पेटलावद से अनिल मुथा की रिपोर्ट
पेटलावद । महिला एव बाल विकास परियोजना विभाग के अंतर्गत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को घटिया किस्म की एक साथ साड़ी खरीद कर वितरण करने का मामला प्रकाश में आने के बाद लगातार आंगनवाड़ी केंद्रों पर परियोजना विभाग के सुपरवाइजर के द्वारा किये गए कई भ्र्ष्टाचार एव पैसा कमाने की गतिविधियों की भी परते खुल- खुल कर बाहर आ रही है । और ऐसी कई जानकारियां प्राप्त हुई है जिसमें यह स्पष्ट हो रहा है कि महिला एवं बाल विकास विभाग जिसमें कि अधिकांश रूप से महिलाएं ही कार्य करती है और महिला सुपरवाइजर के द्वारा भ्रष्टाचार में किसी भी पुरुष से कमतर नही है।
लिया जाता है हर विभाग का काम कार्यकर्ता और सहायिकाओ से.....
अधिकांश लोगों के द्वारा इस बात की जानकारी हम से चर्चा के दौरान शेयर करते हुए बताया कि आंगनवाड़ी केंद्रों में जहां आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को लगातार मैदानी स्तर पर काम करवाया जाता है अपने विभागों के साथ ही साथ चाहे किसी भी प्रकार का सरकारी सर्वे हो ,या नगरपालिका अथवा ग्राम पंचायत का सर्वे हो या , सरकारी योजनाओ का घर -घर प्रचार हो, या चिकित्सा विभाग का टीकाकरण, या प्रसूति अथवा गर्भवती की जानकारी, शिक्षा विभाग के बच्चों का सर्वे का कोई कामकाज हो सभी विभागों के सरकारी कामों ओर मैदानी दौड़धूप में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को जोड़कर दिन-रात परिश्रम करके मैदानी स्तर पर दौड़ाया जाता है।जिनकी मामिटरिंग का काम सुपरवाइजरो के हाथ मे है।
सेलेरी के लिये भी लेती है पैसे...
और 2 से 3 महीने तक लगातार सैलरी देने का भी अभाव आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ओर सहायिकाओं के लिए विभाग की ओर से रहता है ।ओर इनकी सेलेरी निकालने के लिए भी सुपरवाइजरो द्वरा रुपयो की मांग की जाती है।
रेकार्ड के नाम पर कमीशनखोरी....
वहीं जानकारों के अनुसार आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को अपने रिकॉर्ड कंप्लीट करने के लिए जो अलग-अलग रजिस्टरो ओर रेकार्ड मेनटेन का पूरा भार आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं के ऊपर ही होता है ।इन रजिस्टरों की एक साथ खरीदी कर के सुपरवाइजर के द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को देकर इसमें भी भ्रष्टाचार किए जाने की जानकारी प्राप्त हुई है। वहीं सुपरवाइजर के द्वारा द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को सैलरी निकालने के नाम पर भी दबाव बनाते हुए पैसा लेने के बात सामने आई है।
सरकारी काम करने के लेती है पैसे....
इसके अलावा लाड़ली लक्ष्मी योजना के फार्म जो की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के द्वारा अपने क्षेत्र में से कंप्लीट करके सुपरवाइजर को सुपुर्द किए जाते हैं इन इ फार्मो को ऑनलाइन करने के लिए भी शुल्क की मांग सुपरवाइजर के द्वारा की जाती है।
दबाव बनाती है सुपरवाइजर...
इस तरह से महिला बाल विकास विभाग के अंतर्गत पेटलावद क्षेत्र की अधिकांश सुपरवाइजर के द्वारा पूरे क्षेत्र मेंभ्रष्टाचार की गंगा जमुना बहा रखी है ।ओर अपनी अधीनस्थ कार्यकर्ताओ व सहायिकाओं से सरकारी काम के लिये पैसे मांगने ओर नही देने पर काम रोक कर दबाव बनाने और कमिशनबाजी करते हुए कमीशन ओर भ्र्ष्टाचार में महिला(विभाग) की सुपरवाइजरो ने पुरुषों को भी पीछे छोड़ दिया है।
रुक गया साड़ी का वितरण....
वही बात करें यदि साड़ी कांड की तो इस संबंध में जिला कलेक्टर सोमेश मिश्रा के सख्त रवैया के बाद आंगनवाड़ी केंद्रों पर पेटलावद छेत्र की सुपरवाइजरो के द्वारा जो साडी का वितरण किया जा रहा था उसे तत्काल रोक दिया गया है ।
क्या लौटाए जाएंगे रुपये?....
हालांकि कलेक्टर सोमेश मिश्रा की सख्ती ओर जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ अभयसिंह खराड़ी के आदेश के उपरांत साड़ी का वितरण सुपरवाइजरो ने रोक दिया है , लेकिन जो साड़िया वितरित हो कि चूंकि है और जिन कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने घटिया साड़ी के 600 से 800 रुपये दे दिये है, वे पैसे उन्हें लौटाए जाएंगे या नही इस पर सस्पेंस बरकरार है।
ठीकरा छोटे कर्मचारियों पर....
इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा निचले स्तर के अधिकारियों पर पूरे मामले का ठीकरा फोड़कर बड़े स्तर के अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
लम्बे समय से एक ही क्षेत्र में जमी है सुपरवाइजरे....
पेटलावद परियोजना के अंतर्गत 18 सेक्टर है और इन सेक्टरों में 18 सुपरवाइजर है कार्यरत है । जानकारों के अनुसार पूरे पेटलावद क्षेत्र में कार्यरत सुपरवाइजरो को क्षेत्र में कार्य करते हुए 5 से 8 वर्ष से अधिक का समय हो गया है। पूरे क्षेत्र में प्रशासनिक कसावट के अभाव में सुपरवाइजरो द्वारा हर काम मे कमिशंनखोरी की जारही है।
फेरबदल की दरकार.....
एक ही क्षेत्र में लम्बे समय से कार्यरत अधिकांश सुपरवाइजर को एक ही क्षेत्र में जमा होने के कारण इनके द्वारा भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है इसलिए मांग की जा रही कि पेटलावद क्षेत्र में कार्यरत सुपरवाइजर को स्थानांतरित कर फेरबदल किये जाने की मांग भी उठ रही है।
