पेटलावद। वियोग तो विशेष योग है। प्रेम के सामीप्य में दोष आ जाता है। आप किसी व्यक्ति या जीव से अधिक सामीप्य करेगें तो दोष आ जाता है। जब दूरी बढती है तो प्रेम बढता है। उद्धव जैसे महाज्ञानी ने भी वृंदावन में ही जा कर प्रेम के बारे में जाना है। ज्ञानीजन जिस परब्रम्ह को नहीं पा सकते है उस परब्रम्ह को ब्रज की गोपीयों ने अपने ईशारो पर नचाया है। ज्ञान से बडा प्रेम है। प्रेम के वशिभूत हो कर भगवन को लीलाएं करते देखा है। श्री राधा रसामृत कथा के पंचम विश्राम दिवस पर कथा प्रवक्ता सुश्री वैष्णवी भट्ट ने विरह की लीला का वर्णन करते हुए राधा कृष्ण के विरह का करूणामय रूप प्रस्तुति किया। जिसे सुन कर सभी श्रोताओं के मन को विहल कर दिया और कई श्रोताओं की तो आंखों में आंसू आ गये।
कथा के अंतिम दिवस विभिन्न संगठनों,जनप्रतिनिधियों,समाजसेवियों और पत्रकार संगठनों ने कथा प्रवक्ता का सम्मान किया।इस अवसर पर अन्नकूट महोत्सव का आयोजन भी किया गया। जिसका लाभ गंगाराम,कांतिलाल और मुकेश परमार परिवान ने लिया तथा सभी भक्तों ने महाप्रसादी का लाभ लिया।
इस अवसर पर नगर निरीक्षक दिनेश शर्मा, वरिष्ठ अभिभाषक विनोद पुरोहित, वरिष्ठ पत्रकार हरिशंकर पंवार, वार्ड क्र. 01 के पार्षद और किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष मुकेश परमार, ब्राह्मण समाज अध्यक्ष मनोज जानी से संबोधित करते हुए नगर की बेटी के प्रथम बार कथावाचन पर सराहना करते हुए। उज्जवल भविष्य की कामना की।
कथा व्यास पीठ का सम्मान किया।....
भारतीय पत्रकार संघ के द्वारा साल श्रीफल और अभिनंदन पत्र भेंट कर कथा प्रवक्ता का सम्मान किया गया। इस अवसर संघ के जिलाध्यक्ष हरिश राठौड, तहसील अध्यक्ष प्रकाश पडियार,तहसील उपाध्यक्ष मोहन परमार, सर्व श्री सुरेश मुथा, हरिशंकर पंवार, मनोज पुरोहित, ओपी मालवीय,अर्जुन सिंह ठाकुर, पियुष पटवा,नरेंद्र परमार, पियुष राठौड आदि उपस्थित रहे।
नगर परिषद अध्यक्ष ललीता योगेश गामड, पार्षद मुकेश परमार, चांदनी निमजा, हंसा राठौड ने भी साल श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। इसी क्रम में आद्यशक्ति महिला मंडल के द्वारा भी सम्मान किया गया। इसके साथ ही नगर निरीक्षक दिनेश शर्मा, विनोद पुरोहित, डॉ. एस के धूरिया,कैलाश शुक्ला, डॉ दिपेश शुक्ला सहित अन्नकूट महाप्रसादी के लाभार्थी परिवार गंगाराम जी, कांतिलाल जी और मुकेश परमार परिवार ने भी साल श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया।मोहनलाल सोनी के द्वारा भजन गीताका भेंट कर सम्मानित किया गया।
प्रेम का महत्व बताने की लीला है।....
कथा प्रवक्ता वैष्णवी भट्ट ने बताया कि राधा कृष्ण का 100 वर्ष का दारूण्य वियोग हुआ। किंतु वह केवल उपरी माया रूप में हुआ। भगवान राधा कृष्ण एक है। भगवान की यह लीला प्रेम के महत्व ओर प्रेम में केवल सामिप्य ही नहीं वियोग में भी प्रेमी के सुख की कामना और वास्तवीक प्रेम को परिभाषीत करने के लिए लीला की गई।
*‘‘प्रेम नगर मत जा मुसाफिर- प्रेम नगर का पंथ कठिन है। प्रेम नगर की गहरी है नदियां-प्रेम नगर की संकरी है गलियां‘‘* जैसे पदों के माध्यम से प्रेम का महत्व बताते हुए। प्रभु के प्रति वास्तविक प्रेम को दर्शाया है। कथा प्रवक्ता ने सावधान किया कि जो सांसारिक रूप से हम एक दूसरे प्रति आकर्षण को प्रेम मानते है। वह प्रेम नहीं है। केवल राधा रमण जी के चरणों की प्रीति हमारा मन लगे वहीं वास्तविक प्रेम है।
ज्ञान से भी बडा प्रेम है।....
कथा में आगे बताया कि उद्धव जैसे महाज्ञानी ने जब मथुरा से वृंदावन आ कर ग्वाल बालों,गोपियों, नंदबाबा, यशोदा और राधा रानी सहित जड चेतन जीव की स्थिति देखी तो उन्हें वास्तविक प्रेम भक्ति का ज्ञान हुआ और उनका ज्ञान धरा का धरा रह गया।
हमारे मन में ब्रज बसे।....
कथा के विश्राम पर राधा जी से प्रार्थना करी की हमें गोपी भक्ति दिजो और हमारे पास कोई साधन नहीं है कोई प्रेम नहीं है कोई भक्ति नहीं है। हे श्री जी तव गुण गावत,दिवस बितावत और नयन से आंसू टपके ऐसी हमारी स्थिति हो।और हमारे मन में ब्रज बस जाये ताकी ठाकुर जी हमारे मन से कभी न निकले।
सहयोगीयों का सम्मान किया।...
इस अवसर पर कथा में सहयोग करने वाले यजमान गंगाराम जी परमार परिवार, मांगीलाल बिलवाल, दीपक सोलंकी, महेंद्र अग्रवाल, कैलाश नागर,राजेंद्र दवे, जीवन राठौैड, महेंद्र सिंह ठाकुर, ओम सोनी, आयदान भाई, चित्रांश सोनी, डॉ एसके धूरिया, निलेश भट्ट,राजू भाई नागर और प्रसादी सहयोगी सिद्वार्थ गुगलिया और प्रितम सेठिया सहित सहयोग करने वाले पं. वेंकट त्रिवेदी, मयंक जानी, कन्हैयालाल गवली, मंदिर पुजारी मनोहरदास वैरागी व शिवदास वैरागी,सचिन धूरिया सहित अन्य सहयोगीयों का व्यास पीठ से सम्मान किया गया।

