सरकारी जमीन की बंदरबांट भू माफियाओं के वारे न्यारे.... कर लेते अगर सरकारी जमीन पर सरकार खुद तार फेंसिंग ना होती विवाद की स्थिति उत्पन्न..... बरसात में पहुंचा सीमांकन करने दल....

 



पेटलावद से अनिल मुथा की रिपोर्ट


पेटलावद ।जिले के विकसित माने जाने वाले विकासखंड पेटलावद में कई भू माफिया कुकुरमुत्ते की तरह पैदा हो गए हैं।

 इनकी निगाह खाली पड़ी सरकारी जमीनों पर या फिर जीवन की बुनियादी आवश्यकताओं के लिए संघर्ष करने वाले गरीब जनो की जमीन पर लगी रहती है उक्त माफिया गिरोह टोली बनाकर काम करते हैं तथा इनकी राजनीति और प्रशासन में लंबी पहुंच होती है ऐसे में शहरी क्षेत्र से लगी मौके की बेशकीमती जमीने तथा हाईवे पर स्थित भूखंडों को हथियाना इन भू माफियाओं के लिए बाएं हाथ का खेल हो ज्यादा है।


नेशनल हाईवे की जमीन पर हो रहा कब्जा....


ताजा मामला करडावद रोड  नेशनल हाईवे पर भूमाफिया ने

सरकारी जमीन पर भी अतिक्रमण कर रखा है तथा शासन की मिलीभगत से रिकॉर्ड में उसे अवैध रूप से जुड़वाने के लिए कई तरह के प्रपंच किए जा रहे हैं उक्त जमीन पर शासन ने ताबड़तोड़ नामांकन के प्रक्रिया संपन्न की बंदोबस्त की टीम ने भूमि जमीन का सीमांकन करते हुए सरकारी जमीन ही माप डाली तथा उसे दो हजार अट्ठारह में कई पट्टा धारियों के नाम दर्ज होना बता दिया इसमें खेल यह है कि बाद में पट्टा धारियों को उक्त भू माफिया थोड़ी बहुत धनराशि देकर जमीन हथिया ली जाती है, इस तरह क्षेत्र में रातो रात मौके की जमीन पर तार फेंसिंग कर कतिपय भू माफिया गिरोह उक्त जमीन पर कब्जा कायम कर लेता है और कागजों में हेराफेरी कर उसे अपने नाम दर्ज करवा लेता है इस खेल में अंदर खाने में सत्ताधारी दल के नेता सरकारी कर्मचारी तथा दूसरे कई शक्तिशाली लोग अपनी भूमिका निभाते हैं और इस प्रकार सरकारी जमीन रिकॉर्ड से गायब होकर किसी एक व्यक्ति की निजी संपत्ति बन जाती है पर्दे के पीछे इस खेल में बड़े लेन-देन की खबरें भी सुनाई देती है 



क्यों नहीं की तार फेंसिंग.....


उल्लेखनीय है कि इस पूरे मामले में राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पूर्ण रूप से संदेह के घेरे में है क्योंकि 3 माह पूर्व उक्त भूमि का सीमांकन गठित दल के द्वारा अनुविभाग अधिकारी के नेतृत्व में गठित दल के द्वारा किया गया था और गठित दल के द्वारा उक्त भूमि को राजस्व मद की शासकीय भूमि बताया गया था उक्त भूमि शासकीय की राजस्व भूमि निकली उसके पश्चात लगातार स्थानीय मीडिया कर्मियों और कई लोगों के द्वारा उक्त जमीन पर राजस्व विभाग को तार फेंसिंग करते हुए अपने कब्जे में लिए जाने के संबंध में कई बार समाचार भी प्रकाशित किए गए।


राजस्व विभाग की लापरवाही....

 लेकिन राजस्व विभाग की

 लापरवाही और या यूं कहें कि दूसरों को उपकृत करने की सोची समझी रणनीति के तहत उक्त जमीन को 4 माह से खुले छोड़ रखी थी जिस पर अचानक 2018 के पट्टे धारियों के द्वारा  झोपड़े टांग दिए गए और पूरे मामले में माफिया के दबाव में आकर प्रशासन के द्वारा रातों-रात इन भू माफियाओं को इन पटवारियों को बिना कोई सुनवाई का अवसर दिए बगैर या दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने का मौका दिए बगैर रातों-रात इस झोपड़ों को हटाने की कार्रवाई भी कर दी गई यदि इस जमीन पर राजस्व विभाग के कर्मचारी शुरू से ही तार फेंसिंग करके अपने कब्जे में ले लेते तो 

अतिक्रमणकारियों को इस जमीन पर कब्जा करने का मौका मिलता और ना ही प्रशासन को लेकर के अतिक्रमणकारियों को हटाने का कोई मौका मिलता इस तरह से राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर अपने हिसाब से कानूनों को मोड़कर अपना निजी हित साध रहे हैं।


बरसात में पहुंचे सीमांकन करने....

राजस्व विभाग की इस पूरे मामले में भूमिका इसलिए भी संदिग्ध प्रतीत हो रही है के लगातार इस जमीन को लेकर विवाद हो रहा है माफियाओं के इशारों पर कभी जमीन सरकारी बताई जाती है कभी इस जमीन पर पट्टेधारी लोग आकर कब्जा करते हैं ,रातोंरात उनको हटाया जाता है और आज इस पूरे मामले में भू माफियाओं के इशारे पर बरसात के समय जब की सीमाएं भी कायम नहीं की जाती तब राजस्व विभाग शुक्रवार को  जमीन का सीमांकन करने पहुंचा है। इस तरह से भू-माफिया के इशारे पर राजसव विभाग पूरे मामले में गोलमाल करने बैठा है।


जब इस मामले में अनुविभागीय अधिकारी से जानकारी ली गई तो उनका कहना है कि उक्त भूमि पर जारी पट्टे प्रथम दृष्टया संदेहास्पद लगते हैं उनकी जांच की जाएगी और सरकार अपनी जमीन अपने अधिकार मिलेगी




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