पेटलावद से मनोज पुरोहित / हरिश राठौड़ की रिपोर्ट
पेटलावद ।जब किसी अधिकारी या सरकारी कर्मचारी का स्थानांतरण होने के बाद वह अपनी जिम्मेदारी के पद पर आसीन होता है तो उसकी पदस्थापना के समय उस विभाग एवं संबंधित क्षेत्र की जनता की आंस उक्त अधिकारी के प्रति अपने और अपने क्षेत्र की समस्याओं को लेकर बढ़ जाती है।
नियमों का पालन और जनहित होता सर्वोपरि....
अधिकांश अधिकारी और कर्मचारी क्षेत्र की समस्याओं को नियमानुसार निराकृत करने में अपनी रुचि दिखाते भी हैं ।लेकिन कुछ अधिकारी और कर्मचारी ऐसे भी होते हैं जो क्षेत्र की जनता की समस्याओं को दूर करना तो ठीक उनकी समस्याओं को समझने के लिए भी तैयार नही होते!
01 साल हुआ पूरा....
लेकिन कुछ कर्मचारी और अधिकारी कैसे होते हैं जो जनता के हितों या नियमों पर चलना है नहीं जानते हैं हम बात कर रहे हैं पेटलावद के सीएमओ मनोज कुमार शर्मा की जिनको आज 31 अगस्त को पेटलावद के सीएमओ का पदभार ग्रहण किए हुए पूरा 1 वर्ष हो चुका है आज हम इन के 1 वर्ष के कार्यकाल की भूरी भूरी प्रशंसा कर रहे हैं।
नही समझ सके अब तक नगर की समस्याओ को....
वैसे कोई अधिकारी कर्मचारी जब पदस्थापना ग्रहण करता है तो उस क्षेत्र की जनता की समस्याओं को सुनने समझने के लिए उसे थोड़ा सा समय जरूर चाहिए ।लेकिन पेटलावद के सीएमओ साहब को इस पद पर आसीन हुए आज 31 अगस्त को 1 वर्ष का समय हो गया है क्या इतने वर्षों इतने समय में नगर की समस्याओं को पिछले 01 वर्ष में सुलझाना तो ठीक समझ भी नही पाए।
डेड वर्ष में 04 सीएमओ.....
नगर परिषद में पिछले डेड वर्ष में तीन बार सीएमओ बदले जा चुके हैं और चौथे सीएमओ के रूप में मनोज कुमार शर्मा पिछले 1 वर्ष से पेटलावद का कामकाज देख रहे हैं लेकिन इनके कार्यकाल की ऐसी कोई भी उपलब्धि खुलकर सामने नहीं आई जिससे यह प्रतीत होता है कि नगर परिषद एक सरकारी कर्मचारी के निर्देश पर चल रही हैं
रहा विवादों से नाता....
पूरे नगर की जनता यह भली-भांति जानती है कि नगर परिषद के सीएमओ मात्र रिमोट कंट्रोल की तरह इस्तेमाल किए जा रहे हैं नगर परिषद में बढ़ रहे भ्रष्टाचार की गंगा जमुना के साथ विभिन्न प्रकार के मुद्दों विवादों का जन्म सीएमओ शर्मा के कार्यकाल में हुआ। सबसे पहले इनका विवाद परिषद के ही एक कर्मचारी से हुआ ,बन्द कमरे में हाथापाई की नोबत के बाद पुलिस थाने में रिपोर्ट तक पहुचा । उसके बाद शर्माजी का विवाद सफाई कर्मचारियों से हुआ जिनके कामकाज को लेकर प्रताड़ना व नोटिसबाजी का मामला भी जबरदस्त चला । वही आवास हितग्राहियों की किश्त को लेकर भी सीएमओ साहब को नगर की जनता के धरने ओर प्रदर्शन का भी सामना करना पड़ा। वही कुछ समय पूर्व आवारा पशुओं की लड़ाई में घायलों के परिजनों और नागरिको ने परिषद में जाकर सीएमओ साहब को जबर्दस्त खरी खोटी भी सुनाई।
नगर की अव्यवस्थाओं पर कोई ध्यान नहीं....
