पेटलावद से हरिश राठौड़ /मनोज पुरोहित की रिपोर्ट
पेटलावद ।पंचायत से लेकर दिल्ली तक इस समय पूरे देश में भाजपा एकतरफा शासन और प्रशासन को चला रही है मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हो या देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभी के द्वारा आम लोगों की कल्याण और विकास के लिए योजनाएं बनाई जाती है और उन योजनाओं का स्वरूप भी मौके पर धरातल में लोगों की उन्नति और विकास की ओर दिखाई दे रहा है। लेकिन जहां ऊपर बैठे सरकार के नुमाइंदे शासन-प्रशासन के स्तर से लोगों के जन कल्याण की योजनाएं बनाते हैं वैसे ही ठीक उनके विपरीत जाकर उन्ही की संस्थाओं परिषद और उनके संस्थाओं के द्वारा ऐसे कार्य किए जाते हैं जिससे न सिर्फ आमजन बल्कि लोगों की मन से भी दुख के आंसू बाहर निकाल जाते हैं ।
विकास कार्य में फिसड्डी.....
हम बात कर रहे हैं पेटलावद नगर परिषद की उल्लेखनीय है कि पेटलावद नगर परिषद पिछले 4 वर्षों से पेटलावद नगर वासियों को खून के आंसू रुला रही है विकास कार्यों में पिछड़ा हुआ पेटलावद अव्यवस्थाओं, परेशानियों ,और विवादों से घिरा हुआ भाजपा के अध्यक्ष और पूरी परिषद भाजपा की होने के बावजूद यहां कुछ ऐसी स्थिति निर्मित होती है जहां नगर परिषद की मनमानी और रवैया के साथ ही साथ मानवता भी खो चुकी
है।
पूर्व परिषद ने दिया था ठेका.....
ऐसा ही एक और मामला फिर से नगर परिषद का सामने आया है जी हां हम बात कर रहे हैं पेटलावद के मुक्तिधाम की पेटलावद में एकमात्र मुक्तिधाम पपावती नदी के किनारे बना हुआ है और मुक्तिधाम सोदरीकरण योजना के तहत वर्ष 2015-16 में पेटलावद के इस मुक्तिधाम को सुंदर और रखरखाव पूर्ण करने के लिए तत्कालीन पूर्वनगर परिषद के द्वारा योजना बनाकर निर्माण प्रारंभ की गई थी और इसी के तहत पेटलावद के मुक्तिधाम के आसपास पका निर्माण कार्य, आने वाले लोगों को बैठने के लिए स्थान और दीवाले आदि बनाकर मुक्तिधाम के स्वरूप में परिवर्तन करने की प्रक्रिया की गई थी जिसका कामकाज का ठेका उस समय तत्कालीन परिषद के द्वारा पेटलावद क्षेत्र की राज कंस्ट्रक्शन नामक निर्माण कंपनी को दिया गया था और निर्माण कंपनी के द्वारा मुक्तिधाम पर बहुत कुछ कार्य किया भी था।
शोक सभा के लिए बन रहा था टीन शेड.....
इसके साथ ही साथ पेटलावद नगर परिषद के द्वारा तत समय मुक्तिधाम के सामने बने हुए कमरों के सामने ही अंतिम यात्रा में आए हुए लोगों के बैठने के लिए एवं बारिश के समय शोक सभा आदि रखने के लिए लोहे की टीन सेड के चद्दर लगाकर बैठने की व्यवस्था करने के लिए भी व्यवस्था की गई थी ।और इस टीन शेड को लगाने के लिए ठेकेदार के द्वारा तैयार करते हुए एंगल आदि लगाकर तैयार कर दिया गया था और एंगल और शेड लगे हुए 5 वर्ष से अधिक का समय हो गया है और मात्र इस एंगल पर चद्दर को लगाना ही बाकी है।
नहीं किया 5 साल में भुगतान....
