पेटलावद से हरिश राठौड़ की रिपोर्ट
पेटलावद ~ जाति ,कुल ,बल रूप ,तप ,ऐश्वर्य ,ज्ञान ,लाभ,का मद (अहंकार)करने से नीच गौत्र कर्म का बंधन होता है।
अरहन्त देव ,गुरु ,धर्म कज भक्ति करने से उच्च गौत्र कर्म का बन्ध होता है।
उच्च गौत्र कर्म के परिणाम से जाति की विशिष्टता ,कुल की विशिष्टता,बल की विशिष्टता,रूप की विशिष्टता ,सौंदर्य की प्राप्ति ,तप की विशिष्टता ,ज्ञान की विशिष्टता ,लाभ की विशिष्टता ,ऐश्वर्य की विशिष्टता प्राप्त होती है।
उक्त आशय के उदगार श्री जैन श्वेताम्बर तेरापन्थ धर्मसंघ के 11 वे अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी के विद्वान सुशिष्य मुनि श्री वर्धमानकुमारजी ने तेरापन्थ भवन में उत्तराध्यन सूत्र के 33 वे अध्ययन के वाचन के दौरान व्यक्त किए।
आज तेरापंथी सभा द्वारा चतुर्मासकाल में 4 उपवास (चोला ) व इससे ऊपरके विभिन्न तप अट्ठाई ,पंद्रह ,मासखमण ,एकासन मासखमण, दो माह एकान्तर तथा वर्षीतप आराधकों का सामूहिक तप अभिनन्दन समारोह का आयोजन किया गया ।
इस अवसर पर मुनि श्री ने कहा कि -मन को वश में करना सबसे बड़ी बात है।
आज के समय मे इतने सारे खाद्य पदार्थो की उपलब्धता के बाद भी तपस्या करना बड़ी बात है।
मन चंचल होता है।
मन को वश में करना कठिन है।
आपने कहा कि चूल्हे की आग जब तक जलती रहेगी तब तक दूध का उफनना बंद नही किया जा सकता।
शरीर की चेष्टाएँ व वाणी की चंचलता कम कर मन पर कंट्रोल किया जा सकता है।
आज पेटलावद व चोखले के करीब 51 से अधिक श्रावक- श्राविकाओ को चतुर्मासकाल में विभिन्न तप आराधना सम्पन्न करने पर मोमेंटो भेट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आई ए एस अनुविभागीय अधिकारी श्री शिशिर जी गेमावत व अध्यक्षता कर रहे श्री प्रकाशजी डाकलिया (तेरापंथी महासभा राष्ट्रीय संगठन मंत्री )को भी साहित्य व मोमेंटो भेट कर सम्मानित किया गया।विशेष अतिथि के रूप में दिलीप भंडारी,श्री पारसमल कोटडिया थे।
इस अवसर श्री गेमावत ने कहा कि तपस्या करना हमारी संस्कृति है ,संस्कार है।इस वर्ष
जून माह में मुझे पूज्य आचार्यश्री महाश्रमणजी के दर्शनों का सौभाग्य मिला था।आज मुनि श्री के दर्शनों का सौभाग्य मिला है।
आप सभी तपस्या के क्षेत्र में आगे बढते रहे।
आज के कार्यक्रम में श्री शिशिर गेमावत, प्रकाश डाकलिया को मोमेंटो व साहित्य भेट कर सम्मानित किया गया।
अतिथियों द्वारा तपस्वियों को मोमेंटो भेट कर सम्मानित किया गया।
साथ ही अखिल भारतीय तेरापन्थ युवक परिषद द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर संगठन के क्षेत्र में प्रथम पुरस्कार प्राप्त व अन्य तीन पुरस्कार प्राप्त होने पर अभातेयुप राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य व स्थानीय तेयुप अध्यक्ष रूपम पटवा को मोमेंटो व दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में महिला मंडल व कन्या मण्डल ने गीत प्रस्तुति दी। दिलीप भंडारी ने विचार रखे।
तेरापंथी सभा अध्यक्ष विनोद भंडारी ने स्वागत भाषण को प्रस्तुति दी।
संचालन फूलचन्द कांसवा व आभार तेरापंथी सभा के लोकेश भंडारी ने किया।
आज मुनि श्री द्वारा नेहा मयंक भंडारी को 18 उपवास का प्रत्याख्यान करवाया गया।