पेटलावद के सीएमओ मनोज कुमार शर्मा के कार्यकाल में पूरे नगर के रोड गड्ढे के रूप में तब्दील हो गए हैं , वहीं मेला ग्राउंड में मंदिर के आसपास फैलता कचरा, जिससे मन्दिर जाने वालों का आती समस्या, पम्पावती नदी की दुर्दशा ,आरो पाइप लाइन के ठेकेदारों के द्वारा मनमर्जी से गड्ढा खोदना और गड्ढों को वापस बन्द नही करना, स्वछता अभियान में पिछड़ना, सब्जी मंडी में लाखों रुपए खर्च करने के बावजूद भी बंद पड़ी सब्जी मंडी ,लोगों का रोड पर बैठकर , मटन और मछली मार्केट की दुकानों की अब तक शुरुआत नहीं होना और नगर में सफाई व्यवस्था का चरमरा जाना, सेनीटाइजर के छिड़काव को लेकर सोश्यल मिडिया पर लोगो कि चिठी ओर कमेंट, भंगार को बेचने के अलावा, बगीचे के संबंध में विवाद, दुकानों की नीलामी ,और दुकानों की छतों को बेचकर भ्रष्टाचार करने के सारे, मामले शर्मा जी के कार्यकाल में ही उत्पन्न हुए हैं।
त्रस्त नगरवासी....
इस तरह से नगर की अव्यवस्थाओं ओर नगर से संबंधित किसी भी समस्या का हल सीएमओ साहब सीएमओ मनोज कुमार शर्मा के पास नही है। जिसके चलते पूरे नगर की जनता त्रस्त है।
जोड़तोड़ से रुकी है रवानगी....
लगातार विवादों के चलते एवं मीडिया में आ रही खबरों के कारण प्रशासन के द्वारा सीएमओ साहब का स्थानांतरण नगर से लगभग 6 माह पूर्व ही हो चुका है लेकिन नगर परिषद के अध्यक्ष मनोहर भटेवरा और कुछ पार्षदों की मिलीभगत के चलते सीएमओ साहब नगर परिषद से अब तक रवाना नहीं हो पाए हैं ।जानकार सूत्रों के अनुसार सीएमओ साहब के स्थानांतरण में पेटलावद क्षेत्र की पूर्व राजनेता और मंत्री का नाम भी चर्चा में जोरों पर है वही अपने स्वार्थ को साधने के लिए राजनीतिक दल बल को अपने स्वार्थों का हिस्सा बना कर दोनों ही पार्टियों के साथ सेटिंग बिठाकर सीएमओ शर्मा साहब और भटेवरा जी की जुगलबंदी पूरे नगर को दुर्दशा के गड्ढे की ओर धकेलने में कोई कसर नहीं छोड़ रही।
निजी फायदे की बनाते योजनाएं.....
वही हमें यहां तक जानकारी प्राप्त हुई है कि सीएमओ साहब मात्र हस्ताक्षर करते हैं बल्कि नगर परिषद में अध्यक्ष और पार्षदों के निजी फायदे की योजनाएं ही बनती ओर इन योजनाओं को किसी अन्य अघोषित सीएमओ के माध्यम से बनवाई जाती है ।सुनने में तो यहां तक आया है कि नगर परिषद में दो प्रकार के रजिस्टर चलाए जाते हैं ।
जनता की जिम्मेदारी से विमुख....
कुल मिलाकर पिछले 1 वर्ष के कार्यकाल में मनोज कुमार शर्मा जो कि एक सरकारी कर्मचारी है के द्वारा राजनीतिक गठजोड़ के कारण अपने प्रशासनिक जिम्मेदारियों से आंख मूंद कर बन्द कर रखी है , को पेटलावद की जनता का 1 वर्ष का कार्यकाल बहुत ही महंगा पड़ा है जबकि उन्हें राजनीतिक नहीं अपने नियमों और सिद्धांतों के अनुसार जनता के हित के कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर करने में रुचि लेना चाहिए।


