सहकारिता कि फसल चर रहा भ्रष्टाचार का सांड....

 



पेटलावद से अनिल मुथा की रिपोर्ट


झाबुआ में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के प्रभारी प्रबंधक दयाराम सिरोठिया द्वारा बैंक की काली देवी शाखा के प्रबंधक द्वारा 180 किसानों की फसल बीमा मुआवजा राशि प्रदाय करने एवज में  तीन लाख (300000)  रुपए की रिश्वत लेने का मामला प्रकाश में आने के बाद समूचा सहकारिता विभाग संदेह के घेरे में आ गया है झाबुआ एवं अलीराजपुर जिले के 19 बैंक वह 72 सहकारी संस्थाओं में किया गया सहारा लेने भ्रष्टाचार भाई भतीजावाद और रिश्वतखोरी की काली छाया में फसा दिखाई देता है जिस तरह से सिर उठाने रिश्वत पर हाथ आजमाएं उससे साबित होता है कि यह मामला केवल पानी पर पेरते हिमखंड का ऊपरी हिस्सा ही है यदि सहकारिता विभाग के समस्त प्रतिष्ठानों द्वारा संचालित योजनाओं की बारीकी से जांच की जाए तो भ्रष्टाचार के बड़े खेल से पर्दा उठ सकता है फसल बीमा योजना फसल ,ऋण योजना देसी किसानों के आर्थिक कल्याण सीधे जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में किया जाने वाला भ्रष्टाचार विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भारी टानिक बन गया है दूसरी तरफ किसान भ्रष्टाचार की इस मार से बुरी तरह करा रहे हैं


झाबुआ अलीराजपुर जिले में.... 

केंद्र और राज्य सरकारों के द्वारा देश के अन्नदाता किसानों के हित एवं उधार तथा कल्याण के लिए कई प्रकार की कल्याणकारी योजनाएं बनाई जाती है। केंद्र और राज्य सरकारों का किसानों के प्रति इन योजनाओं का बनाने का विशेष कारण यह रहता है कि अन्नदाता किसान को उसकी मेहनत का पूरा -पूरा लाभ मिल सके साथ ही उनका जीवन स्तर आगे बढ़ सके।


अफसरों के निजी हितों के चलते फेल होती है योजनाये....


 लेकिन केंद्र और राज्य सरकारों के द्वारा बनाई जा रही योजनाओं को अमलीजामा पहनाने का जिम्मेदार जिन प्रशासनिक अधिकारी कर्मचारियों की होती है उनके द्वारा किसान हितैषी योजनाओं में स्वयं के हित साधने ओर फायदा उठाने के चक्कर मे सरकारी योजनाओं में भ्र्ष्टाचार ओर रिश्वतखोरी  किया जाताहै, ओर पात्र हितग्राही का शोषण किया जाता है, या उस तक योजना को पहुँचने ही नही दिया जाता है, जिसके चलते केंद्र और राज्य सरकार की सारी योजनाएं या तो विफल हो जाती है या उसका सही पात्र लोगों तक लाभ पहुंचना मुश्किल हो जाता है। अफसरों कि ऐसे ही रिश्वतखोरी ओर भ्र्ष्टाचार से किसानों की हितकारी योजना फसल बीमा योजना का झाबुआ -आलीराजपुर  के वनवासी बाहुल्य क्षेत्र में पलीता लग रहा है।


लोकायुक्त ने पकडा रँगे हाथो....

  ऐसा ही एक मामला जिले में सामने आया है हम बात कर रहे हैं  जिला सरकारी मर्यादित बैंक झाबुआ सीसीबी के जिला महाप्रबंधक    दयाराम  सिरोठिया की जिन्हें  04 सितम्बर को  पूर्व इंदौर की लोकायुक्त पुलिस  ओर टीम के द्वारा अपने ही अधीनस्थ  कालीदेवी के बैंक मैनेजर से किसानों की बीमा राशि की स्वीकृति हेतु 03 लाख की रिश्वत मांगने पर डेढ़ लाख रुपए नगद  रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ कर  कार्यवाही  की है , उल्लेखनीय है कि सिरोठिया ने किसानों की  प्रधानमंत्री फसल बीमा  योजना की राशि की स्वीकृति हेतु अपने अधीनस्थ कर्मचारि से रिस्वत मांगी जा रही थी।जबकि यह सरकार की योजना है जिससे किसानों को लाभ होता है।

झाबुआअलीराजपुर का रहता है प्रभार.....

हम यहां बताना चाह रहे हैं कि दयाराम  सिरोठिया जिनके पास न सिर्फ झाबुआ सीसीबी के चेयरमैन  का प्रभार है, बल्कि इनके पास अलीराजपुर जिले के सीसीबी चेयरमैन का पद का भी प्रभार है पिछले 2 वर्षों से झाबुआ अलीराजपुर के  महाप्रबन्धक  पद की बागडोर संभाल रहे सिरोठिया  के जिला सहकारी बैंक  के अन्तर्गत  झाबुआ -अलिराजपुर की 19 शाखाएं एवं 72 सोसाइटी आती  हैं ।



इस वर्ष  इतने  किसानों को मिलाना हैं लाभ....

वही  आंकड़ो के अनुसार वर्ष 2021 में 95964  किसानों को रबी ओर खरीफ की फसलों की बीमा का लाभ मिला है


एक मामले से ही  03 लाख तो दूसरों से कितनी कि होगी वसूली.....

जहां  सिरोठिया ने  काली देवी के एक बैंक मैनेजर से उस बैंक शाखा के 180 किसानों की फसल बीमा राशि के लिए 03 लाख रुपये की राशि की रिश्वत   की मांग की गई थी तो ऐसे में यह सवाल आमजन के दिमाग में कौंध कर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है कि जहां एक बैंक शाखा से 03 लाख रुपये  की रिश्वत की मांग की गई थी इस तरह से 19 बैंक शाखाओं और 72  सोसायटीओं में किसानों को मिलने वाली राशि के संबंध में भी सिरोठिया  के द्वारा कहीं ना कहीं अवैध वसूली और भ्रष्टाचार खुलकर किया गया होगा।


होनी चाहिए इन योजनाओं की उच्चस्तरीय जांच....

 यदि शासन प्रशासन संयुक्त पंजीयक इंदौर, जिला सहकारी बैंक महाप्रबंधक की संपत्ति और उसके कार्यकाल की केसीसी ऋण, गेहूं बोनस, ऋणी अऋणी किसानों के बीमा में खाते कि जांच, प्रधानमंत्री फसल बीमा, सोसाइटी में अनाज बारदान खरिदी बिक्री, जैसी योजनाओं की

  पूरी बारीकी से जांच करें तो हो सकता है कि बड़ा खुलासा हो सकता है। क्योंकि जानकारों के अनुसार महाप्रबंधक दयाराम सिरोठिया की एवं उसके परिवार के नाम अब खुद चल एवं अचल संपत्ति होने की बातें दबे जुबान से कहीं जा रही है ऐसी स्थिति में झाबुआ और अलीराजपुर कि सभी बैंक शाखाओं और सोसायटी ओर से भ्रष्टाचार के रूप में जो रिश्वतखोरी की राशि जमा की गई है उसके पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। 


ताकि किसानों को सीधा मिले लाभ....

 जानकारों का मानना है कि राज्य और केंद्र सरकारों को इस प्रकार की व्यवस्था की जानी चाहिए जिससे किसानों को मिलने वाली लाभप्रद राशि सीधे उनके खातों में पहुचे  और बिचौलिए अफसरों और कर्मचारियों को रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार करने का मौका न मिल सके। मौका



Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Below Post Ad

bottom ads