पशु चिकित्सालय ले गए। 

मयूर पार्क देखभाल के अभाव में हुआ वीरान....

उल्लेखनीय है कि पेटलावद क्षेत्र 1994 से मोरों के आशियाने के रूप में प्रसिद्ध है।  समय-समय पर मोर प्रेमी इनकी सुरक्षा के लिए मांग उठाते रहते हैं लेकिन स्थानीय अधिकारियों की अनदेखी के चलते इनकी उपेक्षा ही हो रही है। लगता है कि अब यह मोर धीरे धीरे केवल चित्रों में ही नजर आएंगे कई वर्षों पूर्व स्थानीय डाक बंगले में मोरो के रहने एवं दाना पानी के लिए एक शेड भी बनाया गया था  जिसे की मयूर पार्क का नाम दिया गया था एक समय मे यहां अनगिनत पाए जाते थे ।

प्रशासन  से ध्यान देने की मांग....

किंतु देखभाल के अभाव में  आज वह भंगार के रूप में तब्दील हो गया है पास में ही पड़े  रेत के ढेर भी पड़े है। ओर दानापानी  ओर देखभाल के अभाव में मोरो की संख्या  लगातार कम होती जा रही है। नगर के  मोरप्रेमियो  वीरेंद्र व्यास, जितेंद्र कटकानी, हस्तीमल बाफना , महेंद्र अग्रवाल, वीरेंद्र भट्ट , हरीश राठौर, अशोक वर्मा  , राजेन्द्र चतुर्वेदी आदि ने   प्रशासन से इस ओर ध्यान देने की मांग की जा रही है। ताकि इस राष्ट्रीय  धरोहर को लुप्त होने से बचाया जा सके।




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