रविवार के दिन नगर के लोग उस समय हतप्रभ रह गए जब मुक्तिधाम के सामने टीन शेड लगाने के लिए लगाएगी इन लोहे की एंग्लो को ठेकेदार के कुछ लोगों के द्वारा निकालना प्रारंभ किया गया जब लोगों के द्वारा राज कंस्ट्रक्शन के ठेकेदार आदि से चर्चा की गई तो उनके द्वारा बताया गया कि नगर परिषद के द्वारा मुक्तिधाम सोदरीकरण योजना के तहत पूरे मुक्तिधाम में निर्माण कार्य करने के लिए ठेका दिया गया था और उसी के तहत टीन सेड लगाए जाने के लिए भी कहां गया था और ठेकेदार के द्वारा अपने निजी खर्चे से लगभग ₹7 लाख ₹50 हजार खर्च करते हुए एंगल को लगा दिया गया और इन एंग्लो के रूपय के भुगतान के लिए ठेकेदार लगभग पिछले 5 वर्षों से नगर परिषद के चक्कर लगा रहा है परिषद के द्वारा अब तक इन एंगल का न तो बिलिंग की गई और ना ही भुगतान किया गया और ठेकेदार को भुगतान नहीं होने की दशा में नगर परिषद के द्वारा पिछले चार-पांच दिनों भुगतान नहीं करने और भुगतान में असमर्थता जाहिर करते हुए हुए ठेकेदार को दो टूक कहते हुए इन एंगल को निकालने के लिए कह दिया है ।जिसके चलते ठेकेदार के लोग रविवार को मुक्तिधाम पर लगे हुए टीन शेड लगाने के लोहे के एंग्लो को निकालने लग गए।
हो रही राजनीति....
उल्लेखनीय है कि मुक्तिधाम पर यह निर्माण कार्य मुक्तिधाम सोदरीकरण योजना की प्रक्रिया के तहत पूर्व परिषद के द्वाराप्रारंभ की गई थी और वर्तमान परिषद के द्वारा मुक्तिधाम में लगाए गए इन सेड को लगाने का भुगतान ठेकेदार को नहीं किए जाने से ठेकेदारों के इन एंग्लो को वहां से हटाया जा रहा है।पुरानी परिषद के कामों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी नयी परिषद की थी उसे राजनीतिक रंग देते हुए परिषद के द्वारा आगे बढ़ाने की वजह बने हुए निर्माण कार्य को भी वर्तमान परिषद के द्वाराहटाया जा रहा है ।
चाहते तो किसी भी मदसे कर सकते थे निर्माण कार्य पूरा.....
वैसे तो परिषद चाहती तो आज अपने खुद के आंतरिक संसाधनों के अलावा परिषद जो कि भाजपा समर्थित है चाहती तो इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री या किसी भी निधि अथवा किसी से फंड लाकर ,आमजन से सहयोग लेकर इस प्रक्रिया और निर्माण कार्य को पूरा किया जा सकता था लेकिन नगर परिषद के द्वारा अपने अधिकारों का उपयोग नहीं करते हुए मुक्तिधाम पर लगे हुए एंग्लो को हटाए जाने और ठेकेदार को भुगतान नहीं किए जाने का पूरा मामला सिर्फ राजनीति से जुड़ा हुआ लग रहा है।
जीवित के साथ मृत आत्माओं को भी कर रहे तंग...
वैसे तो अपनों की याद में लोगों के द्वारा मुक्तिधाम पर न सिर्फ वृक्षारोपण किया जाता है बल्कि कई ऐसे कार्य भी किए जाते हैं जिससे उनके रिश्तेदारों की आत्मा को शांति पहुंचे और इन सब चीजों की रखरखाव का काम एकमात्र नगर परिषद के जिम्मे है लेकिन नगर परिषद के द्वारा जहां जीवित लोगों के बैठने के लिए पूरे पेटलावद में कोई स्थान शेष नहीं छोड़ा है और नगर की जीवित आत्माओं को भी लगातार परिषद के द्वारा प्रताड़ित और परेशान किया जा रहा है वही परिषद और परिषद के कर्ताधर्ता मोटा भाई के द्वारा मृत आत्माओं की शांति के लिए भी अब मुक्तिधाम जैसी जगह को भी नगर परिषद के द्वारा अपने निजी स्वार्थों के चलते मुक्तिधाम में निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने की अपेक्षा बने हुए निर्माण कार्य को भी नगर परिषद तोड़ने में व्यस्त है।
विकास की जगह उजाड़....
देसी भाषा में एक कहावत है कि इंसान को अपने अगोत्रर सुधारने के लिए भी ऐसे पुण्य के कार्य करना चाहिए जिससे आपके संसार त्यागने के बाद लोग आपको याद रख सके। परिषद और उसके कर्ता-धर्ता के पास दुकानों को बनाने और बगीचों को उजाड़ने का पैसा तो है लेकिन सबसे अंतिम यात्रा का स्थान मुक्तिधाम को सुधारने के लिए पैसा नहीं है बाकी पाठक पूरा सच जानते हैं.…..