पेटलावद से हरिश राठौड़ की रिपोर्ट
पेटलावद । राष्ट्रीय पक्षी मोर को लेकर शासन प्रशासन के द्वारा कई नियम बना रखे हैं इनकी सुरक्षा और देखरेख तथा दाना पानी आदि की व्यवस्था के लिए भी शासन के द्वारा समय-समय पर वन विभाग एवं अन्य समितियों को फंड आदि भी उपलब्ध कराया जाता है लेकिन शासन प्रशासन के गैर जिम्मेदाराना रवैए के चलते राष्ट्रीय पक्षी मोर की संख्या लगातार कम होती जा रही है और हादसों के कारण इनकी मृत्यु होती जा रही है ।
*करंट लगने से हुई मौत*
ग्राम जामली में स्टेट लाइट से करंट लगने से राष्ट्रीय पक्षी मोर की मौत होगयी। गांव के बीचो बीच चौराहे पर धर्मशाला के सामने स्टेट लाइट 11000 केवी के तारों की चपेट में आने से करंट लगने से इसी स्थान पर करीब 20 मोर मर चुके है।बताया जाता है अभी तक ग्राम जामली में 20 मोर चुके हैं।
*कई बार करवाया है अवगत*
ग्रामीणों की मानें तो इस स्टेट लाइट से पूर्व में भी कई मोरों की मौत हो चुकी है कई बार विद्युत मंडल एवं फॉरेस्ट विभाग तथा वरिष्ठ अधिकारियों को इस संबंध में अवगत कराया गया लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते फिर से आज एक राष्ट्रीय पक्षी मोर की मौत हो गई ।
*मोर संरक्षण सिर्फ कागजों पर*
वही बात करें पर पेटलावद चेत्र की तो क्षेत्र में राष्ट्रीय पक्षी मोर की भरमार है लेकिन दाना पानी के अभाव में एवं अधिकारी कर्मचारियों की लापरवाही के चलते आए दिन मोर हादसे का शिकार होते रहते हैं ।पेटलावद के मोर प्रेमियों ने कई बार मोरों के संवर्धन एवं रक्षा के लिए वर्षों पूर्व मोर संरक्षण समिति बनाई थी लेकिन इस समिति की भी निष्क्रियता और अधिकारियों के गैर जिम्मेदाराना रवैया से राष्ट्रीय पक्षी की संख्या लगातार कम होती जा रही है और और मोरों के संरक्षण को लेकर अधिकारी कर्मचारी सिर्फ कागजों पर ही लिखा पढ़ी करते दिखाई दे रहे हैं और अधिकारियों की लापरवाही के चलते राष्ट्रीय पक्षी काल के गाल में लगातार समा रहे हैं।
