पेटलावद से हरिश राठौड़ की रिपोर्ट
*पेटलावद। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद* के तत्वावधान में तेरापंथ युवक परिषद पेटलावद द्वारा आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री वर्धमान कुमार जी स्वामी आदि ठाणा-2 के सानिध्य में तेरापंथ भवन पेटलावद पर जैन संस्कार विधि से रक्षाबंधन कार्यशाला का आयोजन किया गया।
*350 शाखाओ में संस्कार विधि*
परिषद के अध्यक्ष व संस्कारक रुपम पटवा ने बताया की अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद की 350 शाखाएं पूरे देश मे जैन संस्कार विधि जन जन की विधि बने इस ओर प्रयासरत है। इसमे बाहरी आडंबर, फिजूलखर्ची एवं हिंसा के अल्पीकरण पर विशेष ध्यान जाता है। किसी भी मांगलिक प्रसंग या त्योहार को सादगी से जैन मंत्रोच्चार के साथ मनाया जाने वाला यह महनीय उपक्रम है। इस माध्यम से संस्कारक जैन मान्यताओ को भी जन जन तक पहुचाने का कार्य करते है।
मुनि श्री वर्धमान कुमार जी स्वामी ने प्रवचन के दौरान बताया कि ग्रहस्थ जीवन में जैन संस्कार विधि श्रावक समाज को अनावश्यक हिंसा व बाहरी आडंबर से बचा सकती है। मंत्र में शब्द, भावना और प्रकम्पन इन तीनो का योग होता है, भावना जब प्रबल बनती है तो कोरा शब्द भी शक्तिशाली बन जाता है और भावना शून्य मंत्र को आप हज़ार बार भी दोहराए तो भी उससे कुछ नही होने वाला। ग्रंथो में हज़ारों मंत्र लिखे हुए है पर उन्हें पढ़कर आप अपना अभिष्ट सिद्ध नही कर सकते। विधिपूर्वक, अनुष्ठानपूर्वक, लयबद्ध उच्चारण के साथ उसमें भावना का पुट देना पड़ता है, तब कही जाकर उस मंत्र में प्राणशक्ति का संचार होता है। प्रकम्पन जितना ज्यादा शक्तिशाली होगा मंत्र उतना ही प्राणवान व कार्यकारी बनेगा। भावना उसे शक्तिशाली बना देती है।
उदाहरण दिया जा सकता है हरड़ का। यह एज वनस्पति का बिज है जो आयुर्वेद में बहुत उपयोगी व गुणकारी है। अकेली हरड़ उतनी गुणकारी नही होती किन्तु जब उसे दूसरी औशधीयो के साथ भावित कर दिया जाता है टी यह रामबाण हो जाती है।
मन्त्र क्या है - कुछ अक्षरों का समूह ही तो है, क से ज्ञ तक जितने अक्षर है, उनके योग से ही मंत्र बनते है। इन अक्षरों को सार्थक समूह में पिरो दे तो मंत्र बन जाते है, और इस मंत्र को विधिपूर्वक लयबद्ध प्रकम्पनो के रूप में भावना के साथ जोड़ दे तो मंत्र से विराट शक्ति पैदा हो जाती है। मंत्र जाप में उच्चारण का बहुत महत्व है। भावना, आस्था, विधि - इन सबको जानने के बाद जीवन की बहुत सारी समस्याओं को सुलझा सकते है। विधि का ज्ञान होना चाहिए। विधी से अनभिज्ञ है और आस्था भी बलवती नही है, मन मे संशय है, फिर ऐसी स्थिति में मंत्र का प्रभाव कहा और कैसे होगा।
अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद द्वारा जैन संस्कार विधि के सम्बंध में समाज को जाग्रत करने के निरंतर प्रयास किये जा रहे है। विवाह, जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगांठ आदि के साथ रक्षाबंधन के पर्व को भी हमारी संस्कृति अनुसार संयम सहित व आडंबर व हिंसा रहित रूप मनाए जाने हेतु यह कार्यशाला आयोजित हुई है। जो विधि रक्षाबंधन हेतु बताई है, उसमे प्रभावक मंत्रो का समावेश है, नमस्कार महामंत्र, लोगस्स पाठ, मंगल भावना, आदि कई मंत्र है, जिनके विधिपूर्वक उच्चारण से वातावरण भी शुद्ध होता है और मंत्र का प्रभाव भी होता है।
संस्कारक राजेश वोरा व कमल जैन ने श्रावक समाज से रक्षाबंधन पर्व को जैन संस्कार विधि से मनाने का आह्वान किया। ये सारी जानकारी परिषद मीडिया प्रभारी पीयूष पटवा ने दी।
