शासन की मंशाओं ओर जनता की उम्मीदों पर फिर रहा पानी.... करोड़ो का सिविल अस्पताल, लेकिन डॉक्टर लापरवाह....

 





पेटलावद से हरिश राठौड़ की रिपोर्ट


पेटलावद। करोड़ो की लागत से पेटलावद नगर को सिविल अस्पताल की सुविधा मिली है। कोरोना काल मे इस अस्पताल को जनता के लिए शुरू कर दिया गया है। शासन की मंशा है कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के गरीब लोगों को इलाज के लिए अन्य शहरों और राज्यो में न भटकना पड़े। पेटलावद में सिविल अस्पताल प्रारम्भ होने से क्षेत्र वासियों में उम्मीद को किरणें जगी है कि उन्हें अब बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं अपने ही क्षेत्र में एक छत के नीचे मिल पाएगी, किंतु क्षेत्र वासियों की उम्मीदों पर सरकारी डॉक्टर पानी फेरने का काम कर रहे है। ऐसे में शासन की मंशाओं पर पानी फिरता नजर आ रहा है। डॉक्टरों के इस लापरवाह रवैये से क्षेत्र की जनता में निराशा दिखाई दे रही है। 

समय पर नही मिलते डॉक्टर.....

सिविल अस्पताल प्रारम्भ हुआ, मरीज भी बड़ी संख्या में इलाज के लिए आ रहे है लेकिन सरकारी डॉक्टरों की अनुपस्थिति खल रही है। अस्पताल में डॉक्टरों की नदारतता से मरीजो को परेशानी उठानी पड़ रही है। नगर से लगभग ढाई किमी दूर इस अस्पताल में डॉक्टर कम रुचि दिखा रहे हैं, ओर अधिकांश समय अपने निजी निवास या निजी क्लिनिक को देने में मस्त है। अपने निजी स्वार्थ ओर लालच में आकर डॉक्टर अस्पताल को वार्डबॉय ओर नर्सो के भरोसे छोड़कर घर की ओर रवाना हो जाते है। अस्पताल के अधिकारियों द्वारा समय सारणी बनाते हुए अलग-अलग डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई है किंतु डॉक्टर ड्यूटी में रुचि कम दिखा रहे है, ऐसे में यहां पहुचने वाले मरीज ओर उनके परिजनों में भारी आक्रोश भी देखा जा सकता है। 


नर्सो के भरोसे छोड़े मरीज....

सोमवार शाम को एक व्यक्ति सीडी से नीचे गिर गया जिससे उनकी पसली में अंदरूनी चोट आई। मोके पर डॉक्टर  की ड्यूटी थी , लेकिन जल्दबाजी ने मरीज का पूरा इलाज किये ही डॉक्टर घर के लिए रवाना हो गए, ओर जाते-जाते बाहर ले जाने की सलाह दे गए, इस दौरान दर्द से व्यक्ति तड़पता रहा। व्यक्ति के साथी ने मौके पर डॉक्टर नही होने से निराशा जाहिर की ओर इस लापरवाही को अपने मोबाइल में वीडियो के माध्यम से कैद किया। इस दौरान अंदर कमरे में बैठी नर्से हरकत में आई और साथी को समझा बुझाकर मामला शांत करवाया। हमारे द्वारा नर्से ओर उपस्थित वार्डबॉय से जानकारी चाही तो बताया गया कि डॉक्टर साहब अभी किसी काम से घर गए है, अगर कोई पेशेंट आता है तो हम उन्हें फोन करके बुला लेंगे। बड़ा सवाल है कि सरकारी ड्यूटी होने के बाद भी डॉक्टर घर पर जाकर आराम फरमा रहे है। ऐसे में अगर कोई गम्भीर मरीज अस्पताल आता है तो उसका इलाज कैसे होगा यह तो जिम्मेदार अधिकारी ही बता पाएंगे। अस्पताल नगर से लगभग किमी दूर है ऐसे में डॉक्टर को अस्पताल आने में भी काफी समय लग जाता है, लेकिन यहां ड्यूटी टाइम होने के बाद भी डॉक्टरों का मोह अपने घर पर ही रहता है। वैसे देखा जाए तो पेटलावद के सरकारी डॉक्टर हमेशा से विवादों के घेरे में रहे है, अस्पताल के बजाए ड्यूटी टाइम पर घर पर इलाज करना ओर समय पर अस्पताल नही आना जैसे आरोप भी लग चुके है, किंतु फिर भी जिम्मेदार अधिकारी आज तक उक्त डॉक्टर पर कोई कार्यवाही नही कर पाए है। पूर्व में भी जिला अधिकारियों की टीम ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया था इस दौरान कई डॉक्टर ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए थे जिन्हें नोटिस भी जारी किया गया, लेकिन यहां के डॉक्टर जिला अधिकारियों के निर्देशों को भी धता बता रहे है। पेटलावद क्षेत्र में लगभग 240 राजस्व ग्राम है,तथा यहाँ 3 लाख से अधिक लोग निवास करते है ऐसे में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते है लेकिन अस्पताल में भरपूर स्टाफ की कमी के चलते मरीजो को एक छत के नीचे पूरी स्वास्थ्य सुविधा मिलने से वंचित होना पड़ रहा है। 




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